भोजपुर जिले के उदवंतनगर में 32 एकड़ क्षेत्र में होगा इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का निर्माण : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

मुख्य बिंदु

  • मुख्यमंत्री ने भोजपुर जिले के नवादाबेन पंचायत स्थित बाणासुर मत्स्य बीज क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का शिलान्यास किया।
  • 32 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले इस पार्क में मत्स्य पालन के साथ इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
  • परियोजना से मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि होगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
  • यह पार्क बिहार में आधुनिक और समेकित मत्स्य विकास का मॉडल केंद्र बनेगा।
  • पोषण सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने में परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन के बाद अब शिक्षा और विकास के नए केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।

₹31.21 करोड़ की लागत से बनेगा इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क

पटना, 15 जून 2026। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुर जिले के उदवंतनगर प्रखंड के नवादाबेन पंचायत स्थित बाणासुर मत्स्य बीज क्षेत्र में ₹31.21 करोड़ की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का शिलान्यास किया।

32 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में अत्याधुनिक मत्स्य पालन और प्रसंस्करण सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को परियोजना के लेआउट और विभिन्न संरचनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा एक्वा पार्क

परियोजना के तहत निम्न सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा—

  • कार्प हैचरी
  • स्ट्रिप्ड कैटफिश हैचरी
  • ब्रूडर इन्क्यूबेशन यूनिट
  • ओवरहेड टैंक
  • कंक्रीट रियरिंग टैंक
  • ईटीपी पाइपलाइन
  • विभिन्न प्रकार के तालाब
  • बायोफ्लॉक इकाइयां
  • आरएएस (RAS) प्रणाली
  • फीड मिल एवं मशीनरी
  • छात्रावास और अतिथि गृह
  • प्रशासनिक भवन
  • प्रशिक्षण एवं प्रयोगशाला परिसर
  • जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला
  • रोग निदान प्रयोगशाला
  • क्वारंटीन टैंक एवं वेट लैब

मत्स्य पालन बनेगा बिहार की समृद्धि का आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, मत्स्य पालन और पशुपालन बिहार की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि उत्तर बिहार में बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन होता है और यह लाखों लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है।

मत्स्य पालन के साथ इको-टूरिज्म को भी मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाणासुर मत्स्य बीज क्षेत्र की 32 एकड़ भूमि पर मत्स्य पालन के साथ-साथ इको-टूरिज्म का भी विकास किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि परियोजना स्थल के एक ओर रेलवे ट्रैक और दूसरी ओर फोरलेन सड़क है, जिससे यह क्षेत्र पर्यटन और निवेश की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनेगा।

बिहार में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मनेर से बक्सर तक समुद्री तट जैसी सड़क (मरीन ड्राइव) का निर्माण कराया जाएगा, जिसका नाम महर्षि विश्वामित्र के नाम पर रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि सोन नदी के जल के बेहतर उपयोग और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए भी व्यापक योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

मुफ्त बिजली और सौर ऊर्जा को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सभी घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने बताया कि लाखों घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना पर तेजी से कार्य हो रहा है। राज्य सरकार बिजली उपभोक्ताओं को 23 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी भी प्रदान कर रही है।

शिकायत निवारण के लिए जवाबदेह व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित सहयोग शिविरों में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

यदि 30 दिनों के भीतर शिकायत का निस्तारण नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा और रोजगार को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के सभी प्रखंडों में उच्च गुणवत्ता वाले मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने नालंदा और विक्रमशिला जैसी ऐतिहासिक शिक्षण परंपराओं को पुनर्जीवित करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की स्थापना से आधुनिक मत्स्य तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन संभव होगा। इससे मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, स्थानीय रोजगार सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम में रहे कई गणमान्य अतिथि उपस्थित

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, श्रम संसाधन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, उच्च शिक्षा एवं विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर, विभिन्न जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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