प्रधानमंत्री ने पहली बार मथुरा में जाकर श्री कृष्ण मंदिर के गर्भ गृह में पूजन किया

प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान की चुनावी यात्रा से सीधे मथुरा आए। ब्रजरज महोत्सव और संत मीरा बाई का ५२५ वां जन्म-दिवस महोत्सव। इस क्रम में प्रधानमंत्री ने मीराबाई के नाम पर स्टाम्प और सिक्का भी जारी किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रज की भूमि और व्रज के निवासीयों को प्रणाम कर सुखद अनुभूति मिल रही है। मोदी ने प्रभु श्री कृष्ण और संत मीराबाई को प्रणाम किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मथुरा आना सामान्यतः सम्भव नहीं है। श्री कृष्ण की इच्छा से ही यहां कोई आ सकता है। उन्होंने उस श्लोक को भी स्मरण किया जिसके अनुसार सभी तीर्थों की यात्रा को मिला भी लें तो मथुरा की यात्रा सर्वाधिक प्रेरणादायी होती है।
मोदी ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुल ८४ कोस की ब्रजभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा इस सम्पूर्ण ब्रजभूमि को जोड़ने का प्रयास किहा जाएगा।
यह ध्यातव्य रहे कि मीराबाई राजस्थान के मेवाड़ की रानी थीं और श्री कृष्ण की भक्ति में पूरी तरह लीन रहती थीं। वे १५ वर्षों तक वृंदावन में रही थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मीराबाई अंतिम समय में द्वारिकाधीश की नगरी द्वारिका में रहकर अपने प्राण त्यागे।
मोदी ने कहा कि ब्रज के कान्हा के रूप में श्री कृष्ण ने बांसुरी बजायी और बासुदेव कृष्ण ने सुदर्शन चक्र भी आतताइयों और राक्षसों पर चलाया।
प्रधसंमन्त्री ने कहा कि आने वाले दिनों में मथुरा में सारी व्यवस्थाएं सुन्दर और भव्य होंगी। उन्होंने इशारा किया कि श्री कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनेगा।
ध्यातव्य है कि कोर्ट में मुकदमा चल रहा है और हम सब आशान्वित हैं कि जल्द सब ठीक हो जाएगा।
प्रधानमंत्री सनातन धर्म और हमारी विशिष्ट संस्कृति के पुनर्जागरण के लिए कृत संकल्पित होकर कार्य कर रहे हैं।
अयोध्या के भव्यतम राम लला के मंदिर में विधिवत पूजारम्भ २२ जनवरी से प्रारम्भ होगा।
बनारस में विशाल भव्य कॉरिडोर का एक बड़ा हिस्सा बनकर तैयार है।काम अभी चल ही रहा है।
उज्जैन में महा काल मन्दिर के पास भव्य विशाल कॉरिडोर बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने काशी तमिल संगम के माध्यम से उत्तर और दक्षिण के हिन्दू विद्वानों संतों धर्माचार्यों को जोड़ने का प्रयास किया है।
मोदी जो कर रहे हैं वह सब ऐतिहासिक अनुकरणीय है।
हम सब मोदी योगी शाह और इन सभी की पूरी टीम के साथ खड़े हैं।
याद रखें हम सब के लिए मोदी है तो सब मुमकिन है।
”पनपा” गोरखपुरी

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