योगी सरकार में यूके के लिए चौसा आम की पहली निर्यात खेप रवाना, उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने किया फ्लैग ऑफ
एपीडा के प्रयास और भारत-यूके CETA के प्रभावी होने से यूपी के चौसा आम को मिला वैश्विक बाजार

भारत-यूके CETA से प्रदेश के लगभग 99 प्रतिशत कृषि निर्यात को मिलेगा जीरो ड्यूटी का लाभ, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कृषि एवं बागवानी उपज को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के प्रयासों तथा भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता के प्रभावी होने के उपरांत उत्तर प्रदेश से यूनाइटेड किंगडम के लिए ताजे चौसा आमों की पहली निर्यात खेप का फ्लैग ऑफ शुक्रवार को उद्यान निदेशालय, सप्रू मार्ग, लखनऊ से किया गया।
उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने हरी झंडी दिखाकर 1,200 किलोग्राम ताजे चौसा आमों की खेप यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना की। भारत-यूके CETA लागू होने के बाद प्रदेश से यूके के लिए भेजी जा रही ताजे आमों की यह पहली खेप है।
इस अवसर पर उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की उत्कृष्ट कृषि एवं बागवानी उपज को विश्व के बाजारों तक पहुंचाकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के गठन के बाद से प्रत्येक वर्ष प्रदेश के आम सहित अन्य औद्यानिक उत्पादों के निर्यात में निरंतर वृद्धि हुई है और आज उत्तर प्रदेश की उपज विश्व के अनेक देशों तक पहुंच रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा राज्य के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इससे कृषि एवं बागवानी उत्पादों का परिवहन अधिक सुगम, तेज एवं कम लागत वाला होगा, जिससे किसानों और निर्यातकों दोनों को लाभ मिलेगा।
उद्यान मंत्री ने कहा कि प्रदेश में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गांव-गांव तक निर्यातकों का नेटवर्क विकसित किया गया है। जहां पहले निर्यातक केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, वहीं आज प्रदेश के अधिकांश विकास खंडों में निर्यात गतिविधियां विकसित हो चुकी हैं। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश बागवानी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड का गठन किया गया है, जो किसानों, एफपीओ एवं उद्यमियों को वैश्विक बाजारों की मांग के अनुरूप उत्पादन एवं निर्यात के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिशेष कृषि एवं बागवानी उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के ठोस प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश का कृषि निर्यात निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने स्वयं दो टन दशहरी आम लेकर मॉस्को में निर्यात की शुरुआत की थी और आज उत्तर प्रदेश का दशहरी आम नियमित रूप से दुबई सहित अनेक देशों के बाजारों में पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत-यूके ब्म्ज्। के अंतर्गत यूनाइटेड किंगडम ने भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात मूल्य का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश उत्पादों को शुल्क-मुक्त (जीरो ड्यूटी) बाजार पहुंच प्रदान की है। इससे कृषि, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के निर्यात को नई गति मिलेगी तथा किसानों, एफपीओ, कृषि उद्यमियों और निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजारों में नए अवसर उपलब्ध होंगे।
उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख बागवानी एवं आम उत्पादक राज्यों में अग्रणी है। यहां के चौसा एवं दशहरी आम अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, विशिष्ट स्वाद और सुगंध के कारण विश्वभर में विशेष पहचान रखते हैं। भारत-यूके CETA के प्रभावी होने के बाद ऐसे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है, जिससे प्रदेश के किसानों की आय में वृद्धि और कृषि निर्यात को नई मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बी.एल. मीणा, निदेशक उद्यान बी.पी. राम, उत्तर प्रदेश बागवानी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड के अधिकारी, निर्यातक, पैक हाउस संचालक, विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं कृषक उपस्थित रहे।








