UPCM ने नगरीय प्रशिक्षण एवं शोध केन्द्र और स्थानीय निकाय निदेशालय U.P का लोकार्पण किया

उत्तर प्रदेश।
UPCM नगरीय प्रशिक्षण एवं शोध केन्द्र व स्थानीय निकाय निदेशालय उत्तर प्रदेश के लोकार्पण के पश्चात आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित किये। कार्यक्रम में प्रदेश के महापौर, नगर आयुक्त, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों के अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी भी मौजूद रहे। इस अवसर पर UPCM ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के नगरीय निकायों के सम्बन्धित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को स्वच्छ उत्तर प्रदेश पुरस्कार-2018 से पुरस्कृत भी किया।

UPCM ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विगत एक वर्ष में निरन्तर प्रयास करके नगरीय विकास को सही दिशा दी गई है। स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना आदि के माध्यम से नगरों को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। मार्ग प्रकाश व्यवस्था में 06 लाख से भी अधिक प्रकाश बिन्दुओं के LED में बदलाव से पर्यावरण सम्बन्धी फायदों के अतिरिक्त 110 करोड़ रुपए की सालाना बचत हुई है। उन्होंने कहा कि नगरीय विकास को तीव्र और प्रभावी बनाने के लिए नगरीय निकायों के सहयोग और समन्वित प्रयास की आवश्यकता है। 30 सितम्बर, 2018 तक सभी नगर निकाय O.D.F का लक्ष्य प्राप्त कर लें, अन्यथा सम्बन्धित की जवाबदेही तय की जाएगी।
UPCM द्वारा ‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2018’ में 10 लाख से अधिक जनसंख्या की श्रेणी में सर्वाधिक गतिशील शहर के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर नगर निगम गाजियाबाद, 03 लाख से 10 लाख जनसंख्या की श्रेणी में नवाचार एवं सर्वोत्तम प्रथाएं हेतु सर्वोत्तम शहर के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर नगर निगम अलीगढ़ तथा जोनल स्तर पर नाॅर्थ जोन में ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन हेतु सर्वोत्तम शहर के रूप में जनपद झांसी की नगर पालिका परिषद समथर के चयन के लिए सम्बन्धित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया।

इसके अतिरिक्त UPCM ने 03 से 10 लाख की जनसंख्या के अन्तर्गत नगर निगम वाराणसी, झांसी, कानपुर एवं आगरा के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को ‘स्वच्छ उत्तर प्रदेश पुरस्कार 2018’ से सम्मानित किया। 01 लाख से कम जनसंख्या के नगर निकायों के अंतर्गत बिजनौर की नगर पंचायत सहानपुर, शामली की नगर पंचायत बनात, झाँसी की नगर पंचायत एरिच, आगरा की नगर पंचायत दयालबाग और बिजनौर की नगर पालिका परिषद अफज़लगढ़ के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को सम्मानित किया गया। राज्य के बेस्ट डिस्ट्रिक्ट के रूप में जनपद बिजनौर के लिए जिलाधिकारी बिजनौर को और ‘क्यू.सी.आई. सर्टिफाइड फाॅर O.D.F’ के लिए जनपद बिजनौर की नगर पालिका परिषदों किरतपुर, बिजनौर, शेरकोट, स्योहरा, नगीना, नजीबाबाद, नहटौर और नगर पंचायतों मण्डावर, झालू, सहसपुर और बुलन्दशहर की नगर पंचायत खानपुर के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया।
UPCM ने कहा कि विगत वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रथम 100 शहरों में प्रदेश का एक मात्र शहर वाराणसी सम्मिलित था। इस वर्ष के सर्वेक्षण में प्रथम 100 शहरों में प्रदेश के शहरों की बढ़ी संख्या पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सफाई, शुद्ध पेयजल, स्ट्रीट लाइट, प्रदेश सरकार की नीति के अनुरूप फेरी एवं पटरी दुकानदारों हेतु समुचित व्यवस्था के माध्यम से शहरों की व्यवस्था को स्थानीय निवासियों हेतु सुविधापूर्ण बनाया जा सकता है।

