UPCM योगी ने गोरखपुर में 5वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित किया

लखनऊ (21 जून, 2019)। UPCM योगी आदित्यनाथ ने जनपद गोरखपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में पंचम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर महायोगी गुरू गोरक्षनाथ शोधपीठ एवं अभिनव दृष्टि (प्रज्ञा प्रवाह) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'योग: मानवता को भारतीय ज्ञान परम्परा का अतुल्य योगदान' विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर उन्होंने 'सृष्टि सृजन एवं योग विज्ञान' पुस्तिका का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि पुस्तिका योग की भूमिका को और रेखांकित करने में सहायक सिद्ध होगी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि योग का मतलब जोड़ना होता है, योग की इस परम्परा से भारत ने पूरी दुनिया को जोड़ा है। योग शुद्धि को प्रेरणा देता है और हमें निरोग रखता है। साथ ही, योग हमारा उन्नयन भी करता है। नैतिक आधार को मजबूत करने हेतु योग की परम्परा को सभी को अपनाना होगा। योग के अलग-अलग सोपान सिद्धि को प्राप्त करने का माध्यम होता है। योग एक आन्दोलन लेे रहा है, जिसे पूरी दुनिया ने अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में उपस्थित सभी को अपनी शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि आज गौरव का दिन है, योग को पूरी दुनिया ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि 21 जून, 2016 को पहला योग दिवस आयोजित हुआ, जिसमें 193 देश योग के साथ जुड़े। योग की सभी विधाओं के मूल में शुद्धि से परम्परा की शुरुआत होती है और बिना शुद्धि के हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं, योग शुद्धि को प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता आवश्यक है और इसे जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। जब जन सहभागिता किसी आन्दोलन का हिस्सा बनती है, तो शत-प्रतिशत सफलता हासिल होती है और स्वच्छ भारत मिशन इसकी मिसाल है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसको आगे बढ़ाने हेतु जन संवाद स्थापित किया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता एवं खुले में शौच से मुक्ति का अभियान चलाया गया, जिसका परिणाम है कि इंसेफलाइटिस जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सका है। इस बीमारी को समूल नष्ट करना और मृत्यु दर को कम किए जाने के निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। UPCM ने कहा कि मन की एकाग्रता के बगैर दुनिया का कोई भी शोध नहीं हो सकता है और मन की एकाग्रता योग से प्राप्त होगी। जब अविष्कार/शोध लोक कल्याण के लिए होगा, तब मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। योग इसकी आधारभूत इकाई है। भारत योग का जनक है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रो. आर.एस. निर्झर ने कहा कि योग ज्ञान परम्परा पूरे जीवन को एक साथ समाहित करता है। योग को जीवन दर्शन के रूप में स्वीकार करना है। विश्व ने योग को स्वीकार किया है यह हमारे ज्ञान परम्परा की देन है। एकाग्र जीवन पद्धति को अपनाने से अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि रामाशीष और संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वी.के. सिंह ने भी योग परम्परा के विषय में विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। इस अवसर पर महापौर सीताराम जायसवाल, सांसद रविकिशन मण्डलायुक्त जयन्त नार्लीकर, जिलाधिकारी के. विजयेन्द्र पाण्डियन, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि योग का मतलब जोड़ना होता है, योग की इस परम्परा से भारत ने पूरी दुनिया को जोड़ा है। योग शुद्धि को प्रेरणा देता है और हमें निरोग रखता है। साथ ही, योग हमारा उन्नयन भी करता है। नैतिक आधार को मजबूत करने हेतु योग की परम्परा को सभी को अपनाना होगा। योग के अलग-अलग सोपान सिद्धि को प्राप्त करने का माध्यम होता है। योग एक आन्दोलन लेे रहा है, जिसे पूरी दुनिया ने अपनाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में उपस्थित सभी को अपनी शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि आज गौरव का दिन है, योग को पूरी दुनिया ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि 21 जून, 2016 को पहला योग दिवस आयोजित हुआ, जिसमें 193 देश योग के साथ जुड़े। योग की सभी विधाओं के मूल में शुद्धि से परम्परा की शुरुआत होती है और बिना शुद्धि के हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं, योग शुद्धि को प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता आवश्यक है और इसे जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। जब जन सहभागिता किसी आन्दोलन का हिस्सा बनती है, तो शत-प्रतिशत सफलता हासिल होती है और स्वच्छ भारत मिशन इसकी मिसाल है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसको आगे बढ़ाने हेतु जन संवाद स्थापित किया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता एवं खुले में शौच से मुक्ति का अभियान चलाया गया, जिसका परिणाम है कि इंसेफलाइटिस जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सका है। इस बीमारी को समूल नष्ट करना और मृत्यु दर को कम किए जाने के निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं।
UPCM ने कहा कि मन की एकाग्रता के बगैर दुनिया का कोई भी शोध नहीं हो सकता है और मन की एकाग्रता योग से प्राप्त होगी। जब अविष्कार/शोध लोक कल्याण के लिए होगा, तब मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। योग इसकी आधारभूत इकाई है। भारत योग का जनक है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रो. आर.एस. निर्झर ने कहा कि योग ज्ञान परम्परा पूरे जीवन को एक साथ समाहित करता है। योग को जीवन दर्शन के रूप में स्वीकार करना है। विश्व ने योग को स्वीकार किया है यह हमारे ज्ञान परम्परा की देन है। एकाग्र जीवन पद्धति को अपनाने से अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि रामाशीष और संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वी.के. सिंह ने भी योग परम्परा के विषय में विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर महापौर सीताराम जायसवाल, सांसद रविकिशन मण्डलायुक्त जयन्त नार्लीकर, जिलाधिकारी के. विजयेन्द्र पाण्डियन, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।







