श्रीराम ने त्रेता युग में किन्नरों को दिया वरदान, वर्तमान में गरिमा ने किया किन्नरों का सम्मान

भारत में पहली बार किन्नर भोज की शुरूवात कि 25 वर्षीय गरीमा सिंह
नवरात्रि समापन के बाद कन्या भोज कराया जाता है ये पूरे भारत में प्रचलित प्रथा है, लोगो का मानना है कि छोटी छोटी लड़कियां माता स्वरूप होती है और कन्या भोज कराने से माता प्रसन्न होती है, इस लिए नवरात्र की नवमी को कन्या भोज कराया जाता हैं।
जिस प्रकार त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के पूरे होने के बाद राज्य वापस आने पर अपनी प्रजा के किन्नर समुदाय को वरदान दिया था कि किसी के पास जाओगे तो खाली हाथ नहीं आओगे। ठीक से प्रकार वर्तमान में पत्रकार गरिमा सिंह ने किन्नर समाज को नवरात्रि के बाद श्रीराम नवमी पर भोजन और पूजन करके सम्मान किया।
आपको बता कि पेशे से स्वतंत्रत पत्रकार गरिमा सिंह ने अर्ध शिव अर्थाथ अर्ध नारीस्वरूप किन्नर भोज कराया, गरिमा सिंह का मानना है कि किन्नर भी माता रानी के सच्चे भक्त होते है, और किन्नर समाज में इससे उनके प्रति एक जो हीनभावना है वो खत्म होगी साथ ही लोग किन्नर को भी सम्मान देंगे।
थर्ड जेंडर को 2015 में मान्यता हो मिल गई लेकिन किन्नर समाज की स्थिति आज भी बहुत दयनीय है आपको बता दे कि गरिमा किन्नर समाज के लिए काफी लंबे समय से कार्य कर रही है और ये दूसरा मौका है जब गरिमा सिंह ने किन्नर भोज कराया।
गरिमा सिंह किन्नर भोज बड़े ही मन से करती है पहले तो देवी स्वरूप किन्नर लोगो के पैर को एक बड़े तब में रख कर धुलती है फिर तौलिया से पैर को साफ़ करती है, फिर किन्नर रूप की आरती उतारती है टीका लगा कर भोजन परोस कर सभी किन्नरों को भोजन कराती हैं। अंत में सभी भोजन किए हुए किन्नरों को अपनी श्रद्धा अनुसार दक्षिणा माता के श्रृंगार का समान एवम चुनरी दे कर पैरों को छूती है।
गरिमा बताई है कि इस क्रिया क्रम को देख एक किन्नर ने कहा कि मानो ऐसा प्रतीत होता है जैसे सुदामा और कृष्ण का प्रेम है।








