#LDA की सीलिंग एक बहाना, सील बिल्डिंग में चल रही व्यवसायिक गतिविधियां

लखनऊ। राजधानी में अवैध निर्माण चरम पर है और अवैध निर्माणो को रोकने का काम एलडीए के जिन अभियंताओं पर है वो खुद ही अवैध निर्माणों के संरक्षण कर्ता बने है। बता दे की जोन 6 के अमीनाबाद थाना क्षेत्र में आर्य समाज मंदिर के पास अवैध रूप से बने व्यवसायिक निर्माण को प्राधिकरण ने 20 सितंबर को सील किया था लेकिन ये सीलिंग केवल खानापूर्ति तक ही सीमित रही सील बिल्डिंग में व्यवसायिक गतिविधियां सील होने के बाद बदस्तूर जारी है।

सीलिंग तो है बहाना….डीलिंग का है जमाना….

राजधानी में अवैध निर्माण चरम पर और इन अवैध निर्माणों के चलते शहर का बुनियादी ढांचा चरमरा रहा है । आवासीय भूखंडों पर लगातार व्यवसायिक इमारते बनती जा रही है और लखनऊ विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार आंखे बन्द किए हुए है। पहले तो इन अवैध निर्माण को रुका नहीं जाता है बाद में जब इमारत बन कर तैयार हो जाती है तो सीलिंग की कार्यवाही कर खाना पूर्ति कर दी जाती है। सीलिंग के बाद भी इमारत में व्यवसायिक गतिविधियां चालू रहती है और ये सब क्षेत्र से सम्बन्धित अवर अभियंता के संरक्षण में होता है जिसके लिए इनको मोटे नजराने की पेशगी मिलती है।

ऐसा ही एक मामला जोन 6 के अमीनाबाद थाना क्षेत्र के गणेश गंज में देखने को मिला। जहां बीते 20 नवंबर को सील की गए एक अवैध व्यवसायिक इमारत में व्यवसायिक गतिविधियां और इमारत के अंधरूनी हिस्से में निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है और ये सब क्षेत्रीय अवर अभियंता के संरक्षण में हो रहा है।

व्यवसायिक गतिविधियां क्यों हो रही है ये विहित प्राधिकारी से पूछो?

गणेशगंज के आर्य समाज मंदिर के पास बने इस अवैध व्यवसायिक इमारत में सीलिंग की कार्यवाही के 22 दिन बाद जब व्यवसायिक गतिविधियां चलती हुई देखी गई तो इस विषय में क्षेत्र से संबंधित अवर अभियंता से संपर्क किया गया।

इस सम्बंध में अवर अभियंता आर के गुप्ता का कहना था कि सील बिल्डिंग में दुकान कैसे खुली है यह विहित प्राधिकारी से पूछिए? जब उनसे कहा गया कि आखिर सील बिल्डिंग में व्यवसायिक गतिविधि कैसे चल सकती है? इसे रोकने की जिम्मेदारी आपकी है तो अवर अभियंता महोदय का कहना था कि इस संबंध में वह कोई भी बात नहीं कर सकते हैं जो भी बात करनी है वह विहित प्राधिकारी से कीजिए।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर सील बिल्डिंग में व्यवसायिक गतिविधियो को संरक्षण देना होता है तो आखिर क्यों सीलिंग की कार्यवाही की खानापूर्ति कर सिर्फ नंबर बढ़ाने का काम प्राधिकरण के होनहार कर रहे है ।

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