UPCM ने ‘गोकुल पुरस्कार’ वितरण समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया

उत्तर प्रदेश।
UPCM ने दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘गोकुल पुरस्कार वितरण’ एवं मिल्क फोर्टीफिकेशन कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।
UPCM ने गोकुल पुरस्कार वितरण और मिल्क फोर्टीफिकेशन के शुभारंभ के इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी महानुभावों को बधाई देते हुए कहा कि मैं प्रदेश के दुग्ध विकास विभाग को इस रचनात्मक पहल के लिए हृदय से साधुवाद देता हूं।
UPCM ने कहा इस कार्यक्रम में सम्मानित किए जा रहे किसान भाइयों को बधाई देता हूं और विश्वास व्यक्त करता हूं कि उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बनाए रखेगा। प्रदेश के 73 प्रगतिशील दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित किया जा रहा है। यह एक अभिनव प्रयास है। UPCM ने कहा प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका दुग्ध उत्पादन में लगे किसान भाइयों की हो सकती है।
UPCM ने कहा प्रदेश में 18 मंडल और 75 जिले हैं, 350 के आसपास तहसीलें और 823 विकास खंड बन चुके हैं और 60 हजार ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन इसके मुकाबले हमारे प्रदेश में दुग्ध समितियों की संख्या काफी कम है। दूध की आवश्यकता हर परिवार को है, लेकिन जब दूध उत्पादक समितियों की बात होती है तो हमारी ग्राम पंचायतों की तुलना में यह संख्या 10वें भाग से थोड़ा सा आगे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम 60 हजार के आसपास दुग्ध समितियां होनी चाहिए। नाबार्ड के सहयोग से प्रदेश में 10 नई दुग्ध डेयरियों की स्थापना होने जा रही है और 4 पुरानी को बढ़ाने का प्रयास भी चल रहा है। जितनी अच्छी कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश में है, जितना अच्छा साधन यहां है और जितनी संभावनाएं यहां हैं। उसके लिए यहां का हर दुग्ध उत्पादक स्वावलंबी बन सकता है। हमें उन संभावनाओं को विकसित करना होगा जो पहले से ही आपके लिए मौजूद हैं। जिन दुग्ध उत्पादकों को आज यहां सम्मानित किया जा रहा है, मैं उन्हें बहुत बधाई देता हूं क्योंकि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में मिसाल पेश की है।
UPCM ने गोकुल पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान 1,23,650 लीटर दूध की आपूर्ति करने वाले लखीमपुर के वरुण सिंह और 96,023 लीटर दूध की आपूर्ति करने वाली मेरठ की कुसुम को सम्मानित किया।








