वन अधिकारों की मान्यता हेतु राज्य स्तरीय निगरानी समिति की 14वीं बैठक सम्पन्न

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 एवं नियम 2008 संशोधन नियम-2012 के क्रियान्वयन की समीक्षा हेतु राज्य स्तरीय निगरानी समिति की 14वीं बैठक सम्पन्न हुई।

बैठक में मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने लम्बित दावों का निस्तारण, स्वीकृत दावों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने तथा वनाधिकार समितियों का पुनर्गठन की कार्यवाही आगामी 30 नवम्बर तक पूर्ण किये जाने के निर्देश सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि अस्वीकृत किये गये दावों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर पुनर्परीक्षण आगामी 30 नवम्बर तक प्रत्येक दशा में पूर्ण कर ली जाये। उक्त कार्यवाही में विलम्ब किये जाने पर सम्बन्धित का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जायेगा तथा उसके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जायेगी।

इससे पूर्व बैठक में मुख्य रूप से वनाधिकार अधिनियम के अन्तर्गत प्राप्त दावों के सापेक्ष अस्वीकृत किये गये दावों के पुनर्परीक्षण, स्वीकृत किये गये दावों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराये जाने की कार्यवाही वनाधिकार अधिनियम के अन्तर्गत लम्बित दावों के शीघ्र निस्तारण तथा सामुदायिक दावों को प्राप्त किये जाने के सम्बन्ध में विचार-विमर्श किया गया।  प्रमुख सचिव समाज कल्याण के0 रविन्द्र नायक द्वारा अवगत कराया गया कि वनाधिकार अधिनियम के अन्तर्गत कुल 18910 दावे स्वीकृत करते हुए वन भूमि के टाइटिल वितरित किये गये हैं तथा अधिनियम की व्यवस्था के अनुसार 827 वनाधिकार समितियों का पुनर्गठन किया जा चुका है।

वनाधिकार अधिनियम 2006 के अन्तर्गत अनुसूचित जनजाति तथा अन्य परम्परगत वन निवासियों जो वनों में पीढ़ियो से निवास कर रहे हैं किन्तु उनके अधिकारों को अभिलिखित नहीं किया जा सका है के वनाधिकारों के अभिलिखित करने तथा मान्यता देने के उद्देश्य से उक्त अधिनियम भारत सरकार द्वारा लागू किया गया है। मुख्य सचिव द्वारा यह अपेक्षा की गयी कि अधिनियम में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार जो भी अधिकार अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य परम्परागत वन निवासियों को देय होते हैं, उन्हें दिये जायें। इस सम्बन्ध में अभिलेखों व साक्ष्यों को उपलब्ध कराने में भी यथावश्यक सहयोग प्रदान किया जाय।    

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के निर्देशन में प्रदेश सरकार निरन्तर अनुसूचित जनजातियों के उत्तरोत्तर विकास में कार्यरत है, प्रदेश सरकार का मूल उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों को मुख्य धारा में जोड़ना तथा उनके अधिकारों का संरक्षण किया जाना है, जिसके क्रम में अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 एवं नियम 2008 संशोधन नियम-2012 के क्रियान्वयन की समीक्षा हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है।          

बैठक में प्रमुख सचिव समाज कल्याण के0रविन्द्र नायक, विशेष सचिव वन विभाग, विशेष सचिव राजस्व विभाग, विशेष सचिव पंचायतीराज विभाग तथा मुख्य वन संरक्षक उपस्थिति रहे तथा वनाधिकार से सम्बन्धित जनपद-चित्रकूट, सोनभद्र, बहराइच, बलरामपुर, मिर्जापुर, ललितपुर, चन्दौली, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, महराजगंज, गोण्डा, बिजनौर तथा सहारनपुर के जिलाधिकारियों द्वारा वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से बैठक में प्रतिभाग किया गया। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा नामित अनुसूचित जनजाति के सदस्य के रूप में राम दुलारे (गोंड जनजाति) जनपद-सोनभद्र, शारदा प्रसाद (थारू जनजाति) जनपद-लखीमपुर खीरी तथा रोहित कुमार (सहरिया जनजाति) जनपद-ललितपुर भी उपस्थित रहे।

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