UPCM मंत्रिमंडल के कृषि मंत्री ने 75 जनपदों में NIC केन्द्र में उपस्थित किसानों को सम्बोधित किया

लखनऊ (04 जून, 2019)।
UPCM मंत्रिमंडल के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने योजना भवन स्थित वीडियो कांफ्रेंसिंग हाल में प्रदेश के सभी 75 जनपदों में NIC केन्द्र में उपस्थित किसानों को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ किसानों को कृषि, पशुपालन, उद्यान, गन्ना आदि की उन्नत तकनीकि की जानकारी उपलब्ध करायेंगे। उन्होंने कहा कि खरीफ की फसल के दृष्टिगत वैज्ञानिकों के साथ किसानों का संवाद बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में धान के लगभग 4000 क्रय केन्द्र, जबकि गेंहू के 5500 से अधिक क्रय केन्द्र स्थापित किये गये। जिससे किसानों को अपना उत्पाद बेचने के लिये ज्यादा दूर न जाना पड़े।
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा एक एतिहासिक कदम उठाया गया है, जिसके माध्यम से कृषि वैज्ञानिक सीधे किसानों से संवाद करेंगे और उनके प्रश्नों व जिज्ञासाओं का भी समाधान करेंगे। उन्होंने कहा कि ‘‘वैज्ञानिकों की बात-किसानों के साथ’’ विषय पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के किसानों को जागरूक करने का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि करने के लिये आवश्यक है कि कृषि की लागत में कमी लायी जाय। उन्होंने कृषि लागत में कमी लाने के लिये उन्नत तकनीकी के उपयोग एवं रासायनिक उर्वरक के स्थान पर जैविक उर्वरक एवं वर्मी कम्पोस्ट के प्रयोग को बढ़ावा दिये जाने पर जोर दिया।

डाॅ. जितेन्द्र सिंह, चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से कृषकों की आय दोगुनी किये जाने से सम्बन्धित जानकारी उपलब्ध करायी। उन्होंने फसल की बुवाई-रोपाई से लेकर फसल की सुरक्षा हेतु विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने खरीफ की फसल हेतु वर्षा आधारित खेती प्रबंधन माॅडल भी प्रस्तुत किया।
धान विशेषज्ञ डाॅ. बी.एन. सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50-57 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। उन्होंने बताया कि हमारे प्रदेश में 11 कुंतल प्रति एकड़ धान की पैदावार होती है, जोकि कम है। उन्होंने धान की खेती के बारे में विस्तार से बताते हुये कहा कि धान की खेती के लिये धान की किस्मों का चुनाव महत्वपूर्ण हैं। डाॅ. बी.एन. सिंह ने धान की विभिन्न प्रजातियों के बारे में चर्चा करते हुये उत्पादन में वृद्धि के साथ ही धान की खेती में आर्गेनिक तरीकों के बारे में भी बताया।
डाॅ. रितेश शर्मा ने बासमती चावल की खेती के बारे में चर्चा करते हुये बताया कि उत्तर प्रदेश में बासमती का उत्पादन सर्वाधिक होता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उत्पादित बासमती एक ऐसा उत्पाद है, जिसके निर्यात से काफी अधिक विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। डाॅ. रितेश शर्मा ने बासमती की खेती के उन्नत तरीकों के बारे में बताया और कम से कम लागत में अधिक से अधिक उत्पादन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिये बासमती एक ऐसा अनमोल तोहफा है, जिसके लिये न तो ज्यादा पानी चाहिए और न ही ज्यादा खाद।
डाॅ. नरेन्द्र, भारतीय दलहन एवं अनुसंधान संस्थान, कानपुर ने दलहन, डाॅ. महक सिंह, चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर ने तिलहन, डाॅ. बिजेन्द्र सिंह, महानिदेशक, यू.पी. काउंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च ने सब्जी की खेती पर प्रकाश डालते हुये कृषि की उन्नत तकनीकों के बारे में बताया। साथ ही रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक उर्वरक एवं खाद का इस्तेमाल किये जाने पर जोर दिया।
इसके अतिरिक्त डाॅ. शिव प्रसाद मौर्य ने पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और पशुओं को होने वाली बीमारियों पर नियंत्रण एवं रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर डाॅ. एम.एल. जाट, नेशनल एकेडमी आफ एग्रीकल्चरल साईंस ने फसल अवशेष जलाने के कुप्रभावों के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही मक्का की खेती के लिये बुवाई के तरीकों पर भी प्रकाश डाला।
डाॅ. सौदान सिंह, सीमैप ने कृषकों की आय दोगुनी करने के लिये कहा कि परम्परागत कृषि की अपेक्षा कृषि का विविधीकरण आवश्यक है। उन्होंने औषधीय पौधों और सगंध पौधों की खेती को अपनाने पर बल दिया।
पदमश्री भारत भूषण त्यागी ने जैविक खेती एवं कृषि विविधीकरण से आय वृद्धि एवं उत्पादन वृद्धि के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से लागत में कमी लाकर और उत्पादन में वृद्धि कर कृषक 15 से 20 प्रतिशत आय में वृद्धि कर सकते हैं।
पदमश्री राम शरण वर्मा ने कहा कि केले, टमाटर एवं आलू की खेती से प्राप्त होने वाली आय के बारे में बताते हुये कहा कि फल एवं सब्जी की खेती करने वाले किसान आज सबसे ज्यादा धनी हैं।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव कृषि, अमित मोहन प्रसाद, निदेशक कृषि, सोराज सिंह एवं कृषि विभाग के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।








