#LDA News: भवन मरम्मत/निर्माण/विस्तारीकरण कराने के सम्बंध में एडवाइजरी

अपने भवन की मरम्मत/निर्माण/विस्तारीकरण कराने की योजना बना रहे आम नागरिकों को बेवजह अधिकारियों के पास चक्कर न लगाने पड़े। इसके लिए प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डाॅ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी ने जन सामान्य के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें प्राधिकरण के क्षेत्रान्तर्गत जन सामान्य द्वारा निर्मित क्षेत्र एवं ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भवन मरम्मत/निर्माण/विस्तारीकरण कराये जाने हेतु नागरिकों के अधिकारों का विवरण दिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नागरिक इस क्रम में क्या कर सकते हैं और क्या नहीं।

मरम्मत कार्य हेतु प्रभावी भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2008 (यथासंशोधित 2011/2016) में निम्न प्राविधानों हेतु किसी अनुज्ञा की आवश्यकता नहीं हैः-

– ऐसे खिड़की या दरवाजे या रोशनदान का खोलना अथवा बन्द करना, जो किसी दूसरे की सम्पत्ति की और न खुलते हों।
– आन्तरिक संचालन हेतु दरवाजों का प्राविधान।
– न्यूनतम मापदण्डों का उल्लंघन न होने पर आन्तरिक विभाजन।
– बागवानी सफेदी करना, रंगाई करना।
– पूर्व स्वीकृत आच्छादन पर पुनः टाईल्स लगाना या छत का निर्माण करना (परन्तु मेजनाइन तल की छत का निर्माण अनुमन्य नहीं होगा), पुनः फर्श निर्माण प्लास्टर करना या प्लास्टर की मरम्मत।
– अपनी भूमि पर 0.75 मीटर चैड़े सनशेड का निर्माण।
– अपने भूखण्ड के सीमाकंन उपरांत सड़क की मध्य रेखा से अधिकतम 1.65 मीटर ऊँची बाउण्ड्रीवाल का निर्माण, परन्तु महायोजना/जोनल प्लान/ले-आउट प्लान में निर्धारित सड़क की चैड़ाई के अन्तर्गत आने वाली भूमि पर बाउण्ड्रीवाल का निर्माण अनुमन्य नहीं होगा।
– छत/टेरेस, बालकनी/बरामदे में पैरापेट का निर्माण।
– भवन उपविधियों में प्राविधानित मानकों के अनुसार पोर्टिको/पोर्च का निर्माण।
– सेप्टिक टैंक/सोक पिट का निर्माण, हैण्ड पम्प लगाना।
– निर्माण कार्य हेतु अस्थाई वाटर टैंक का निर्माण।
– प्राकृतिक आपदा के कारण नष्ट हुए भवन को उस सीमा तक जिस सीमा तक नष्ट होने से पूर्व निर्माण था, का पुनर्निर्माण।
– वर्षा जल के संचयन, संरक्षण एवं हार्वेस्टिंग हेतु आवश्यक संरचनाओं (भूमिगत वाटर टैंक सहित) का निर्माण।
– वैकल्पिक सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने हेतु छत पर आवश्यक संरचनाओं का निर्माण।

निर्मित क्षेत्र में विकास कार्य हेतु प्रभावी भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2008(यथासंशोधित 2011/2016) में निम्न प्राविधान हैं:-

– निर्मित क्षेत्र में 100 वर्ग मीटर तक के भूखण्डों पर आवासीय भवनों के निर्माण/पुनर्निर्माण व जीर्णोद्धार के लिए किसी प्रकार की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। किन्तु प्रतिबन्ध यह होगा कि महायोजना व भवन उपविधियों, आदि के अनुसार सैट-बैक छोड़े गए हैं एवं निर्माण तीन मंजिल से अधिक न हो तथा अनाधिकृत रूप से विभाजित न हों।
– विद्यमान सड़क की चैड़ाई 4.0 मी0 से कम होने पर भूखण्ड का अग्रभाग सड़क की मध्य रेखा से 2.0 मी0 की दूरी पर होगा। उसके उपरान्त फ्रंट सैट-बैक 1.2 मी0 होगा।

ग्रामीण आबादी क्षेत्र में विकास कार्य हेतु प्रभावी भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2008 (यथासंशोधित 2011/2016) में कोई प्राविधान नहीं हैः-

– भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के प्राविधान के अनुसार किसी भी आवासीय भवन हेतु न्यूनतम 9.0मी0 मार्ग उपलब्ध होने पर भवन उपविधि में प्राविधानित भू-आच्छादन, एफ.ए.आर. एवं सैट बैक का प्राविधान होने पर मानचित्र की स्वीकृति का कार्य किया जाएगा, परन्तु स्वीकृति हेतु प्रस्तुत भवन/भूखण्ड अनाधिकृत कालोनी का भाग नहीं होना चाहिए।

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