UPCM रामराज में अगर आपको स्वस्थ्य होना है तो कमीशन वाली दवाइयां लेनी ही पडेंगी

रिपोर्ट – अथर्व रस्तोगी।
उत्तर प्रदेश (बाराबंकी)।
UPCM सरकार के स्वास्थ्य मंत्री एक तरफ जहाँ आज लखनऊ के लोकबन्धु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय में विशेष रोग नियंत्रण माह की शुरुआत किये वही दूसरी तरफ उन्हीं के आलाधिकारी उनके आदेशों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं। UPCM सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह अपने स्वास्थ्य विभाग की हमेशा तारीफों के पुल बंधने से थकते नही हैं लेकिन जमीनी हकीकत से खुद अनजान हैं।
आपको बता दें कि राजधानी लखनऊ से कुछ ही दुरी पर बाराबंकी का सिध्दौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है जहाँ पर डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिखते हैं और बहाना ये बताते हैं कि सरकार दवाएं ही नही भेज रही है तो क्या करें? इसकी हकीकत क्या है ये तो खुद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह जी ही जानते होंगे?
सरकारें बदली, हुक्मरान बदले और बदले अफसरान…पर जो एक चीज नहीं बदली है, वह उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था…जी हां हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य व्यवस्था की…स्वास्थ्य विभाग वह डिपार्टमेंट जिसके ऊपर सरकार की पहली प्राथमिकता रहती है और अरबों रुपए पानी की तरह बहाया जाता है पर जब जमीनी हकीकत टटोली जाती है तो हालात जस के तस बने हुए पाए जाते हैं।
खबर लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले की है जहां सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवाइयां लिखकर कमीशनखोरी का खेल जोरों पर है और यहां पर मौजूद डॉक्टर इसे अपनी मजबूरी बताते हैं। कहते हैं कि अगर मरीजों को ठीक होना है तो बाहर की दवाइयां लेनी पड़ेगी।
सरकारी डॉक्टरों द्वारा बाहर से दवाइयां लिखने के खेल की जानकारी जब UPCM NEWS को हुयी तो इसकी पड़ताल करने हम जा पहुंचे बाराबंकी के सिद्धौर ब्लाक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में। यहां पर जाकर हमने पाया कि अस्पताल में काफी अव्यवस्थाये थी और अस्पताल के गेट पर ही हमारी मुलाकात एक मरीज महाराजदीन रावत से हुई। हमने उससे पूछा कि क्या कोई समस्या है तो वह गरीब अपना दुखड़ा रोने लगा कहा कि अंदर से दवाइयां मिलती ही नहीं है। उसने डॉक्टरों की के ऊपर कमीशनखोरी का इल्जाम लगाते हुए कहा कि एक भी दवाइयां अंदर से नहीं दी जाती है। सारी दवाईयां बाहर से लिखी जाती है और साथ ही साथ हमें बाहर की दवाइयों का लिखा हुआ परचा भी दिखाया।
अस्पताल की सही स्थिति जानने के लिए हम और अंदर गए तो हमने पाया कि डॉक्टर हसीब मरीजों को धड़ल्ले से बाहर की दवाइयों का पर्चा लिख रहे थे कुछ देर तो हम खड़े होकर यह सारा खेल अपनी आंखों से देखते रहे। लगभग हमारे सामने ही डॉ. हसीब ने जितने भी मरीज देखे सबको बाहर की दवाइयां ही लिखी। लगभग 8 से 10 मरीजों को डॉक्टर हसीब ने हमारे सामने ही देख डाले और सभी को बाहर की दवाइयां प्रेसक्राइब्ड करी। यह सारा काम देखकर हमने अपना कैमरा ऑन किया और ऑन कैमरा ही डॉक्टर हसीब ने एक और पर्चा बाहर का लिख डाला जब डॉक्टर साहब पर्चा लिख चुके थे तब हमने उनसे सवाल जवाब करना शुरू किया।
हमने उनसे पूछा क्या बाहर की दवाइयां लिखना अलाउड है?
इस पर डॉक्टर साहब ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि अगर मरीजों को ठीक होना है तो बाहर की दवाइयां ही लेनी पड़ेगी, अंदर दवाइयां है ही नहीं। साथ ही साथ उन्होंने दवाइयों की उपलब्धता पर सरकार पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया। डॉक्टर हसीब ने अपने बचाव में कहा कि मेट्रोजिल सरीखी की पेट की दवाइयां तक अस्पताल में नहीं हैं।
हकीकत जानकर रह जायेंगे हैरान…
शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि बाराबंकी में ऐसे डॉक्टर पर कौन मेहरबान रहता है? इन डॉक्टर पर बाहर का कोई नही बल्कि बाराबंकी CMO का संरक्षण है। CMO साहब को शिकायत मिलती रहती है लेकिन उनके ढीले रवैये के चलते जनपद बाराबंकी में डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवाएं धडल्ले लिखी जा रही हैं और CMO साहब अपने ही जिलों के डॉक्टर से अनजान बने हैं।
बाराबंकी जनपद में यह कमीशनखोरी का खेल सालों से चलता आ रहा है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में ना ही कोई अपने हक की आवाज उठा पाता है और ना ही इन डॉक्टरों से कोई अंदर की दवाइयां लिखने के लिए कह पाता है। आखिर गरीब बेचारा क्या करें वह दो वक्त की रोटी कमाने के लिए जद्दोजहद करें या डॉक्टर से अंदर की दवाई लिखने के लिए बहस करें।
आपको बता दें कि बाराबंकी CMO से जब भी कोई सवाल करने उनके कार्यालय पहुंचते हैं तो उनका ढीला रवैया रहता है और मीडिया से भागते नजर आते हैं।
क्या कहते हैं CMO बाराबंकी?
जब इस मामले में बाराबंकी CMO से फ़ोन के माध्यम से बात की गयी तो उनका कहना था कि अस्पताल में दवाएं जरुर होंगी। जब उनको बताया की आपका डॉक्टर खुद सरकार को दोषी ठहराते हुए कह रहा कि सरकार दवाएं भेजती ही नहीं है तो लिखेंगे कैसे? इस पर CMO साहब ने कहा की मैं जानकारी करता हूँ। अब सवाल है कि जिले के CMO को hi जानकारी नही है उसके जिले में चिकित्सालयों में क्या हो रहा हैं? अब देखना दिलचस्प होगा कि हर बार की तरह बार भी CMO साहब मामले को कैसे निपटाते हैं?
ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था कब बदलेगी, कब गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाओं का पूर्ण लाभ मिल पाएगा या ऐसे ही कमीशनखोर डॉक्टर अपनी रणनीति चलाकर अपनी जेब भरते रहेंगे और इन गरीब की जेब पर डाका डालते रहेंगे?
अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य मंत्री ऐसे डॉक्टर पर क्या कार्यवाई करेंगे जो खुलेआम मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे हैं? या फिर मंत्री जी भी बाराबंकी CMO की तरह इस समस्या पर ढीला डाल देंगे?
वीडियो में पूरी रिपोर्ट देखें और जाने स्वास्थ्य विभाग की हकीकत…








