छुट्टा गोवंश के रख रखाव हेतु 2 अरब 75 करोड़ रूपये की धनराशि स्वीकृत: सुधीर गर्ग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के निराश्रित/बेसहारा गोवंश का निरन्तर संरक्षण व सवंर्धन किया जा रहा है। पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने बताया कि प्रदेश के अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना, संचालन व संरक्षित गोवंश के भरण-पोषण हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 अरब 75 करोड़ रूपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। आवंटित धनराशि का उपयोग अधिकतम रू0 30 (रूपये तीस मात्र) प्रतिदिन प्रति गोवंश की दर से किया जायेगा। गोवंश की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और प्रदेश के निराश्रित/बेसहारा गोवंश के निरन्तर संरक्षण के साथ-साथ ही मुख्यमंत्री सहभागिता योजनान्तर्गत गोवंश को गो-पालन हेतु इच्छुक पशुपालकों की सुपुर्दगी में देकर लाभान्वित भी किया जा रहा है।

पशुधन विभाग द्वारा इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। शासनादेश में कहा गया है कि स्वीकृत की जा रही धनराशि के सापेक्ष निदेशक, प्रशासन एवं विकास, पशुपालन विभाग द्वारा सम्प्रति मात्र रू0 10000 लाख (रूपये एक अरब मात्र) की धनराशि ही आहरित की जायेगी। अवशेष धनराशि के आहरण से पूर्व शासन का अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा। आहरित धनराशि के उपयोग में मा0 मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के अन्तर्गत संरक्षित गोवंश के भरण-पोषण को प्राथमिकता प्रदान की जायेगी। निदेशक, प्रशासन एवं विकास, पशुपालन विभाग पशुओं की संख्या की पुष्टि एवं क्रय के नियमानुसार न्यूनतम आवश्यकता एवं दर के प्रति स्व-स्तर पर आश्वस्त होने के उपरान्त धनराशि निर्गत करना सुनिश्चित करेंगे।

शासनादेश में कहा गया है कि धनराशि के आहरण एवं व्यय के दौरान निदेशक, प्रशासन एवं विकास, पशुपालन विभाग यह अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जायेगा कि गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित/सत्यापित गोवंश के भरण-पोषण हेतु धनराशि व्यय हो, इससे इतर व्यय किया जाना वित्तीय नियमों का उल्लंघन एवं धनराशि का अपव्यय होगा। इसके लिए निदेशक, प्रशासन एवं विकास, पशुपालन विभाग पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, जिला पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं एवं नगर निगमों में अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना व संचालन कार्य किया जा रहा है। इसके तहत समस्त जिलों में निराश्रित व बेसहारा गोवंश को गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित कर उनकी सुरक्षा हेतु शेड का निर्माण कराया गया है। साथ ही सुरक्षा, चारे की व्यवस्था, प्रकाश, पशु चिकित्सा व हरा चारा उत्पादन जैसे आदि कार्य कराये जा रहे हैं।

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