UPCM ने आगरा में पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया

उत्तर प्रदेश (आगरा)।
UPCM और राज्यपाल ने डाॅ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के पालीवाल पार्क परिसर में पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनके लिए आज का दिन सौभाग्य का दिन है कि विश्वविद्यालय में पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के अनावरण का उन्हें अवसर प्राप्त हुआ, जिसके लिए वे धन्य हैं। उन्होंने कहा कि आज से 50 साल पूर्व जो पं दीनदयाल उपाध्याय के विचार थे, उन विचारों का क्रियान्वयन व अन्त्योदय का कार्य केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा वर्तमान समय में किया जा रहा है। पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि “हमारा लक्ष्य अन्त्योदय है, और हमारा मार्ग परिवर्तन है। हमारी भावना और सिद्धान्त है कि मैले, कुचैले व अनपढ़ लोग हमारे नारायण है, हमें इनकी पूजा करनी है। जहां माता-पिता अपने बच्चों का भविष्य बनाने में असमर्थ है, वहां जब तक हम आशा व पुरुषार्थ का संदेश नहीं पहुंचाएंगे तब तक हम राष्ट्र के चैतन्य को जागरूक नहीं कर सकेंगे। हमारी श्रद्धा का केन्द्र आराध्य और उपास्य, हमारे पराक्रम एवं प्रयत्न का उपकरण और उपलब्धियों का मापदण्ड, वह मानव हो जो शब्दशः अनिकेत व अपरिग्रह हो।”
राज्यपाल ने कहा कि इन विचारों की आज भी प्रासंगिकता है। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय के सपनों को साकार करने के पुरुषार्थ के लिए हम सब तैयार हों, उनके विचारों के अनुसार जो काम शेष रह गये हैं, उनके लिए उसमें समिधा डालने का काम करें, ऐसे संकल्प की जरूरत है। इस अवसर पर उन्होंने पंडित जी की मूर्ति का निर्माण करने वाले ललित कला अकादमी के अध्यक्ष उत्तम पाचारणे का विशेष अभिनंदन किया।
UPCM ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का एकात्मवाद मानव दर्शन इस बात के लिए प्रेरित करता है कि विचार कभी मरता नहीं है। आज से 6 दशक पूर्व जिस वैचारिक क्रान्ति की शुरुआत पं. दीनदयाल उपाध्याय ने की थी, आज वे विचार व्यावहारिक धरातल पर उतर कर इस देश में गांव, गरीब, किसान, नौजवान व समाज के प्रत्येक तबके के बीच में शासन की योजनाओं को पहुंचाकर उन्हें शासन की मुख्य धारा के साथ जोड़ करके उनके जीवन स्तर को उठाने में अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जो योजनाएं संचालित हुई हैं, इन सभी योजनाओं की आधार भूमि पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन से प्रारम्भ हो करके अन्त्योदय की भावना को चरितार्थ करती हुई दिखाई देती है, जिसमें समाज की अन्तिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी योजनाओं से जुड़कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है।
UPCM ने कहा कि राष्ट्रवाद की उपेक्षा जब भी होगी, अराजकता हमें देखने को मिलेगी। ऐेसे विचार को उन्होंने 50 साल पहले व्यक्त किया था। ऐसे विचार प्रमुखता से रखने वाले पं. दीनदयाल भौतिक रूप से भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनका ये विचार दर्शन आज भी हम सब को इस बात के लिए प्रेरित करता है कि जब भी, कहीं भी, चाहे वह कोई भी किसी प्रकार का संस्थान हो वह अपने राष्ट्रवाद व राष्ट्रीय मूल्यों व आदर्शों की उपेक्षा करेगा तो उसको अराजकता की चपेट में आना ही होगा।

UPCM ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हमारे विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों को वास्तव में उसका स्वरूप किस रूप में और कैसा होना चाहिए, उस पर चिन्तन हो कि हम अपनी वर्तमान पीढ़ी के सामने उसका कैसा स्वरूप देना चाहते हैं। यदि पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से अनुप्रेरित होकर कार्य किया गया होता तो उच्च शिक्षा संस्थान या शैक्षणिक संस्थाओं में कोई अव्यवस्था देखने को नहीं मिलती है। हमारा प्रयास हो कि हम सभी के जीवन का ध्येय, हमारा राष्ट्र होना चाहिए व हमारा राष्ट्रवाद होना चाहिए और हमारा अन्तिम ध्येय इस राष्ट्र की उन्नति होना चाहिए।
UPCM ने कहा कि आगरा विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास रहा है। 1940 के दशक में गोरखपुर में खुला महाराणा प्रताप काॅलेज भी इसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था और उसी काॅलेज की नींव पर गोरखपुर विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गई।
UPCM ने कहा कि आगरा विश्वविद्यालय नित-नये नवाचार के माध्यम से विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। इस विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है कि यहां से पूर्व राष्ट्रपति व पूर्व प्रधानमंत्री निकले। ब्रज क्षेत्र में स्थापित होने के कारण पं. दीनदयाल उपाध्याय व डाॅ. भीमराव आंबेडकर के दर्शन से प्रेरणा प्राप्त करके भारत की राष्ट्रीयता को मजबूती प्रदान करने के लिए इस विश्वविद्यालय की अग्रणी भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने इस अग्रणी भूमिका हेतु सभी का आह्वान करते हुए विश्वविद्यालय परिवार को अच्छे आयोजन के लिए हृदय से बधाई दी और पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की 102वीं जयंती के अवसर पर सभी को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ललित कला अकादमी के अध्यक्ष उत्तम पाचारणें का अभिनन्दन करते हुए कामना की कि इनकी कला के माध्यम से प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी स्मरणीय कार्यक्रम हो सकेंगे।
समारोह को सांसद डाॅ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा, एस.पी. सिंह बघेल, संदीप सिंह, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष एवं सांसद रामशंकर कठेरिया, सांसद चौधरी बाबू लाल, विधायकगण सहित अन्य जनप्रतिनिधि, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।








