देर रात बरेली से आई जांच, पीलीभीत के जिला जेल पहुंचा कोरोना

पीलीभीत।
यूपी के पीलीभीत में अब कोरोना जिला जेल तक पहुंच गया है। देर रात बरेली के RVRI से आई जांच रिपोर्ट में जेल के 105 बंदी कोरोना पॉजिटिव निकले है, रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला कारागार प्रशासन में खलबली मच गई। संक्रमितों में कई सजायाफ्ता और कई विचाराधीन बंदी हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मंथन करने के बाद प्रशासनिक अफसरों के निर्देश पर कोरोना संक्रमित 84 बंदियों को जेल में ही आइसोलेट कर दिया है,बाकी कोरोना लक्षण वाले 19 संक्रमितों को L1 कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है साथ ही सुरक्षा के लिए वहां फोर्स भी तैनात की गई है।

दरअसल पीलीभीत जिला कारागार में क्षमता 602 बंदी और कैदी रखने की निर्धारित की गई है। इसके लिए 13 बैरकें बनाई गई हैं। वर्तमान में जेल के अंदर 946 बंदी और कैदी बंद हैं। कोरोना संक्रमण फैलने के बाद जिला जेल में बाहर से आने वाले बंदियों की नियमित कोरोना जांच कराई जाती है।सुरक्षा की दृष्टिकोण से जेल अधीक्षक अनूप मानव शास्त्री ने बीते 12 सितंबर काे जेल के बंदियों और कैदियों की कोरोना की जांच कराई थी।आज देर रात बरेली के RVRI की लैब से आई जांच रिपोर्ट में 105 बंदी और कैदी कोरोना संक्रमित निकले है।आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन को सूचना दी। जेल में सूचना पहुंचते ही बंदियों के बीच हड़कंप मच गया। जिला कारागार प्रशासन के मुताबिक दो दिन पहले ही दो बंदियों की जमानत हो चुकी थी। बाकी सभी जेल में ही बंद हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डीएम के निर्देश पर संक्रमित बंदियों को जेल में ही आइसोलेट करने की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जेल पहुंचकर संक्रमितों का दोबारा से चेकअप किया। इनमें 19 संक्रमितों में कोरोना के लक्षण मिले, बाकी 84 बंदियों में संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए। 19 संक्रमितों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयुर्वेदिक कॉलेज के कोविड अस्पताल भिजवाया गया। 84 संक्रमितों के लिए जिला कारागार की दो बैरकों में आइसोलेशन वार्ड तैयार कराकर उन्हें वहां पर आइसोलेट किया गया। जिला कारागार कर्मचारियों के मुताबिक एक बैरक में 80 से 90 बंदी की क्षमता होती है। मगर, कोरोना के चलते दो बैरकों में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है।

जेल प्रशासन की माने ताे कोरोना संक्रमण के दौर में यहां आने वाले प्रत्येक बंदी की पहले जांच कराई जाती है। रिपोर्ट न आने तक उसे अस्थायी जेल में रखा जाता है।रिपाेर्ट निगेटिव आने के बाद ही वहां शिफ्ट किया जाता है। जेल का अगर कोई भी पुलिस कर्मी छुट्टी पर जाता है तो लौटने पर उसकी भी कोरोना जांच होती है। जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के इतने सतर्कता के बाद भी कोरोना जेल के अंदर तक पहुंच गया।ऐसे मे सवाल जरुर उठता है कि आखिरकार कहीं न कहीं जांच में ही लापरवाही की गई। स्वास्थ्य विभाग चिंता में है और संक्रमण के सोर्स की तलाश में जुटा है।

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