अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण के आदेश भी ज़ोनलों के दफ्तर में फांक रहे धूल

लखनऊ।

विकास प्राधिकरण का सबसे रसूख वाला अनुभाग प्रवर्तन।

कई वर्षों से मलाई खा रहे प्रवर्तन में तैनात अवर अभियंता।

एक ही अनुभाग में जमे अवर अभियंताओं का तैयार हुआ नेटवर्क।

ज़ोन 1 से लेकर जोन 7 के इर्द गिर्द ही होते हैं अवर अभियन्ताओं के ट्रांसफर।

प्रवर्तन अनुभाग में कार्य करने वाले अधिकतर अवर अभियंता नही करना चाहते प्रवर्तन में काम।

तबादला एक्सप्रेस के इंतजार में बड़ी आस से देख रहे प्रवर्तन अनुभाग के अवर अभियंता।

अवैध कालोनियों से लेकर अवैध कॉम्प्लेक्स, अवैध अपार्टमेंट बन रहे इलाके के अवर अभियंताओं के लिए चुनौती।

एक तरफ कई ऐसा नेता अवर अभियंता जिनके कंधों पर है अपने संघ की जिम्मेदारी।

जिसके चलते नही दे पाते है इलाके मे समय लिहाजा तेजी से पनप रहा इलाके मे अवैध निर्माण।

आखिर क्यों तबादले के दौरान प्रवर्तन के ही अलग अलग ज़ोन में हो जाती है तैनाती।

प्राधिकरण के ज़ोन 2 ज़ोन 3 ज़ोन 4 ज़ोन 5 में मजबूत नेक्सेस के चलते नहीं हो पाती है कार्यवाही।

सील निर्माणों में काम हो या अवैध निर्माण हो या अनियोजित कालोनियां हो हर मामले में अव्वल चुनिंदा ज़ोन।

चुनिंदा जोनों में विहित प्राधिकारी पीसीएस रैंक के अफसर होने के बावजूद इलाके में कार्यवाही के नतीजे सिफर रहें।

पूर्व में अवैध निर्माणों पर कार्यवाही को तेजी देने के लिए बनाई गई थी जोनल व्यवस्था।

जोनल व्यवस्था लागू होते ही तेजी से पनपने लगे अवैध निर्माण शुरू हुआ कई सील निर्माणों पर कार्य।

जिन अवैध निर्माणों के हुए ध्वस्तीकरण के आदेश वो भी ज़ोनलो के दफ्तर में फांक रहे धूल।

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