UPCM और विधान सभा अध्यक्ष ने वर्तमान सत्र के पहले दिन विधान सभा में पूर्व PM को श्रद्धांजलि अर्पित की

उत्तर प्रदेश।
UPCM NEWS, उत्तर प्रदेश विधान सभा के वर्तमान सत्र के पहले दिन आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि अटल जी की चर्चा के लिए आज शब्दकोश खाली है। वाणी असमर्थ है। कोई भी शब्द अटल जी के महान व्यक्तित्व को अभिव्यक्त करने में समर्थ नहीं है। अटल जी महानायक थे। सम्पूर्ण प्रकृति और भारत माता ने उन्हें सप्रयास गढ़ा था। आकाश, जल, पृथ्वी, अग्नि आदि सभी तत्वों ने उन्हें अपने गुणों से नवाजा। आकाश ने उन्हें विराट बनाया, जल ने सरसता दी तो अग्नि ने प्रतिष्ठा दी।

विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि अटल जी ने जिस भी क्षेत्र में कार्य किया, एक मानक स्थापित कर दिया। नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनके तरीके वैदिक मंत्रों की भांति याद किये जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में उनका व्यवहार और शैली विशिष्ट थी। यद्यपि अटल जी उत्तर प्रदेश के हैं, किन्तु देश के सभी सदनों में उनकी सघन उपस्थिति सदैव महसूस की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे सदन की भावनाओं और विचारों से अटल जी के परिजनों, प्रशंसकों और पार्टी तक पहुंचाएंगे।

UPCM ने पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष थे। उनके निधन से एक महायुग का अवसान हो गया। अटल जी का व्यक्तित्व बहुआयामी और प्रेरक था। सभी दल उनका सम्मान करते थे। उनका 06 दशक का निष्कलंक राजनैतिक जीवन सदैव याद किया जाएगा। डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व पं. दीनदयाल उपाध्याय से उन्होंने राजनीति के संस्कार ग्रहण किए और उन्हीं के बल पर सुशासन की आधारशिला रखी।

UPCM पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए
UPCM पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए

UPCM ने कहा कि उत्तर प्रदेश अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि है। उन्होंने सर्वाधिक समय तक उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। अटल जी ने M.A की शिक्षा D.A.V. काॅलेज कानपुर में ग्रहण की थी। वर्ष 1957 में बलरामपुर से विजयी होकर वे पहली बार लोकसभा में पहुंचे। प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकसभा में लखनऊ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे 05 बार यहां से लोकसभा के लिए सांसद निर्वाचित हुए।

UPCM ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी वर्ष 1957, 1967, 1971, 1977, 1980, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में 10 बार लोकसभा के सदस्य रहे। वर्ष 1962 एवं 1986 में वे राज्य सभा के सदस्य चुने गये। मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की सरकार में वे 1977-79 तक भारत के विदेश मंत्री रहे। वर्ष 1968-73 तक वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष, वर्ष 1977-80 तक जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य और वर्ष 1980-86 तक भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे। अटल जी 16 मई, 1996 से 31 मई, 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री और 1996-97 में लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे। वे 1998-99 तक पुनः भारत के प्रधानमंत्री बने। 1999 में तेरहवीं लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के पश्चात वे 13 अक्टूबर, 1999 से मई, 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।

UPCM ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था। उन्होंने देश में आधारभूत ढांचे के विकास और भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बहुआयामी कार्य किए। उनका मानना था कि देश के विकास का केन्द्र बिन्दु ग्रामीण भारत ही हो सकता है। अपने प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लागू कर उसे मूर्तरूप दिया। उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, सर्वशिक्षा अभियान आदि की भी आधारशिला रखी। देश के विकास के उनके अमूल्य योगदान को सदैव याद किया जाएगा।

UPCM ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने शांति और सौहार्द पर बल दिया, किन्तु देश की अखण्डता और सुरक्षा से समझौता नहीं किया। उन्होंने परमाणु शक्ति का परीक्षण कर भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र घोषित किया। कारगिल युद्ध के दौरान धैयपूर्वक प्रभावी कार्यवाही कर भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया।

UPCM, विधान सभा अध्यक्ष और गृह मंत्री राजनाथ सिंह पूर्व PM को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए
UPCM, विधान सभा अध्यक्ष और गृह मंत्री राजनाथ सिंह पूर्व PM को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए

UPCM ने कहा कि देशहित में कठोर फैसले लेने वाले अटल जी एक संवेदनशील कवि भी थे। संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियों, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव और अनुभूतियों ने उनकी कविताओं में हमेशा अभिव्यक्ति पायी। अटल जी पत्रकारिता के क्षेत्र में ही सक्रिय रहे। उन्होंने ‘पांचजन्य’, ‘राष्ट्रधर्म’ और ‘वीर अर्जुन’ जैसी पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया। वे ओजस्वी वक्ता थे। विरोधी भी उनकी बात गम्भीरता से सुनते थे। भारत के विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में भाषण देकर हिन्दी भाषा का सम्मान बढ़ाया।

UPCM ने कहा कि भारतीय संसद की गौरवशाली परम्पराओं को समृद्ध करने के लिए अटल जी को सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार प्रदान किया गया। राजनेता के रूप में योगदान के लिए उन्हें पदम्विभूषण तथा राष्ट्र के प्रति उनकी सेवाओं के दृष्टिगत उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से देश ने अपना एक सपूत खो दिया है। उन्होंने सम्मानित सदन की भावनाओं को अटल जी के परिवार तक पहुंचाने का विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध भी किया।

इस अवसर पर नेता विरोधी दल राम गोविन्द चैधरी, बहुजन समाज पार्टी के लालजी वर्मा, कांग्रेस के अजय कुमार ‘लल्लू’, अपना दल के नीलरतन सिंह पटेल ‘नीलू’, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता व मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए विधानसभा अध्यक्ष से अपने-अपने दलों की भावनाओं से अटल बिहारी वाजपेयी के परिजनों को अवगत कराने का अनुरोध किया। इस अवसर पर विधान सभा सदस्यगण द्वारा कुछ समय मौन धारण कर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी गयी।

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