गन्ना कृषकों की अधिकतम ऋण सीमा को बढ़ाकर 75 हजार से 1 लाख रु. प्रति सदस्य किया गया

• प्रदेश के गन्ना किसानों की मांग के चलते गन्ना आयुक्त / निबंधक ने लिया निर्णय
• गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर नये आयाम स्थापित करने हेतु वर्तमान ऋण सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है
 • गन्ना कृषकों को लाभ देने के लिये ऋण सीमा के निर्धारण हेतु 03 मानकों में भी किया गया संशोधन 
• ऋण सीमा का निर्धारण गन्ना कृषक के पास उपलब्ध गन्ना क्षेत्रफल, समिति में कृषक का जमा अंश एवं बेसिक कोटा के आधार पर तय किया जायेगा
• निबंधक द्वारा जारी 03 मानकों के आधार पर जिला सहकारी बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण सीमा 3 वर्ष के लिये अधिकतम ऋण सीमा होगी
उत्तर प्रदेश के आयुक्त गन्ना एवं चीनी / निबंधक, सहकारी गन्ना समितियां, उ.प्र. ने बताया कि नाबार्ड योजना के अन्तर्गत अल्पकालीन ऋण वितरण हेतु अधिकतम ऋण सीमा रु.50 हजार प्रति सदस्य निर्धारित थी, जिसे वर्ष 2019 में बढ़ाकर रू. 75 हजार कर दिया गया था। वर्तमान समय में कृषको द्वारा गन्ना खेती में आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर नये आयाम स्थापित करने हेतु तथा गन्ना किसानों की वर्तमान ऋण सीमा को बढ़ाने की मांग के दृष्टिगत इसे रू.75 हजार से बढ़ाकर रू 1 लाख प्रति सदस्य करने का निर्णय लिया गया है।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए भूसरेड्डी ने बताया कि गन्ना कृषकों को लाभ देने के लिये ऋण सीमा के निर्धारण हेतु 03 मानकों में भी संशोधन किया गया है। इन मानकों के अन्तर्गत गन्ने क्षेत्रफल के लिये निर्धारित प्रति एकड वित्तमान को रू. 8 हजार से बढाकर रू.20 हजार किया गया है। इसके साथ ही सदस्यों द्वारा समिति मे जमा अंश धनराशि को 80 गुना से बढ़ाकर 100 गुना निर्धारित किया गया है। सदस्यों के गन्ने के बेसिक कोटे को 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत प्रति सदस्य किया गया है तथा अधिकतम ऋण सीमा रू.1 लाख प्रति सदस्य निर्धारित की गई है। निबंधक द्वारा 03 मानकों के आधार पर जिला सहकारी बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण सीमा अधिकतम 3 वर्ष के लिये होगी। उन्होंने यह भी बताया कि उपरोक्तानुसार की गई बढ़ोत्तरी से गन्ना कृषकों को समिति से वांछित कृषि निवेशों की उपलब्धता होगी, जिसका समुचित उपयोग कर कृषक गन्ना उत्पादन में वृद्धि कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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