UPCM ने ‘अवध प्रहरी’ पत्रिका के ‘युवा शौर्य विशेषांक’ का विमोचन किया

उत्तर प्रदेश।
UPCM महाराणा प्रताप जयन्ती के उपलक्ष्य में ‘अवध प्रहरी’ पाक्षिक पत्रिका के ‘युवा शौर्य विशेषांक’ के विमोचन के उपरान्त अपने विचार व्यक्त किये। विशेषांक के प्रकाशन के लिए पत्रिका के सम्पादक एवं उनके सहयोगियों को बधाई देते हुए UPCM ने कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकता है कि युवा अपने इतिहास को ठीक से जानें, समझें और इतिहास पुरुषों से प्रेरणा प्राप्त करें। उन्होंने भरोसा जताया कि विशेषांक के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी को महाराणा प्रताप के जीवन के विभिन्न पक्षों को जानने और समझने का अवसर मिलेगा। UPCM ने कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। UPCM का स्वागत रूद्राक्ष का पौधा देकर किया गया।

UPCM ने कहा कि महाराणा प्रताप राष्ट्र गौरव हैं। वे शताब्दियों से भारतीय जनमानस के प्रेरणा पुंज रहे हैं। अपनी वीरता और देशभक्ति के लिए महाराणा प्रताप को अत्यन्त सम्मान के साथ याद किया जाता है। पूरा देश महाराणा प्रताप से स्वाभिमान और चरित्र की दृढ़ता की सीख लेता रहा है। विपरीत परिस्थितियों और अनेक चुनौतियों के बावजूद महाराणा प्रताप ने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। अपने राज्य और स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने जिस शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया, उसके कारण ही लगभग पांच सौ वर्षों के पश्चात भी उन्हें याद किया जाता है। उनका शौर्य और पराक्रम आज भी वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित कर रहे हैं।

UPCM  ‘अवध प्रहरी’ पत्रिका के ‘युवा शौर्य विशेषांक’ के विमोचन अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए
UPCM ‘अवध प्रहरी’ पत्रिका के ‘युवा शौर्य विशेषांक’ के विमोचन अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए

UPCM ने कहा कि वनवासी समाज अपने को महाराणा प्रताप का वंशज मानते हैं। जनजाति समाज में अपने देश और धर्म के लिए बलिदान की भावना है। थारू समाज ने महाराणा प्रताप से जुड़ी अपनी पहचान को आज भी सुरक्षित और संरक्षित रखा है। इस समाज के बीच में कार्य करते हुए मैंने स्वयं महाराणा प्रताप के प्रति थारू समाज के लगाव और श्रद्धा को अनुभव किया है। स्वामिभक्ति एवं गतिशील चेतना का प्रतीक महाराणा प्रताप का अश्व चेतक, आज भी थारू समाज के घर-घर में पूजा जाता है।

UPCM ने कहा कि राष्ट्रभक्ति की बात होने पर महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरू गोविन्द सिंह, महारानी लक्ष्मीबाई और उन अनेक हुतात्माओं की याद आती है, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। हमारे राष्ट्र नायकों के संघर्ष और सफलता का आधार सामाजिक समरसता की भावना थी। इन सभी महापुरुषों ने दलित और पिछड़ी कही जाने वाली जातियों को जोड़ने के लिए योजक की भूमिका निभायी। प्रत्येक स्थिति में, यहां तक की शत्रु पक्ष की महिलाओं के लिए भी सुरक्षा और सम्मान का इन महापुरुषों का भाव ही भारतीयता का वास्तविक भाव है। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा प्राप्त कर भावी जीवन को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष समीर त्रिपाठी और विशिष्ट अतिथि नरेन्द्र ठाकुर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग के अध्यक्ष बृजलाल, भारतीय पुनरुत्थान समिति के कोषाध्यक्ष बाबू लाल शर्मा, अवध प्रहरी के सम्पादक शिवबली विश्वकर्मा, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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