ड्राइविंग टेस्ट की नयी व्यवस्था प्रदेश के 08 जनपदों में लागू

लखनऊ।
      उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा कोष से वित्त पोषित करते हुए 15 मण्डलों के अन्तर्गत यथा-प्रयागराज, मुरादाबाद, मिर्जापुर, मथुरा, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, अलीगढ़, बरेली, बस्ती, झांसी, आजमगढ़, देवीपाटन एवं मुजफ्फरनगर में ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डी0टी0आई0) का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से प्रयागराज, मुरादाबाद, मिर्जापुर, मथुरा, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर एवं मुजफ्फरनगर में सिविल कार्य पूर्ण हो चुका है।


      यह जानकारी परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने दी। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण वाहनों की ओवरस्पीडिंग, ड्रंकेन ड्राइविंग, राॅंग साइड ड्राइविंग तथा वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग है। प्रदेश में वर्ष 2020 में 34,243 सड़क दुर्घटनाओं में 19,149 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है। गत वर्ष 2019 के सापेक्ष मृतकों की संख्या में 15.5 प्रतिशत की कमी आई है, परन्तु इसमें और कमी लाने के लिए प्रदेश सरकार निरन्तर प्रयासरत है। इस उद्देश्य से इन सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या में 10 प्रतिषत की कमी लाये जाने का लक्ष्य शासन द्वारा निर्धारित किया गया है तथा वर्ष 2030 तक इसमें 50 प्रतिशत की कमी लाये जाने का लक्ष्य प्राप्त किया जाना है।


      धीरज साहू ने बताया कि सड़क दुर्घटना में कमी लाने के लिए पहला कदम दक्ष चालकों को ही ड्राइविंग लाईसेंस निर्गत करना है। इस प्रयोजन से ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया को चुस्त-दुरूस्त किये जाने हेतु ऐसे जनपद जहां ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डी0टी0आई0) के ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का निर्माण पूर्ण हो चुका है, यथा- प्रयागराज, मुरादाबाद, मिर्जापुर, मथुरा, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर एवं मुजफ्फरनगर वहां कार्यालय में लिये जाने वाले मैनुअल ड्राइविंग टेस्ट को डी0टी0आई0 स्थल पर ही नव-निर्मित टेस्ट टैªक पर दिनांक 15.06.2021 से लिया जाना प्रारम्भ किया जाएगा। यह ट्रैक राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ संस्था सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट आफ रोड ट्रांसपोर्ट (सी0आई0आर0टी0), पुणे से डिजाइन कराये गये हैं। यहां दो पहिया तथा चार पहिया वाहन चालकों के दक्षता परीक्षण हेतु टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट लिये जाने की व्यवस्था भी की गई है।

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