LDA News: जनहित गारंटी अधिनियम के प्रकरणों के निस्तारण में लापरवाही पर लगेगा जुर्माना

लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डाॅ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी ने बुधवार को जनहित गारण्टी अधिनियम से सम्बंधित प्रकरणों के निस्तारण की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि सभी लंबित प्रकरणों का एक सप्ताह में निस्तारण सुनिश्चित करायें अन्यथा सम्बंधित अधिकारी/कर्मचारी के खिलाफ जनहित गारंटी अधिनियम के अंतर्गत 250 रूपये से लेकर पांच हजार रूपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा, जिसकी वसूली सम्बंधित व्यक्ति के वेतन से की जाएगी।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डाॅ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी ने अपना कार्यभार संभालने के बाद 28 जून 2022 को जनहित गारंटी अधिनियम से सम्बंधित लंबित प्रकरणों की पहली समीक्षा बैठक की थी। इसमें समस्त अनुभागों में फ्री-होल्ड, नामान्तरण और रिफण्ड आदि के प्रकरण बड़ी संख्या में लंबित पाये गए थे। इस पर उपाध्यक्ष ने सख्त रवैया अपनाते हुए समस्त लम्बित प्रकरणों को जल्द से जल्द निस्तारित कराने के निर्देश दिये थे। उनकी सख्ती के चलते महज तीन दिन में ही 193 लंबित प्रकरण निस्तारित हुए थे।
बुधवार को उपाध्यक्ष द्वारा तीसरी बार जनहित गारंटी अधिनियम के प्रकरणों के निस्तारण के सम्बंध में समीक्षा बैठक की गई। इसमें पाया गया कि नामांतरण के 73 और फ्री-होल्ड के 57 मामले निस्तारित हो गए हैं। लेकिन, इसके बाद भी कुछ पुराने प्रकरणों का निस्तारण न होने पर उपाध्यक्ष द्वारा नाराजगी व्यक्त की गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो प्रकरण जनहित गारंटी अधिनियम की निर्धारित समय सीमा समाप्त हो जाने के पश्चात भी लंबित हैं, उन्हें हर हाल में एक सप्ताह के अंदर निस्तारित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकरण में विधिक अथवा अन्य कोई अड़चन हो तो उसका स्पष्ट कारण प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर अगली समीक्षा बैठक में अनावश्यक रूप से कोई प्रकरण लंबित पाया जाता है तो सम्बंधित अधिकारी/कर्मचारी पर जनहित गारंटी अधिनियम के अंतर्गत 250 रूपये से लेकर पांच हजार रूपये तक का अर्थदण्ड लगाया जाएगा, जिसकी वसूली उनके वेतन से की जाएगी।
बैठक में सचिव पवन कुमार गंगवार ने आई0जी0आर0एस0 से सम्बंधित प्रकरणों को सही जानकारी के साथ समयबद्ध तरीकेे से निस्तारित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रकरण उनके विभाग से सम्बंधित नहीं है तो प्रकरण को सम्बंधित विभाग को प्रेषित करके आख्या पूर्ण कराकर अपलोड करायी जाए।
बैठक में अपर सचिव ज्ञानेन्द्र वर्मा, वित्त नियंत्रक दीपक सिंह, मुख्य अभियंता अवधेश तिवारी समेत समस्त अधिकारी उपस्थित रहे।








