UPCM और केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री ने गोमती नदी के तट पर ‘सीवेज शोधन संयन्त्र’ का निरीक्षण किया

उत्तर प्रदेश।
UPCM और केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने गोमती नदी के तट पर ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत कुकरैल नाले पर राज्य सरकार के पायलेट प्रोजेक्ट 03 एम.एल.डी. क्षमता के जियो ट्यूब तकनीक पर आधारित सीवेज शोधन संयन्त्र का निरीक्षण किया।

UPCM ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि गंगा की अविरलता को बनाए रखे। उन्होंने कहा कि गंगा जी में गिरने वाले सभी नालों इत्यादि का 15 दिसम्बर 2018 से पूर्व समाधान किया जाए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि इस तिथि के उपरान्त गंगा जी में किसी भी प्रकार की गन्दगी नहीं गिरेगी। उन्होंने कहा कि नाले के पानी को शोधित करने के लिए कई तकनीक है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित जल के शोधन के लिए जहां STP लगाकर पानी को शोधित किया जा रहा है, वहीं एक नयी तकनीक जियो ट्यूब द्वारा रेमिडिएशन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा व यमुना में लगभग 40 स्थानों पर गिरने वाले नालों के दूषित जल के शोधन के लिए जियो ट्यूब को लगाया जाएगा।

UPCM और केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री गोमती नदी के तट पर 'सीवेज शोधन संयन्त्र' का निरीक्षण करते हुए
UPCM और केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री गोमती नदी के तट पर ‘सीवेज शोधन संयन्त्र’ का निरीक्षण करते हुए

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप कार्य कर रही है। केन्द्र सरकार ने तय किया है कि जो संस्था PPP माॅडल पर कार्य करेगी, वही संस्था 15 वर्षों तक उसकी देखरेख भी करेगी। ‘एक शहर-एक आॅपरेटर’ इसी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जियो ट्यूब से सीवेज ट्रीटमेंट आज की आवश्यकता है। पानी को शुद्ध करके जहां नदियों को स्वच्छ बनाने में सहायता मिलेगी, वहीं जलीय जीवों को स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि जियो ट्यूब से शोधित पानी का उपयोग रेलवे स्टेशन और कंस्ट्रक्शन जैसे कार्यों में किया जा सकेगा, जिससे सरकार की आर्थिक बचत भी होगी।

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि आज बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इसमें भी विकल्प तलाशने की आवश्यकता है। साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट को अपनाकर जहां हम रोजगार सृजन कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्र निर्माण में सहभागी भी बन सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्लास्टिक व रबड़ के उपयोग से अच्छी सड़क बनायी जा सकती है।

इस अवसर पर नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना, चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टण्डन, परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश के आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, जल निगम के चेयरमैन जी. पटनायक, अपर मुख्य सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी, सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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