प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण तकनीक द्वारा कुशल प्रबंधन की पहल

इंदिरा गाँधी सहकारी प्रबंध संस्थान, लखनऊ के निदेशक (प्र0) डॉ0 एस0 एन0 झा ने बताया कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (पैक्स) की दक्षता बढ़ाने, उनके संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने, पैक्स को उनके व्यवसाय में विविधता लाने और कई गतिविधियों / सेवाओं को शुरू करने की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण का निर्णय लिया है। इस योजना द्वारा 63,000 कार्यात्मक पैक्स के कम्प्यूटरीकरण का प्रस्ताव है । जिसके लिए कुल रू0 2516 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है ।
वर्तमान में अधिकांश पैक्स कम्प्यूटरीकृत नहीं हुए हैं और अभी भी मैन्युअल रूप से कार्य कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप इनमें अक्षमता और विश्वास की कमी व्याप्त है। कुछ राज्यों में पैक्स का स्टैंड अलोन और आंशिक कम्प्यूटरीकरण किया गया है। उनके द्वारा उपयोग किए जा रहे सॉफ़्टवेयर में एकरूपता नहीं है और वे डीसीसीबी और एससीबी के साथ परस्पर जुड़े हुए नहीं हैं। माननीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में, पूरे देश में सभी पैक्स को कंप्यूटरीकृत करने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक कॉमन प्लैटफ़ार्म पर लाने और उनके दिन – प्रतिदिन के कार्यों में एक सामान्य लेखा प्रणाली (CAS) लागू करने का प्रस्ताव किया गया है।
पैक्स का कम्प्यूटरीकरण, वित्तीय समावेशन के उद्देश्य को पूरा करने और विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के अलावा, विभिन्न सेवाओं और उर्वरक, बीज आदि जैसे इनपुट के प्रावधान के लिए नोडल सेवा वितरण केंद्र भी बन जाएगा। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटलीकरण में सुधार के अलावा बैंकिंग गतिविधियों के साथ-साथ गैर-बैंकिंग गतिविधियों के आउटलेट के रूप में पैक्स की पहुंच में सुधार करने में मदद करेगी।
इस परियोजना में साइबर सुरक्षा और डेटा भंडारण के साथ ईआरपी आधारित कॉमन सॉफ्टवेयर का विकास, पैक्स को हार्डवेयर संबंधी सहायता प्रदान करना, अनुरक्षण संबंधी सहयोग और प्रशिक्षण सहित मौजूदा रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण शामिल है। यह सॉफ्टवेयर स्थानीय भाषा में होगा जिससे राज्यों की जरूरतों के अनुसार परिवर्तन करना संभव होगा। परियोजना प्रबंधन इकाइयां (पीएमयू) केंद्र और राज्य स्तर पर स्थापित की जाएंगी। लगभग 200 पैक्स के समूह में जिला स्तर पर सहायता भी प्रदान की जाएगी। उन राज्यों के मामले में जहां पैक्स का कम्प्यूटरीकरण पूरा हो गया है, 50,000/- रुपये प्रति पैक्स की प्रतिपूर्ति की जाएगी, बशर्ते वे कॉमन सॉफ़्टवेयर के साथ एकीकृत / अपनाने के लिए सहमत हों, उनका हार्डवेयर आवश्यक विनिर्देशों को पूरा करता हो और सॉफ़्टवेयर 1 फरवरी, 2017 के बाद चालू किया गया हो। ऐसा करने के उपरांत उन सभी समितियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर कुशल प्रबंधन की ओर एक कदम उठाया जा सकेगा।