UPCM ने कहा कि स्वच्छता एवं शुद्ध पेयजल के अभाव में अनेक प्रकार के विषाणुजनित रोग होते हैं। स्वच्छता एवं शौचालय निर्माण में जनभागीदारी सुनिश्चित कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इसमें सामाजिक क्षेत्र, औद्योगिक इकाइयों द्वारा सी.एस.आर. फण्ड, व्यापार मण्डलों का सहयोग उपयोगी हो सकता है। प्रत्येक वाॅर्ड में नोडल अधिकारी की नियुक्ति, नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा सुबह-शाम क्षेत्र भ्रमण क माध्यम से सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
UPCM ने कहा कि स्वच्छता का अर्थ घर, सड़क, पार्क, खाली प्लाॅट आदि सभी के साफ होने से है। इसके लिए साॅलिड वेस्ट मैनेजमेण्ट की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने साॅलिड वेस्ट मैनेजमेण्ट के लिए नीति बनायी है। नगर निकायों को नीति के अनुरूप कार्य करना चाहिए। नगर विकास विभाग को 15 जुलाई, 2018 से सभी 653 नगर निकायों में 50 माइक्राॅन से अधिक की पाॅलिथीन को प्रतिबंधित करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इससे स्वच्छता अभियान को बड़ा फायदा होगा।

UPCM ने कहा कि नगरीय निकाय स्वायत्त संस्थाएं हैं। किन्तु इनकी आर्थिक स्थिति दयनीय है और यह राज्य सरकार पर निर्भर हो गई हैं, जिससे स्मार्ट सिटी, अमृत आदि योजनाओं में अपने योगदान में यह असहाय नजर आती है। जबकि इन संस्थाओं को पर्याप्त अधिकार हासिल हैं। उन्होंने कहा कि अपनी आय बढ़ाने के लिए नगरीय निकायों को अपनी टैक्स पद्धति में सुधार लाना चाहिए। आॅनलाइन टैक्स जमा प्रणाली इसमें उपयोगी साबित हो सकती है।
UPCM ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत प्रदेश के 10 शहरों और अमृत योजना के तहत 60 नगर निकायों का चयन हुआ है। उन्होंने दोनों योजनाओं के कार्य में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि इन योजनाओं में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है। शीघ्रता से निर्णय लेकर कार्य में तेजी लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि नगर विकास विभाग ‘नमामि गंगे’ परियोजना का नोडल विभाग है। वर्ष 2019 के प्रयाग कुम्भ में करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक आएंगे। इस दौरान गंगा जी की अविरलता और निर्मलता के लिए नगर निकायों के साथ समन्वित प्रयास की आवश्यकता है।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि पूरे मनोयोग से कार्य करने पर कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। आज यहां जिन नगर निकायों को सम्मानित किया जा रहा है, उनके अधिकारियों के समर्पण भाव, कार्य के प्रति लगन एवं दायित्व बोध से उन्हें यह स्थान प्राप्त हुआ है। प्रदेशभर की नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इसलिए बुलाया गया है कि पुरस्कृत हो रहे नगर निकायों से प्रेरणा लेकर वे अपने निकायों के तीव्र विकास के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण की तर्ज पर राज्य में भी स्वच्छता सर्वेक्षण कराया जाएगा। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षण से ठीक पहले अक्टूबर-नवम्बर माह में सम्पन्न होंगे। अपने सम्बोधन में उन्होंने नगर विकास विभाग की योजनाओं एवं प्रयासों की विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर नगर विकास राज्य मंत्री गिरीश चन्द्र यादव, मुख्य सचिव अनूप चन्द्र पाण्डेय, नगर विकास विभाग के सलाहकार केशव वर्मा, जल निगम के अध्यक्ष जी.बी. पटनायक, नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड के अध्यक्ष राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज सिंह और शासन-प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम के पश्चात UPCM ने प्रदेश में संचालित स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की समीक्षा भी की।

समीक्षा के दौरान नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना, राज्य मंत्री गिरीश चन्द्र यादव, विभिन्न नगर निगमों के महापौर, मुख्य सचिव अनूप चन्द्र पाण्डेय, नगर विकास विभाग के सलाहकार केशव वर्मा, जल निगम के अध्यक्ष जी.बी. पटनायक, नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड के अध्यक्ष राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज सिंह, विभिन्न मण्डलों के मण्डलायुक्त एवं शासन-प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।








