डीजल नहीं, हाइड्रोजन से चलेंगी बसें….यीडा क्षेत्र में हाइड्रोजन बसों की शुरुआत
750 किलोमीटर तक सफर करेंगी हाइड्रोजन बसें

आज के दिन यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में इलेक्ट्रिक बसों के साथ 3 हाइड्रोजन ईंधन आधारित बसों का फ्लैग ऑफ किया जा रहा है। एनटीपीसी दादरी द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना (Green Hydrogen Based Mobility Project) के अंतर्गत ये बसें निर्मित की गई हैं और यमुना प्राधिकरण के सहयोग से संचालित होने जा रही हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी एक नई और अभिनव अवधारणा है, जिसमें बसें डीजल के बजाय हाइड्रोजन ईंधन पर संचालित होंगी।
लद्दाख (लेह) में देश की पहली व्यावसायिक हाइड्रोजन बस सेवा शुरू होने के बाद, उत्तर प्रदेश दूसरा प्रमुख राज्य बन गया है जो इस हरित तकनीक (ग्रीन हाइड्रोजन) को अपना रहा है।
- मार्ग और सेवा क्षेत्र: राज्य में यह सेवा ग्रेटर नोएडा से शुरू होकर आगरा और अन्य प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए चलाई जा रही है। इसके अलावा, YEIDA to Run Hydrogen Buses from Noida to Agra प्रोजेक्ट के तहत इन शून्य-उत्सर्जन (zero-emission) बसों से नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच का सफर आसान किया जाएगा।
- बसों की क्षमता: ये बसें एनटीपीसी (NTPC) के सहयोग से चलाई जा रही हैं, जो एक बार ईंधन भरने पर 600 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकती हैं।
- विनिर्माण (Manufacturing): टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने लखनऊ स्थित अपनी फैक्ट्री में इन हाइड्रोजन-संचालित बसों का व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की योजना की घोषणा की है।
- लद्दाख और अन्य जगहों पर स्थिति: भारत की पहली हाइड्रोजन बसें लद्दाख (Ladakh) में व्यावसायिक तौर पर चलाई जा रही हैं, जिसके अनुभव और सफलता का उपयोग पूरे देश में ऐसे प्रोजेक्ट्स को लागू करने के लिए किया जा रहा है।
प्रमुख लाभ
(क) यह परियोजना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जल का उपयोग करती है तथा भूजल का दोहन नहीं करती।
(ख) प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो लगभग 1750 पेड़ लगाने के बराबर है।
(ग) हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों से उत्सर्जन के रूप में केवल पानी निकलेगा, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होगा।
(घ) इस परियोजना के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आएगी।
(ङ) यह परियोजना भारत का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन है।
विशेषताएं
- 42 यात्रियों की क्षमता वाली एवं 12 मीटर लंबाई की प्रत्येक बस में एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरा जा सकेगा।
- एक बार ईंधन भरने पर बस लगभग 750 किलोमीटर की यात्रा कर सकेगी।
ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि भविष्य के हरित परिवहन मॉडल का भी मार्ग प्रशस्त करेगी।








