भारत में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण में 18 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर

भारत में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण का विकास अति उच्च गति से हो रहा है। इलेक्ट्रानिक्स वस्तुओं का घरेलू उत्पादन 2015-16 में 2,43,263 करोड़ रूपये (37 बिलियन अमेरिकन डाॅलर) से बढ़कर 2020-21 में 5,54,461 करोड़ रूपये (74.7 बिलियन अमेरिकन डाॅलर) हो गया जोकि 17.9 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर है। यह बात आज ‘‘उ0प्र0 इन्वेस्टर्स समिट-2023’’ में ‘‘उत्तर प्रदेशः डिजाइनिंग एण्ड मैन्युफैक्चरिंग इन इण्डिया, फाॅर दि वल्र्ड’’ सत्र के दौरान चर्चा में उभर कर आई।
भारत सरकार द्वारा इलेक्ट्रानिक गुड्स के लिए पी.एल.आई. योजना, लाइसेन्स नियमों में छूट और मल्टी-ब्राण्ड में 51 प्रतिशत तथा सिंगिल ब्राण्ड में 100प्रतिशत एफ.डी.आई. की स्वीकृति आदि हाल की नीतियाॅं और नियामक तन्त्र इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्षेत्र में विकास के प्रमुख कारक है।
‘‘उत्तर प्रदेशः डिजाइनिंग एण्ड मैन्युफैक्चरिंग इन इण्डिया, फाॅर दि वल्र्ड’’ सत्र का उद्देश्य इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए राज्य के अवसरों और नीतियों को उजागर करना और विकास की सम्भावनाओं, चुनौतियों और आगामी रणनीतियों पर विचार- विमर्श किया जाना था।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मा0 सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने, वर्ष 2027 तक एक ट्रिलियन डाॅलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्य के चहुॅंमुखी सामाजिक-आर्थिक विकास में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और इस प्रकार एक डिजिटल डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा। राज्य में डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रसार हेतु सरकार प्रौद्योगिकी के बुनियादी ढाॅंचे में सुधार कर रही है और इसके साथ ही युवाओं को अधिक भागीदारी के लिए तैयार किया जा रहा है।
वर्ष 2017 में आरम्भ की गई इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति ने राज्य में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया जिसने राज्य में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण के एक नये ईकोसिस्टम को जन्म दिया है। कार्यान्वयन में सुगमता सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति 2020 को निवेशकों की आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधित किया गया है। सरकार द्वारा सेमीकण्डक्टर इकाइयों में निवेश आमंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर चलाये गये आउटरीच कार्यक्रम से वैश्विक निवेशक समुदाय में अत्यधिक रुचि उत्पन्न हुई है और इस क्षेत्र में निवेश के लिए कई प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सरकार इन परियोजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ काम कर रही है।
सैमसंग इण्डिया इलेक्ट्रानिक्स प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी जे.बी. पार्क ने उत्तर प्रदेश में सैमसंग की विकास यात्रा को साझा किया और आगे भी प्रदेश में सैमसंग द्वारा निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की। मेसर्स एनएक्सपी इण्डिया के हेड-स्ट्रेटेजी एण्ड गवर्नमेण्ट रिलेशन्स अंकित पाल ने भारत एवं पूरे विश्व में अपनी कम्पनी की उपस्थिति से अवगत कराया तथा सेमीकण्डक्टर उद्योग के लिये सेण्टर आफ एक्सीलेन्स की आवश्यकता बताई। उन्होने सेमीकण्डक्टर क्षेत्र के लिये इन्क्यूबेटर स्थापित कर स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। डिक्सन टेक्नोलाॅजीज इण्डिया लिमिटेड के चेयरमैन सुनील वाचानी ने कम्पानेन्ट निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिये बड़े पैमाने पर लघु एवं मध्यम इकाईयों के लिये प्लग एण्ड प्ले सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता बतायी।
इस अवसर पर नीति आयोग में सीनियर एडवाइजर संजीत सिंह ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव एवं प्रगति की सराहना की तथा कौशल विकास को बढ़ावा दिये जाने का परामर्श प्रदान किया। आई.सी.ई.ए. के चेयरमैन पॅंकज महेन्द्रू ने सेमीकण्डक्टर उद्योग के लिये कुशल जनशक्ति की आवश्यकता दोहराई तथा इसके लिये उत्तर प्रदेश में मौजूद प्रौद्योगिकी संस्थानों की उपलब्धता को एक लाभदायक स्थिति बताया। उन्होने आगे कहा कि वर्ष 2014 के उपरान्त जिस प्रकार मोबाईल उद्योग क्षेत्र के लिये व्यापक बदलाव किये गये हैं उसी प्रकार के बड़े बदलाव की आवश्यकता सेमीकण्डक्टर उद्योग के विकास के लिये आवश्यक है। उन्होने बताया कि उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रानिक्स तथा सेमीकण्डक्टर परियोजनाओं के फेसिलिटेशन हेतु आई.सी.ई.ए. द्वारा यूपी इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन लिमिटेड के साथ आज एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया जा रहा है। टेग्ना इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के प्रबन्ध निदेशक अमित मनवानी, तथा मेसर्स डिलाॅट के पार्टनर एण्ड लीडर – कोर बिजनेस आपरेशन्स राजीव सिंह ने भी उपस्थित प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया।
यू0पी0 इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन लि0 के प्रबन्ध निदेशक अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्षेत्र में निवेश हेतु प्रदेश को लगभग 3 लाख करोड़ के 145 प्रस्ताव प्राप्त हुये है।








