गोआश्रय स्थलों के निरीक्षणोपरान्त शिकायत मिलने पर नोडल अधिकारी के विरूद्ध होगी कार्यवाही

उत्तर प्रदेश के पशुधन विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी दशा में सड़को या खेतों में निराश्रित गोवंश विचरण करते न पायें जाए और स्थानीय प्रशासन की सहायता से ऐसे गोवंशों को प्रत्येक दशा में संरक्षित किया जाय। संरक्षित गोवंश के लिए शेड, जल, हरे, सूखे चारे तथा दवाईयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा कि गो-आश्रय स्थलों के लिए निरीक्षण हेतु नामित नोडल अधिकारियों द्वारा निरीक्षण की गति तेज की जाय और निरीक्षणोपरान्त यदि गोआश्रय स्थलों पर किसी भी प्रकार की शिकायत अथवा कमी प्राप्त होती है तो नोडल अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।
 
पशुधन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य विकास कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण ने योजना भवन में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के मण्डलीय अपर निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों को गोवंश के संरक्षण एवं छुटटा गोवंश की समस्या के पूर्ण समाधान  के लिए समुचित दिशा-निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कुल निराश्रित गोवंश की संख्या के सापेक्ष 50 प्रतिशत से कम गोवंश संरक्षित करने वाले जनपद यथाशीघ्र अपेक्षित संख्या में गोवंश को संरक्षित करें अन्यथा सम्बन्धित अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि प्रदान की जायेगी। उन्होंने गोपाल रत्न पुरस्कार हेतु श्रेणीवार आवेदन अधिक से अधिक संख्या में करवाए जाने, पशु मेलों के नियमित आयोजन, एन0ए0आई0पी0 की धीमी प्रगति, गोवंश एवं महिषवंश को यू0आई0डी0 टैग एवं डाटा ईनाफ पर अपलोडिंग की धीमी प्रगति पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।
 
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन की सुरक्षा हेतु भूसा, औषधि, रोग निरोधक टीके आदि के साथ-साथ बाढ़ चैकियों पर पशुपालन विभाग की सेवाएं निरन्तर जारी रखी जाय। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी जनपद में गोवंश के संरक्षण एवं सुरक्षा में कमी अथवा गो-आश्रय स्थल में संरक्षित गोवंश की चारा व औषधि के अभाव में मृत्यु न होने पाये। उन्होंने कुक्कुट विकास नीति में जनपदों को आवंटित लक्ष्यों को वर्तमान वित्तीय वर्ष में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में विशेष सचिव, पशुधन, मंजुलता ने निर्देश दिए कि कि वर्षा ऋतु जन्य रोगों से गोवंश के बचाव के लिए वैक्सीन तथा दवाईयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाय। एन0ए0आई0पी0 कार्यक्रम में कम प्रगति वाले जनपद समुचित कार्य एवं इनाफ पर डाटा अंकन करने की कार्यवाही समय से पूर्ण करें अन्यथा सम्बंधित अधिकारी को सीधे जिम्मेदार मान कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी तथा उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी स्थानीय गो-आश्रय स्थलों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें।

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