आखिर कहाँ सो गए राजधानी लखनऊ के दिग्गज पत्रकार? एकलौता पत्रकार बैठा धरने पर

रिपोर्ट: ऋषि कुमार शर्मा।

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बहुत अच्छी है ऐसा गुणगान सरकार करती है तो आखिर क्यों बलिया के पत्रकार को न्याय नहीं मिल रहा है?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सौकड़ों दिग्गज पत्रकार है लेकिन बलिया मामले में कोई भी पत्रकार सामने नहीं आया।

चुनाव में जीत के लिए वोट मांगने में कोई कसर नहीं करते लेकिन जब बात जिले के पत्रकार की आती है तो ना कोई  संस्थान आगे आता है और न तो पत्रकार नेता सामने आते हैं।

आपको बता दें अगर भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह न होते तो आज ये बलिया मामला ठंडे बस्ते में चल जाता। भड़ास4मीडिया ने खबर प्रकाशित कर जिले के पत्रकारों को एक जुट कर दिया। आज हाल ये है कि जिला हर पत्रकार आंदोलन पर उतर आया है।

ठीक विपरीत राजधानी लखनऊ में बड़े बड़े मान्यता पत्रकार बलिया मामले में आगे नहीं बढ़े। ये बात हैरान करने वाली है। अधिकारी जिस प्रकार चौथे स्तंभ की आवाज दबा रहे है इससे साफ है कि दाल में कुछ काला जरूर है।

सीएम योगी आदित्यनाथ का बुलडोजर पत्रकारों पर तो चल रहा है लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों पर कब चलेगा। एक्का दुक्का अधिकारियों पर बुलडोजर चलने से क्या भ्रष्ट अधिकारियों की सफाई हो गयी? अब सवाल है कि आखिर बलिया के पत्रकार को न्याय दिलाने में राजधानी लखनऊ के बड़े बड़े पत्रकार नेता क्या कर रहे हैं।

बलिया में पत्रकारों के उत्पीड़न के विरोध में, राजधानी के पत्रकारों को जगाने के लिए आज जीपीओ पर गांधी प्रतिमा के नीचे एकदिनी सांकेतिक धरने पर राजीव तिवारी बाबा बैठे।

पत्रकार राजीव बाबा ने कल आह्वान किया था कि जिन पत्रकार साथियों, संगठनों लगता है कि इस मुद्दे पर बलिया के जुझारू पत्रकार साथियों का साथ देना चाहिए वे समर्थन करने आ सकते हैं।

राजीव कहते हैं- मेरी मांग है कि योगी सरकार बलिया में नकल रोकने में असफल और अपनी नाकामी छुपाने के लिए खबर उजागर करने वाले पत्रकारों को ही साजिशन जेल भेजने वाले बलिया डीएम एसपी को तत्काल निलंबित करे और निर्दोष पत्रकारों को अविलंब रिहा करे।

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