पूरी तरह चरमरा गई है स्वास्थ्य व्यवस्था, भगवान भरोसे है गरीब जनता

प्रदेश की योगी सरकार आम जनता को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। किसी भी चुनी हुई सरकार का प्रथम दात्यिव आम जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है लेकिन आज प्रदेश में जिस प्रकार शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए आम जनता तरस रही है यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता कृष्णकान्त पाण्डेय ने आज जारी बयान में कहा कि वर्षा ऋतु आरम्भ हो चुकी है, तमाम प्रकार की जलजनित बीमारियां बड़ी तेजी से पैर पसार रही हैं, ऐसे में आम जनता को समुचित चिकित्सा के अभाव में भयंकर बीमारियों के चलते अपनी जान गंवानी पड़ रही है किन्तु उत्तर प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह वेंटीलेटर पर है, आम जनता समुचित चिकित्सा और दवाओं के लिए हलकान, परेशान है और कोई सुनने वाला नहीं है।

प्रवक्ता ने कहा कि अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, सरकार ने गरीब जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। कहीं स्ट्रेचर का अभाव, कहीं वेंटिलेटर का अभाव, कहीं बेड का अभाव और कहीं चिकित्सीय उपकरण धूल फांक रहे हैं। सरकारी हास्पिटल चिकित्सा के नाम पर सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि गंभीर बीमारियों को छोड़ दिया जाए तो सामान्य तौर पर बीपी, डायबिटीज, सांस और दिमाग की दवाइयों के दाम में 6 माह में एक पत्ता दवा में 5 से 50 रूपये की वृद्धि होने से गरीब जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है किन्तु सरकार को आम जनता की जान की परवाह कम है, चुनावी तैयारियां और वोट की परवाह अधिक है।

प्रवक्ता ने कहा कि राजधानी का के0जी0एम0यू0 हर स्तर पर चाहे चिकित्सा हो या मेडिकल शिक्षा आदि, विगत पांच साल में 23वें से 75वें स्थान पर पहुंच गया है इसके लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। प्रदेश के कोने-कोने से आने वाले मरीज जहां केजीएमयू में समुचित इलाज पा रहे थे वहीं अब केजीएमयू भ्रष्टाचार और बदहाल व्यवस्था की भेंट चढ़ चुका है। अक्सर गंभीर मरीज इलाज के अभाव में जान गंवा रहे हैं यहां तक कि समय रहते भर्ती न हो पाने से मरीजों की होने वाली असमय मौतों की खबरें समाचारपत्रों की सुर्खियां बनती रहती हैं। लेकिन सरकार कोरी बयानबाजी तक ही सीमित रहती है।

प्रवक्ता ने कहा कि आये दिन चाहे मुख्यमंत्री जी हों या उपमुख्यमंत्री और विभाग के मंत्रीगण, उनके सिर्फ बयान अखबारों में चमकते रहते हैं किन्तु चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के नाम पर शून्य है। आम जनता समुचित चिकित्सा के अभाव में भगवान भरोसे जीने को विवश है।

Related Articles

Back to top button
btnimage