UPCM ने ‘केदारनाथ आपदा की सच्ची कहानियां’ के भोजपुरी अनुवाद का विमोचन किया

उत्तर प्रदेश।
UPCM ने शास्त्री भवन में उत्तराखण्ड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद डाॅ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की पुस्तक ‘केदारनाथ आपदा की सच्ची कहानियां’ के भोजपुरी अनुवाद का विमोचन किया। यह पुस्तक वर्ष 2013 में उत्तराखण्ड के केदारनाथ धाम में आयी आपदा की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। पुस्तक का भोजपुरी अनुवाद प्रो. ए.एन. वर्मा द्वारा किया गया है।

UPCM द्वारा इस अवसर पर डाॅ. निशंक को ‘साहित्य गौरव’ सम्मान से विभूषित किया। डाॅ. निशंक को यह सम्मान मुक्ति मिशन, वाराणसी द्वारा प्रदान किया गया है।

UPCM डाॅ. निशंक को ‘साहित्य गौरव’ सम्मान से विभूषित करते हुए
UPCM डाॅ. निशंक को ‘साहित्य गौरव’ सम्मान से विभूषित करते हुए

UPCM ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि केदारनाथ की त्रासदी ने यह दिखाया कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने पर उसका रौद्र रूप भी देखना पड़ सकता है। इस घटना से मानव को प्रकृति के साथ तादात्म्य बना कर रखने की सीख लेनी चाहिए। केदारनाथ की घटना पर आधारित सच्ची कहानियों की रचनात्मक प्रस्तुति के लिए डाॅ. निशंक की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केदारनाथ और भोजपुरी से सम्बन्धित है। केदारनाथ धाम मेरी जन्मभूमि से तथा भोजपुरी भाषा मेरी कर्मभूमि से जुड़ी हुई है। यह पुस्तक मेरी जन्मभूमि और कर्मभूमि को जोड़ती है।

UPCM ने कहा कि लेखन व्यक्ति की रचनात्मकता को प्रदर्शित करता है। लेखन से व्यक्ति की रचनाधर्मिता सामने आती है। इस मामले में डाॅ. निशंक अत्यन्त समृद्ध हैं। अपनी व्यस्तता के बावजूद वे साहित्य साधना हेतु समय निकाल लेते हैं, जो उनकी रचनात्मक ऊर्जा को दिखाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि डाॅ. निशंक की यह कृति भावी पीढ़ी को अपनी धरोहर को जानने-समझने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगी।

UPCM को केदारनाथ धाम में आयी आपदा की सच्ची घटनाओं पर आधारित पुस्तक भेंट करते हुए
UPCM को केदारनाथ धाम में आयी आपदा की सच्ची घटनाओं पर आधारित पुस्तक भेंट करते हुए

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि यह पुस्तक केदारनाथ में उनकी आँखों-देखी ऐसी घटनाओं पर आधारित है, जिन्होंने उन्हें लम्बे समय तक विचलित रखा। उन्होंने कहा कि केदारनाथ की यात्रा के दौरान उन्होंने लोगों के अनेक रूप देखे। ऐसी अनेक घटनाएं देखी, जब अपनो को खो चुके लोग दूसरों को बचाने के लिए अपने प्राण दांव पर लगा रहे थे। पुस्तक में आपदा की स्थिति में मानव व्यवहार में होने वाले सकारात्मक बदलाव से सम्बन्धित प्रेरणादायी कहानियां हैं।

इस अवसर पर सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह, सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, प्रहलाद पटेल और अन्य लोग उपस्थित रहे।

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