मुख्यमंत्री योगी ने कृषि विभाग की विभिन्न प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा की
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में कृषि विभाग की विभिन्न प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि खरीफ-2026 की सभी तैयारियां समय से पूर्ण कर ली जाएं। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और तकनीकी सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए दलहन, तिलहन और श्रीअन्न की खेती को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सूखा सम्भावित क्षेत्रों के लिए अग्रिम कार्ययोजना तैयार रखी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि यू0पी0 इण्टरनेशनल ट्रेड शो की तर्ज पर कृषि विभाग को भी अपनी विशेषताओं की अन्तरराष्ट्रीय प्रदर्शनी लगानी चाहिए।
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि खरीफ-2026 में 110.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल और 302.62 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान उत्पादन का लक्ष्य 224.25 लाख मीट्रिक टन रखा गया है, जबकि बाजरा, मक्का, अरहर और मूंगफली के उत्पादन में वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया है। खरीफ-2026 के लिए 2.29 लाख कुन्तल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 24 मई 2026 तक 1.26 लाख कुन्तल बीज उपलब्ध कराया जा चुका है। धान के लिए 80 हजार कुन्तल बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को समय-समय पर कृषि सम्बन्धी तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि टेक्स्ट मैसेज, सोशल मीडिया, दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य माध्यमों से किसानों तक जानकारी पहुंचाई जाए। साथ ही, कम अवधि और सूखा सहनशील प्रजातियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि आगामी जून माह से सभी विकास खण्डों में आयोजित की जाने वाली चौपाल के साथ ही किसान मेला भी लगाया जाए। किसानों को हर योजना का लाभ मिले और उन्हें प्रगतिशील खेती से जोड़े जाने का प्रयास हो। कृषि विभाग के अन्तर्गत सभी विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, मण्डियों, वेयरहाउस आदि के आस-पास साफ-सफाई होनी चाहिए। आवश्यकतानुसार इनकी रंगाई कराई जाए। इन केन्द्रों तक पहुंचने के लिए अच्छी कनेक्टिविटी होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि प्रदेश के लगभग 18 से 20 जनपद सूखे की दृष्टि से संवेदनशील हैं। धान एवं मूंगफली के लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दलहन, तिलहन और श्रीअन्न फसलों के अतिरिक्त बीजों की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री जी ने लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क को प्रारम्भ करने की दिशा में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जमाखोरी, कालाबाजारी और उर्वरकों के डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि 24 मई, 2026 तक प्रदेश में 36.44 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध रहे। उर्वरक प्रवर्तन अभियान के तहत 4,025 छापे डाले गए, 81 लाइसेंस निलम्बित किए गए तथा 09 एफ0आई0आर0 दर्ज करायी गयीं।
मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं में डिजिटल तकनीक के उपयोग को और बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सरल तरीके से उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि एग्रीस्टैक योजना के अन्तर्गत 24 मई, 2026 तक 2.29 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी की जा चुकी है। किसान पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से भी पंजीकरण कर सकते हैं। मुख्यमंत्री जी ने प्राकृतिक खेती और श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड सहित जल संकट वाले क्षेत्रों में ऐसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि बुन्देलखण्ड के सभी विकासखण्डों में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में रसायन मुक्त खेती की गई तथा 21,934 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
मुख्यमंत्री ने मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने तथा उससे जुड़े उद्योगों के साथ समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया। मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि वर्ष 2026-27 में मक्का क्षेत्रफल 11.39 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है तथा वर्ष 2027-28 तक 32.84 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ समय से उपलब्ध कराया जाए तथा बीमा दावों के निस्तारण में तेजी लाई जाए। मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत अब तक प्रदेश के किसानों को 99,032 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की जा चुकी है। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2016-17 से वर्ष 2025-26 तक 80.61 लाख किसानों को 6454.57 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादों के निर्यात पर बल देते हुए कहा कि ग्लोबल मानकों का ध्यान रखते हुए उत्पाद को तैयार कराया जाए। मुख्यमंत्री ने मण्डी समिति की योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि मण्डी समितियों को किसानों के हित में आधुनिक, पारदर्शी और सुविधायुक्त बनाया जाए तथा कृषि विपणन व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।








