हैलो! मैं एलडीए वीसी बोल रहा हूं….अब आर्किटेक्ट की भी तय होगी जवाबदेही

स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण होने पर आर्किटेक्ट की भी तय होगी जवाबदेही

लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डाॅ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी ने आर्किटेक्ट व अभियंताओं के साथ बैठक में दिये निर्देश, शहर के नियोजित विकास के लिए आर्किटेक्ट्स से मांगा सहयोग

मानचित्र के लंबित प्रकरणों की समीक्षा के दौरान उपाध्यक्ष ने भू-स्वामियों को मिलाया फोन, देय शुल्क जमा करके नक्शा पास कराने के सम्बंध में किया प्रोत्साहित

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के नियोजित क्षेत्र में अब अगर स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण हुआ तो प्रवर्तन अनुभाग के साथ ही सम्बंधित आर्किटेक्ट/अभियंता की भी जवाबदेही तय की जाएगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डाॅ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी ने शनिवार को आर्किटेक्ट व अभियंताओं के साथ बैठक करके इस सम्बंध में निर्देश जारी किये। उन्होंने शहर के नियोजित विकास के लिए आर्किटेक्ट्स से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वे लोगों को भू-उपयोग व मानचित्र के मुताबिक निर्माण कराने की दिशा में प्रोत्साहित करें। बैठक में उपाध्यक्ष ने स्पष्ट संदेश दिया कि नक्शे के लिए आवेदन करके स्थल पर निर्माण शुरू कराने का खेल नहीं चलेगा। इसके लिए मानचित्र अनुभाग से सूची प्राप्त करके स्थल की नियमित रूप से निगरानी करायी जाएगी।

उपाध्यक्ष डाॅ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि अगर निर्माणकर्ता द्वारा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत अथवा भू-उपयोग के विपरीत आवासीय में व्यवसायिक निर्माण कराया जा रहा है तो सम्बंधित आर्किटेक्ट की जिम्मेदारी है कि वह उसे नियम व शर्तों की जानकारी देते हुए अवैध निर्माण करने से रोके। अगर इसके बाद भी निर्माणकर्ता द्वारा अवैध निर्माण कार्य कराया जाता है तो आर्किटेक्ट को उसकी सूचना प्राधिकरण में देनी होगी। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इसके लिए ओ0बी0पी0एस (आॅनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम) पोर्ट्ल पर अलग से एक विंडो दिया जाए, जिसमें आर्किटेक्ट निर्माण के सम्बंध में अपनी टिप्पणी अंकित कर सकेंगे।

बैठक के दौरान उपाध्यक्ष द्वारा मानचित्र के लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गयी। इसमें पाया गया कि ज्यादातर प्रकरणों में भू-उपयोग के विपरीत नक्शा दाखिल करने से नक्शा स्वीकृत नहीं हो रहा है। इसके अलावा काफी मामलों में जमा किये गये मानचित्र में आर्किटेक्ट द्वारा बाद में संशोधन किये जाने से प्रकरण लंबित है। इस पर उपाध्यक्ष ने आर्किटेक्टों को निर्देशित किया कि वह अपने समस्त लंबित प्रकरणों की स्वतः समीक्षा करते हुए वर्तमान स्थिति से अवगत कराएं।

इस मौके पर उपाध्यक्ष ने आर्किटेक्टों की समस्याएं भी सुनी, जिनमें ज्यादातर शिकायतें ओ0बी0पी0एस साॅफ्टवेयर से सम्बंधित थीं। उपाध्यक्ष ने इन सभी समस्याओं को सूचीबद्ध करते हुए निस्तारण के लिए शासन के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि महीने के प्रत्येक शनिवार को सुबह 10 बजे से 12 बजे तक आर्किटेक्टों के लिए विशेष हेल्प डेस्क संचालित किया जाए, जिसमें आर्किटेक्टों को जानकारी देने के साथ ही उनकी समस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित कराया जाए। सभी आर्किटेक्टों द्वारा उपाध्यक्ष के इस निर्णय का स्वागत किया गया तथा आर्किटेक्ट एसोसिएशन द्वारा अपने दो प्रतिनिधियों को हेल्प डेस्क में शामिल करने के सम्बंध में सहमति जतायी गयी।

समीक्षा में यह भी उजागर हुआ कि कई प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें मानचित्र तुरंत स्वीकृत हो सकता है, लेकिन सम्बंधित आवेदनकर्ता द्वारा देय शुल्कों का भुगतान नहीं किये जाने से नक्शा निर्गत नहीं हो पा रहा है। इसके चलते पोर्टल पर लंबित प्रकरणों की सूची अनावश्यक रूप से बढ़ती जा रही है। इस पर उपाध्यक्ष ने आर्किटेक्टों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्लाइंट्स से सम्पर्क करके उन्हें देय शुल्क जमा कराके नक्शा पास कराने के लिए प्रोत्साहित करें। इस क्रम में उपाध्यक्ष ने आवेदनकर्ताओं को फोन मिलाकर उनसे स्वयं बात की और शुल्क जमा कराके नक्शा स्वीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित किया।

बैठक में अपर सचिव/प्रभारी मुख्य नगर नियोजक ज्ञानेन्द्र वर्मा एवं अधिशासी अभियंता-मानचित्र संजय जिंदल समेत अन्य अधिकारी व आर्किटेक्ट/अभियंता उपस्थित रहे।

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