बेसिक शिक्षकों का विरोध, डाटा फीडिंग की जिम्मेदारी से खड़े किए हाथ

लखनऊ। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाली निशुल्क सुविधायें इस बार विद्यालय से न देकर इसके एवज में अभिभावकों के खाते में बजट दिया जायेगा। इसके लिए डायरेक्ट (Direct benefit transfer) बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रक्रिया अपनायी जायेगी। इसमें विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को बच्चों का डाटा फीडिंग कराने में अहम भूमिका निभानी है, साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि बच्चों का सही विवरण ही भरा जाये। डीबीटी के माध्यम से अगले एक सप्ताह में पहले चरण की किस्त भी जारी की जानी है, लेकिन इस योजना का अभिभावकों को लाभ मिलने से पहले ही तैयारियों को लेकर विरोध शुरू हो गया है, प्रदेश के अलग—अलग जनपदों से शिक्षकों ने इस बात पर विरोध जताया है कि डेटा फीडिंग का काम बीआरसी स्तर से किया जाना है, ऐसे में ये काम बीआरसी के बाबूओं का है, शिक्षकों को ऐसी जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना चाहिए। इसके लिए अलग—अलग शिक्षक संगठनों ने विभाग के उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भेजना शुरू कर दिया है। कुल मिलाकर योजना अभी धरातल पर आयी नहीं और विरोध पहले ही शुरू हो गया है।
शिक्षक बाबू बनाये जाने का लगा रहे आरोप: शिक्षक कहते हैं कि अक्सर उन्हें बदनाम किया जाता है कि बच्चों को पढ़ाने में ध्यान नहीं देते बच्चों को नई किताब में तो मिल गई हैं पर साथ ही शिक्षकों को कंप्यूटर में डाटा फीडिंग जैसे काम भी दे दिए गए हैं, जबकि इसके पहले सभी आंकड़े शिक्षकों ने कागज में उपलब्ध करा दिए हैं। बावजूद उसके डाटा फीडिंग का काम शिक्षकों को सौंपा जा रहा है, जबकि विद्यालयों में कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
एक करोड़ 80 लाख बच्चों का है मामला: परिषदीय प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों में करीब एक करोड़ 80 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों को हर साल दो जोड़ी यूनिफार्म, एक स्कूल बैग, एक स्वेटर, एक सेट जूते और दो जोड़े मोजे दिए जाते हैं। इसमे से जूते मोजे और स्वेटर बांटने की शुरुआत योगी सरकार ने ही की थी। इसमे से दो यूनिफार्म के लिए 600 रुपये, स्वेटर के लिए 200 रुपये और बैग व जूते मोजे के लिये प्रति छात्र करीब 250 से 300 रुपये का बजट रहता है। यानी एक बच्चे पर करीब 1100 रुपये का बजट इस बार अभिभावकों के खाते में दिया जाना है।
योजना लेकर मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी का ये है कहना: इस बारे में बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी सभी योजनाओं का लाभ बच्चों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का प्रयास है कि अभिभावकों को सीधे लाभ मिले इसके लिए एक डीबीटी यानी डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के माध्यम से बजट दिया जायेगा। इस व्यवस्था से बजट को लेकर कोई गड़बड़ी की शिकायत भी नहीं मिलेगी।
महेश मिश्रा मंडलीय अध्यक्ष राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ: योजना ठीक है, अभिभावकों के खाते में पैसा जायेगा तो भ्रष्टचार के मामले सामने नहीं आयेंगे, लेकिन इसके लिए डाटा फीडिंग कराये जाने की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपी जा रही है यह गलत है, बीआरसी में बाबू हैं उन्हें यह कार्य करना चाहिए।
विनय कुमार सिंह प्रांतीय अध्यक्ष पीएसपीएसए: बच्चे लगातार स्कूल आने शुरू हो चुके हैं ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ गयी है, और विभाग को यह ध्यान रखना चाहिए कि शिक्षक कोई बाबू नहीं है जो बाबू वाला काम करें, इसे बीआरसी स्तर कराया जाना चाहिए। विभाग अगर जबरदस्ती जिम्मेदारी देता है तो पढ़ाई प्रभावित होगी।
रीना त्रिपाठी मंडल कार्यकारी अध्यक्ष आरएसएम: यदि बीआरसी स्तर पर कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त है तो सरकार की महत्वकांक्षी योजना को खिलवाड़ बनाते हुए शिक्षकों को मानसिक रूप से परेशान क्यों किया जा रहा है, जबकि इस तरह की फीडिंग करने के लिए शिक्षक को कोई ट्रेनिंग भी नहीं दी गयी है।








