UPCM के राम-राज में भी नहीं छठा इस गांव का अंधेरा…पढ़े पूरी रिपोर्ट

रिपोर्ट – अथर्व रस्तोगी।
उत्तर प्रदेश (बाराबंकी)।
UPCM सरकार प्रदेश में आने के बाद बड़े बड़े दावे बिजली को लेकर करती रही है पर ये बात कितनी सच है इसका अंदाजा आप इस खबर से लगा सकते हैं। खबर राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले की है जहां के सिध्दौर ब्लॉक के निजामबाद मजरे बिबियापुर थाना गाँव के लोगों नेे आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नही देखी।
दरअसल हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव में विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। साढ़े तीन सौ वोटर वाला यह गांव है, जिसमें तकरीबन अस्सी घर है जो अंधेरे में जिंदगी जीने को मजबूर हैं। एक तरफ जहां सरकार गरीबों को मुफ्त बिजली कनेक्शऩ देने के लिए सौभाग्य योजना चला रही है। वहीँ दूसरी तरफ अभी भी राजधानी से मात्र चालीस किलोमीटर की दूरी पर ऐसे गांव हैं जिनमें आज तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है।
आपको बता दें कि गांव के निवासियों का साफ तौर पर कहना है कि उन्होंने कई बार आला अधिकारियों से इसकी शिकायत की। लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक बार भी नही सुनी और सुध लेने कोई नहीं आया। जिसके कारण आधुनिकता के इस दौर में गांव वाले चार्जिंग बैटरी के भरोसे अपने जीवन यापन करने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी तरफ बच्चों की शिक्षा पर इसका खासा असर पड़ रहा है। जब हमने गांव की इंटरमीडिएट की छात्रा सुधा वर्मा से पूछा कि बिजली न होने से उसे कैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो उन्होंने साफ कहा कि पढ़ाई केवल दिन में ही हो पाती है वो भी एक दो घंटा की। पूरा दिन तो स्कूल मे निकल जाता है और शाम को जो सेल्फ स्टडी का टाइम होता है तो घर में बिजली नहीं होती है।
लोहिया ग्राम घोषित है गांव
हैरानी वाली बात यह है कि इस गांव को प्रशासन में अपने रजिस्टर में लोहिया ग्राम के नाम से घोषित कर रखा है और लोहिया गांव में जो सुविधाएं मिलती हैं वो तो दूर की बात है इस गांव के लोगों ने आज तक बिजली ही नहीं देखी। गांव के लोगों का साफ तौर पर कहना था कि साहब हमने पटवारी से लेकर बिजली विभाग के बडे साहब तक सबसे दरखास लगाई। लेकिन हमारी आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। बात अगर यहीं तक रुक जाती है तो और बात थी…. हमें हैरानी तो तब हुई जब हमें ये पता चला कि विगत बारह मार्च को गांव के ही गया प्रसाद ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर फोन कर शिकायत दर्ज कराई थी और उन्हें इसका रिटर्निंग एसएमएस भी प्राप्त हुआ था लेकिन उसके बाद भी जिले के आला अधिकारियों ने उनकी कोई सुध नहीं ली। यहां तक कि आलम यह है कि गांव के बगल से 11000 बोर्ड की लाइन निकली है लेकिन अधिकारियों को वहां ट्रांसफर रखने की और गांव में कनेक्शन करने की फुर्सत तक नहीं मिली।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बाबत जब हमने जिले के अधीक्षण अभियंता आर.पी सिंह से बात की तो उन्होंने पहले ऐसी किसी भी जानकारी के होने से साफ़ इनकार कर दिया, लेकिन जब हमने बताया कि हम ने स्वयं जाकर मौके पर निरीक्षण किया है उसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भी है। तब कहीं जाकर अधीक्षण अभियंता साहब को हमारी बातों पर यकीन हुआ। इसी बाबत हमने गांव के गया प्रसाद से फोन कर कंप्लेंट नंबर की जानकारी ली तो उसे अधीक्षण अभियंता जी को सौंप दिया।
बिजली का नामो निशान नहीं लेकिन कंप्लेंट रिपोर्ट मे हो गया समस्या का निस्तारण
हमारी आंखें तब फटी रह गई जब बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता ने कंप्लेंट रिपोर्ट निकलवाई उसके बाद जो देखने को मिला वह वाकई काफी हैरान करने वाला था। कंप्लेंट रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा था कि इस समस्या का निस्तारण हो चुका है, लेकिन बिजली तो गांव में पहुंची नहीं थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब ऊपर से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में ऐसी खामियां सामने आएगी, तो जिलावार अधिकारी किस तरीके से काम करेंगे।
इस समस्या के विषय में जिले के अधीक्षण अभियंता आर.पी सिंह का साफ तौर पर कहना था कि जांच करवा कर जल्द से जल्द समस्या से निजात दिलाई जाएगी और गांव में बिजली पहुंचाने का प्रबंध किया जाएगा।
क्या कहते हैं बीजेपी प्रवक्ता
बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का कहना है कि केंद्र में PM-नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभाली थी उस समय देश के 18,000 गाँव ऐसे थे जहां बिजली नही पहुंची थी और हमने 1000 दिनों का टारगेट लेकर बिजली पहुँचाने का काम किया है। जहाँ जिस गाँव में अभी तक बिजली नही पहुंची है इसको संज्ञान में लेकर जल्द से जल्द इस गाँव में बिजली पहुंचाई जाएगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर कितने दिनों में इस गांव के लोगों की जिंदगी में उजाला होगा?
इस खबर के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब राजधानी लखनऊ से मात्र 45 किलोमीटर की दूरी पर ऐसे गांव हैं जहां विद्युतीकरण नहीं हुआ है तो उत्तर प्रदेश के दूरदराज के इलाकों में क्या हाल होगा यह तो समझने वाली बात है?
साथ ही यह भी जग-जाहिर हो जाता है कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गाँव-गाँव में बिजली पहुँचाने की बात जो एक साल से करते आ रहे हैं यह कितना सच है? आप रिपोर्ट से अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार कितनी जागरूक है और उसके अधिकारी कितना काम कर रहे हैं साथ ही विकास कितना हुआ है?








