प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से उद्यमों को मिल रही है आर्थिक मजबूती

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का मुख्य उद्देश्य है कि देश के लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों का राजस्व बढ़ाने के लिए सब्सिडी के तौर पर आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा खाद्य पदार्थों में गुणवत्ता और सुरक्षा की चीजों का ध्यान रखा जाये। इस योजना के माध्यम से लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। इसमें जिलों में लघु वन उद्योगों का भी ध्यान रखा जायेगा।

इस योजनान्तर्गत दिए गये कर्ज पर गारण्टी की सुविधा का लाभ नेशनल क्रेडिट गारण्टी ट्रस्टी कम्पनी द्वारा किया जायेगा। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लॉकडाउन होने से देश के उद्योगों और राजस्व में कमी आना स्वाभाविक है। लोगों के बेरोजगार होने पर देश की आर्थिक व्यवस्था पर भी फर्क पड़ा। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इन्हीं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का शुभारम्भ किया है। इस योजनान्तर्गत कोई भी छोटे, लघु, सूक्ष्म उद्यमी लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यवसाय का राजस्व भी बढ़ा सकेंगे। जब लोगों के उद्योग समृद्धि की ओर अग्रसर होंगे तो प्रदेश के कुशल/अकुशल श्रमिकों को रोजगार भी प्राप्त होंगे।

प्रदेश में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएम एफएमई) का संचालन 60ः40 के अनुपात में केन्द्रांश: राज्यांश से किया जा रहा है। वर्ष 2020 से संचालित इस योजना के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा प्रदेश में लगभग 42000 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना/उन्नयन/विस्तारीकरण हेतु 05 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश का परिव्यय धनराशि रू0 1700 करोड़ प्राविधानित किया गया है, जिससे प्रदेश में लगभग रू0 5 हजार करोड़ के पूंजी निवेश का अनुमान है। प्रदेश में इसके सापेक्ष 70 प्रतिशत मौजूदा उद्यमों का उन्नयन/विस्तारीकरण किया जायेगा तथा 30 प्रतिशत नए उद्यमों की जनपद हेतु चयनित ओडीओपी के अनुसार स्थापना करायी जायेगी।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अन्तर्गत व्यक्तिगत एवं समूह दोनों प्रकार के लाभार्थी पात्र हैं। इसके अन्तर्गत निजी सूक्ष्म उद्यमों एवं समूहों को अनुमन्य परियोजना लागत का 35 प्रतिशत अधिकतम रू0 10 लाख क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी का प्राविधान है। कार्यशील पंूजी और छोटे उपकरणों के क्रय हेतु प्रति एसएचजी सदस्य को लोन के रूप में रू0 40,000 सीड कैपिटल भी प्रदान किए जाने का प्राविधान है। प्रदेश में योजनान्तर्गत बेसलाइन स्टडी का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और जनपदवार ओडीओपी का अन्तिम रूप से चयन कर लिया गया है। जनपदों में फील्ड स्तर पर कार्य संचालन हेतु 79 जनपदीय रिसोर्स पर्सन का इम्पैनेलमेण्ट किया गया है एवं 284 इकाईयों का डीपीआर स्वीकृति हेतु भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है।

प्रदेश के 75 जनपदों में असंगठित क्षेत्र में स्थापित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन हेतु स्टेट लेवेल अपग्रेडेशन प्लान (एसएलयूपी) स्टडी कराया जा रहा है। प्रदेश के 10 मण्डल मुख्यालयों पर योजनान्तर्गत 10 इन्क्यूबेसन सेन्टर/कॉमन फैसिलिटी सेन्टर की स्थापना हेतु धनराशि रू0 33.26 करोड़ के व्यय प्रस्ताव की स्वीकृति भारत सरकार द्वारा प्रदान कर दी गयी है। वर्ष 2021-22 में इस योजना के क्रियान्वयन हेतु धनराशि रू0 400 करोड़ प्राविधानित किया गया है, जिससे प्रदेश में 9301 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन का लक्ष्य है। योजनान्तर्गत 645 एस0एच0जी0 मैम्बर्स को फैसिलिटेट करने हेतु राज्य नोडल एजेंसी द्वारा अब तक सीड कैपिटल की धनराशि रू0 1.70435 करोड़ राज्य आजीविका मिशन (एस0आर0एल0एम0) को अन्तरित की जा चुकी है। प्रदेश सरकार की इस योजना से लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों को प्राणवायु मिल रही है। उद्यमों की स्थापना एवं संचालन से लोगों को रोजगार भी मिलेगा और प्रदेश भी समृद्ध की ओर बढ़ेगा।

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