पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने 15 जनपदों में 30 नवनिर्मित वृहद गोसंरक्षण केन्द्रों का किया लोकार्पण

प्रत्येक केन्द्र में 400 गोवंश को संरक्षित करने की क्षमता

गौसंरक्षण केंद्रों के निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए

राज्य सरकार निराश्रित गोवंशों के संरक्षण समुचित भरण-पोषण हेतु निरंतर कार्य कर रही है

वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना से गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा- धर्मपाल सिंह

उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने पशुपालन निदेशालय में आयोजित एक कार्यक्रम में निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए हेतु प्रदेश के 15 जनपदों के 30 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया। इसके तहत जनपद हरदोई में 07, शाहजहांपुर में 06, गोरखपुर, जालौन, अलीगढ़ तथा बस्ती में 02-02 एवं फर्रूखाबाद, सीतापुर, हमीरपुर, जौनपुर, झांसी, बिजनौर, फतेहपुर, बांदा तथा हापुड़ में 01-01 वृहद गो संरक्षण का निर्माण शत-प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रत्येक केंद्र में लगभग 400 गोवंश को संरक्षित किया जा सकता है।

धर्मपाल सिंह ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में राज्य सरकार निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशों के संरक्षण, संवर्धन तथा उनके समुचित भरण-पोषण हेतु निरंतर कार्य कर रही है। वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना से न केवल गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, बल्कि उनके लिए चारा, पानी, चिकित्सकीय सुविधाएं एवं स्वच्छ वातावरण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

प्रदेश में अब तक कुल 630 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों की स्वीकृति प्रदान की गयी है तथा 518 केन्द्रों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। प्रत्येक केन्द्र की इकाई निर्माण लागत 160.12 लाख है। वृहद गो संरक्षण केन्द्र के निर्माण पर कुल रू. 8311.78 करोड अवमुक्त किया गया है। प्रत्येक वृहद गो संरक्षण केन्द्र की गोवंश धारण क्षमता लगभग 400 गोवंश की है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में वृहद गो संरक्षण केन्द्रों के निर्माण हेतु धनराशि रू. 10000.00 लाख (एक अरब मात्र) प्राविधानित है, जिसके सापेक्ष 46 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यह धनराशि शीघ्र ही अवमुक्त कर दी जायेगी।

इन वृहद गो संरक्षण केन्द्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जिनमें पर्याप्त भूसा भंडारण, हरा चारा उत्पादन, स्वच्छ पेयजल तथा पशु चिकित्सा सेवाएं जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इससे एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। प्रदेश के वृहद गो संरक्षण केन्द्रों तथा अन्य गो आश्रय स्थलों के संचालन में एनजीओ/एफपीओ/स्वयं सहायता समूहों एवं कारपोरेट फर्माें की भी भागीदारी सुनिश्चित करायी जा रही है।

कार्यक्रम में धर्मपाल सिंह ने कहा कि गो संरक्षण कार्यों में स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए। गौसंरक्षण केंद्रों के निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए। मंत्री ने जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा की कि वे इन वृहद गो संरक्षण केन्द्रों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि गो संरक्षण के इस अभियान में सहयोग प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा गो आश्रय स्थलों को स्वावलम्बी बनाने हेतु बहुआयामी प्रयोग किये जा रहे हैं। गाय के गोबर से गो दीप, धूपबत्ती, गोलॉग, गोबर के गमले, वर्मी कम्पोस्ट तथा सी0बी0जी0 उत्पादन इकाईयोें की स्थापना की जा रही है। इन इकाईयों के संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा महत्वपूर्ण योगदान किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुकेश कुमार मेश्राम, अपर मुख्य सचिव, पशुधन, उ0प्र0 शासन ने कहा कि गोवंश संरक्षण कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन एवं आर्थिक उन्नति के अनेक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण के क्षेत्र मंे किए जा रहे ये प्रयास राज्य को आत्मनिर्भर गोपालन की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

देवेन्द्र कुमार पाण्डेय विशेष सचिव, पशुधन, डा0 मेमपाल सिंह, निदेशक, प्रशासन एवं विकास, डा0 राजेन्द्र प्रसाद, रोग नियत्रंण एवं प्रक्षेत्र, डा0 प्रमोद कुमार, अपर निदेशक, गोधन विकास तथा संबंधित जनपदों के जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिकों द्वारा वर्चुअल मोड में सम्पन्न लोकार्पण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया।

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