बहुराज्यीय सहकारी समिति सहकार से समृद्धि की ओर एक सराहनीय कदम

इंदिरा गाँधी सहकारी प्रबंध संस्थान, लखनऊ के निदेशक, डॉ0 एस0 एन0 झा ने बताया कि देश के तीव्र आर्थिक विकास की अभिकल्पना को दृष्टिगत रखते हुए देश के अर्थशास्त्रियों ने देश के जनमानस की समृद्धि हेतु सहकारिता को एक सशक्त माध्यम के रूप में अपनाने की अनुसंशा की है। इन अनुसंशाओं को दृष्टिगत रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री ने इस वर्ष के अपनी पहली कैबिनेट बैठक में तीन बहुराज्यीय सहकारी समिति एक्ट को मूर्तरूप देने का कार्य किया। ये तीन बहुराज्यीय सहकारी समितियां बहुराज्यीय सहकारी बीज समिति, बहुराज्य सहकारी निर्यात समिति एवं बहुराज्यीय सहकारी जैविक समिति हैं ।

इन समितियों के गठन के पश्चात् एक तरफ जहाँ हमारे निर्यात को प्रोत्साहन होगा तो दूसरी तरफ कृषकों को गुणवत्ता युक्त बीज भी उपलबध हो पाएगें एवं खेती पर निर्भर किसानों की आय में भी वृद्धि हो पाएगी । इन समितियों से देश के आर्थिक विकास में सहकारिता एक सशक्त भूमिका का निर्वहन करेगी। इससे जुड़े सदस्यों की आर्थिक भागीदारी उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी एवं देश के पांच ट्रिलियन डॉलर के अर्थव्यवस्था प्राप्ति के सपने को साकार करने में भी अपना वांछित सहयोग प्रदान कर पाएगी ।

उपरोक्त के अतिरिक्त देश में कुल 95 हजार पैक्स में से 63 हजार प्रभावी पैक्स को 2516 करोड़ रूपये के बजट से कम्प्यूटरीकृत किया जाना भी प्रस्तावित है। जिससे लगभग 13 करोड़ सीमांत एवं छोटे किसानों को लाभ प्राप्त होगा एवं पारदर्शिता के साथ-साथ दक्षता भी हासिल हो पाएगी । पैक्स का कम्प्यूटरीकरण वित्तीय समावेशन के उद्देश्य को पूरा करने और विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों को सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के अलावा विभिन्न सेवाओं और उर्वरक बीज आदि जैसे इनपुट के प्रावधान के लिए नोडल सेवा वितरण बिन्दु भी बन जाएगा।

परियोजना से साइबर सुरक्षा और डेटा भण्डारण के साथ ईआरपी आधारित सॉफ्टवेर का विकास, पैक्स को हार्डवेअर संबंधी सहायता प्रदान करना, अनुरक्षण संबंधी सहयोग और प्रशिक्षण सहित मैजूदा रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण शामिल है। यह सॉफ्टवेर स्थानीय भाषा में होगा। लगभग 200 पैक्स के समूह में जिला स्तर पर सहायता भी प्रदान की जाएगी । आशा है कि सहकारी संस्थाएं राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक, विकास में एक मील का पत्थर साबित होंगी ।

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