पराली जलाने से बढ़ रहा वायु प्रदूषण, प्रशासन की उदासीनता पर ग्रामीणों ने जताई चिंता

अयोध्या के बीकापुर तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में धान की मड़ाई के बाद पराली जलाने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, जिससे क्षेत्र की वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। अदालत द्वारा पराली जलाने पर सख्त निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कई किसान अपने खेतों में फसल अवशेष को जला रहे हैं, जो भविष्य में गंभीर वायु प्रदूषण का कारण बन सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता के चलते किसान बेखौफ पराली जलाने का काम कर रहे हैं। पहले किसान धान की कटाई के बाद फसल को खलिहान में इकट्ठा कर पिटाई करते थे और पुवाल को पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करते थे। लेकिन हाल के वर्षों में ट्रैक्टर व आधुनिक कृषि उपकरणों के बढ़ते उपयोग से बैलों का पालन और उनके द्वारा खेत जोतने की परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है।
इसी कारण किसान थ्रेशर से मड़ाई कराने के बाद अनाज अलग कर लेते हैं और बचे हुए पुवाल को अनुपयोगी समझते हुए खेतों में ही जला देते हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि गन्ने की कटाई के बाद बची सूखी पत्तियाँ भी किसान जलाने लगे हैं।
क्षेत्र के जागरूक लोगों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की तरह इस क्षेत्र में भी पराली जनित वायु प्रदूषण का संकट गहराता जाएगा। इसलिए प्रशासन को तत्काल प्रभावी रूप से इस पर रोक लगाने की ज़रूरत है।
बीकापुर विकासखंड के सहायक विकास अधिकारी (कृषि) अटल बिहारी वर्मा ने बताया कि खेतों में पराली जलाने से मिट्टी के सूक्ष्म जैविक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है। इससे 30 किलोमीटर दूरी तक धुआं फैलकर वायु प्रदूषण बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है।








