रजिस्ट्री कार्यालयों को पासपोर्ट सेवा केन्द्रों की तर्ज पर विकसित किया जाए: मुख्यमंत्री योगी
मुख्यमंत्री ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा की

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण की आवश्यकताओं के अनुरूप विभाग को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित, उत्तरदायी और जनसुविधा केन्द्रित बनाया जाना चाहिए। रजिस्ट्री कार्यालय आमजन के प्रत्यक्ष सम्पर्क में आने वाले कार्यालय हैं, इसलिए इनकी व्यवस्थाएँ आधुनिक, व्यवस्थित और नागरिक केन्द्रित होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने उप निबन्धक कार्यालयों को चरणबद्ध ढंग से पासपोर्ट सेवा केन्द्रों की तर्ज पर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में प्रतिवर्ष लगभग 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष सम्पर्क होता है। इसे देखते हुए हेल्प डेस्क, टोकन एवं क्यू मैनेजमेण्ट सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष, डिजिटल सुविधाएं तथा अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग राज्य की राजस्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 में विभाग की सकल आय 11,613.84 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32,598.49 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक हो गई। मुख्यमंत्री जी ने इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए राजस्व वृद्धि के साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल गवर्नेन्स विभागीय सुधारों का प्रमुख आधार बनना चाहिए। सम्पत्ति एवं विवाह पंजीकरण में आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक और आइरिस आधारित सत्यापन, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन तथा खतौनी आधारित डिजिटल जांच जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाए। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली तथा जियो-टैगिंग व्यवस्था को तेजी से लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जाए। तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, विवाद कम करने और राजस्व अपवंचन रोकने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्पत्तियों के मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे बाजार आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित होगा तथा मूल्यांकन सम्बन्धी विवादों में कमी आएगी। उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास का केन्द्र बन रहा है। ऐसे में विधिक व्यवस्थाओं को भी वर्तमान आर्थिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। व्यवस्थाओं में स्पष्टता होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, अनावश्यक विवाद और मुकदमेबाजी कम होती है तथा कारोबार करने की सुगमता को बल मिलता है।
मुख्यमंत्री ने कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एल0एल0पी0), शेयरधारिता में परिवर्तन, आवासीय सहकारी समितियों तथा रेरा के अन्तर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में स्पष्ट और व्यावहारिक स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए ऐसा विधिक ढांचा तैयार किया जाए, जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिले, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मजबूत हो, विवादों में कमी आए और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित रहें।








