UPCM मंत्रिमंडल के सिंचाई मंत्री बोले PMKSY परियोजना में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ होगी सख्त कार्यवाही

लखनऊ (29 मई, 2019)।
UPCM
मंत्रिमंडल के सिंचाई एवं सिंचाई यांत्रिक मंत्री धर्मपाल सिंह ने सिंचाई विभाग मुख्यालय सभागार में समीक्षा बैठक के दौरान उच्च अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रधानमंत्री किसान सिंचाई परियोजना (P.M.K.S.Y.) में शिथिलता बर्तने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्यवाही की जाये।

सिंचाई मंत्री ने कहा कि उ.प्र. में इस योजना के तहत मध्य गंगा नहर योजना द्वितीय चरण, सरयू नहर परियोजना एवं अर्जुन सहायक परियोजनाएं कार्यरत् है लेकिन इनमें अभी तक इष्टतम् प्रगति नही हुई है जो अत्यन्त चिंता का विषय है। सिंचाई मंत्री ने निर्देशित किया कि P.M.K.S.Y. परियोजनाओं में 50 प्रतिशत से कम प्रगति वाले संगठनों के संबंधित अधिकारियों को रेखांकित कर तुरन्त उनका स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए।

सिंचाई मंत्री धर्म पाल सिंह सिंचाई विभाग मुख्यालय सभागार में समीक्षा बैठक करते हुए
सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह सिंचाई विभाग मुख्यालय सभागार में समीक्षा बैठक करते हुए

समीक्षा से यह तथ्य प्रकाश में आया कि यह योजना वर्ष 2008 में प्रारम्भ की गई थी। सिंचाई मंत्री ने कहा कि मध्य गंगा नहर परियोजना पर पिछली सरकार ने कोई ध्यान नही दिया। UPCM सरकार ने इस महत्वांकाक्षी परियोजना को अमली जामा पहनाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य शुरू किये हैं। सिंचाई मंत्री ने प्रमुख सचिव सिंचाई से अपेक्षा की वे भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही में आ रही समस्याओं को निस्तारित करने के लिए अपने स्तर से जिला मण्डल एवं प्रशासन से सम्पर्क कर प्रयास करें जिससे कि यह योजना इस वर्ष की समाप्ति तक पूर्ण हो सके और निर्धारित समय सीमा के अन्तर्गत मानक के अनुरूप कार्य न करने वालो को चिन्हित भी करे। इसी तरह सरयू नहर परियोजना वर्श 1978 में प्रारम्भ की गयी थी। UPCM सरकार ने इस योजना को भी प्राथमिकता के साथ संचालित किया फलतः परियोजना का 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण हुआ है। सिंचाई मंत्री ने कहा कि क्षेत्र के लोगो का कहना है कि 40 साल बाद ‘‘नहरों ने बुझायी है खेंतो की प्यास’’ आया है नहरों में पानी। सिंचाई मंत्री ने कडे़ निर्देश दिये कि इस परियोजना को भी दिसम्बर 2019 तक पूर्ण किया जायें।

अर्जुन सहायक परियोजना की समीक्षा के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि यह योजना 2009-10 में प्रारम्भ हुई थी नाबार्ड पोषित इस परियोजना में 77 प्रतिशत प्रगति हुई है। सिंचाई मंत्री ने इस योजना को भी दिसम्बर 2019 तक पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिये।

प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन टी. वेंकटेश ने बताया कि इस वर्ष समय से बजट आवंटित कर दिया गया है और नियमित रूप से भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की जायेगी। सिंचाई मंत्री ने निर्देशित किया कि धनराशि उपलब्ध होने के बाद भी क्षेत्र में कार्य नही हो पाता है तो ऐसे अधिकारियों के विरूद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाये।

तालाब, पोखरों को भरे जाने की स्थिति की समीक्षा के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि इस वर्ष 24354 सापेक्ष 23535 भरे गये है सिंचाई मंत्री ने कड़ी हिदायत दी कि हर दशा में अवशेष, तालाबों को भर दिया जाए। जिससे गर्मी के मौसम में पशु, पक्षियों को इसका लाभ मिल सकें।

वर्तमान खरीफ फसली वर्श 2019-20 विभागीय मद से राजवाहा 247.225 किमी. एवं अल्पिका 577.519 किमी. (कुल 824.744किमी.) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सिंचाई मंत्री ने कड़े निर्देश दिये कि हर हाल में 20 जून,2019 तक शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण किया जाये। उन्होंने सिल्ट सफाई के कार्यो के सत्यापन हेतु मुख्यालय स्तर के निर्देश दिये।

सिंचाई मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के संकल्प पर ड्रोप मोर क्राप को UPCM सरकार ने अक्षरसः लागू करने का संकल्प लिया है। सिंचाई मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा कि वे इस योजना को जन सहभागिता के आधार पर संचालित करे। इस क्रम में प्रमुख सिंचाई एवं जल संसाधन टी. वेंकटेश ने बताया कि सिंचाई विभाग की विश्व बैंक पोषित परियोजना (यू.पी.डब्लू.एस.आर.पी.) द्वारा परियोजना आक्षादित 16 जनपदों में 30 हजार 841 जल उपभोक्ता समितियों का निर्वाचन कर गठन किया जा चुका है। इसके तहत बुंदेलखण्ड के ललितपुर जनपद में इस समितियों को नहरो का प्रबन्ध पूर्ण से सौप दिया गया है। शेष जनपदों में क्षमता विकास प्रशिक्षण पूर्ण किया जा चुका है निकट भविष्य में नहरो का प्रबंध इनको भी सौप दिया जायगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत उ.प्र. देश के प्रथम पक्ति के प्रदेशों में गिना जाता है।

बैंठक में विशेष सचिव सिंचाई अनीता वर्मा सिंह, सुरेन्द्र विक्रम एवं प्रमुख अभियन्ता/विभागाध्यक्ष पी.पी. पाण्डेय सहित विभिन्न संगठनों के मुख्य अभियन्ता/अधिकारी भी उपस्थित रहे।   

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