मुख्य सचिव ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक की

लखनऊ
मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के कार्यों की गहन समीक्षा की गई। 

अपने सम्बोधन में मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि विभाग को और अधिक जन उपयोगी बनाने के लिए इसे उपभोक्ता समूहों से भी जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए अन्य राज्यों में अपनाये जा रहे अच्छे प्रयोगों को यहां पर भी लागू कराया जाये। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जनसामान्य के हित के लिए किये जा रहे कार्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाये। इसके अलावा नगरीय क्षेत्रों में क्लीन स्ट्रीट फूड हब बनाये जाने तथा इसके लिए वेन्डिंग जोन निर्धारित किये जाने हेतु नगर विकास विभाग से समन्वय कर आवश्यक कार्यवाही की जाये।

उन्होंने कहा कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा प्रचलित आहार वितरण, बेसिक शिक्षा विभाग की मध्यान्ह भोजन योजना तथा खाद्य एवं रसद विभाग की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में केवल फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों का वितरण सुनिश्चित कराया जाये। उन्होंने कहा कि अनुपयोगी खाद्य तेल से बायोडीजल उत्पादन को बढ़ावा दिया जाये तथा इसके लिए खाद्य कारोबारियों को प्रेषित करने हेत कार्यशालाओं का आयोजन किया जाये। उन्होंने बायोडीजल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए खाद्य कारोबारियों का इंडस्ट्री से लिंकेज कराने पर बल दिया। 

बैठक का संचालन करते हुए प्रमुख सचिव खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अनिता सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा सुरक्षित एवं मानक के अनरूप खाद्य पदार्थों तथा गुणवत्ता परक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के दृष्टिगत असुरक्षित एवं अधोमानक खाद्य पदार्थों तथा नकली व अधोमानक खाद्यों के रोकथाम के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाती है। विभाग का कार्य नियामक एवं प्रवर्तन प्रकृति का है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सक्रिय खाद्य लाइसेन्स 68667 तथा सक्रिय खाद्य पंजीकरण 5,35,757 है। विभागीय कार्यों को निष्पादन के लिए 19 सहायक आयुक्त खाद्य, 72 अभिहित अधिकारी, 75 मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी तथा 575 खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यरत हैं। लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, आगरा, गोरखपुर एवं झांसी में उ0प्र0 जन विश्लेषक प्रयोगशालाएं क्रियाशील है।

इसके अतिरिक्त खाद्य कारोबार कर्ताओं का पंजीकरण एवं अनुज्ञप्ति की सम्पूर्ण व्यवस्था पूर्णतः आनलाइन है तथा वेबसाइट FOSCOS.FSSAI.GOV.IN से पंजीकरण एवं लाइसेन्स जारी किये जाते हैं। रुपये 12 लाख प्रतिवर्ष तक का कारोबार करने वाले व्यापारी पंजीकरण की श्रेणी में एवं इससे अधिक का कारोबार करने वाले व्यापारी लाइसेन्स श्रेणी में आते हैं। प्रवर्तन कार्यवाही के अन्तर्गत खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जाता है तथा संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने जांच हेतु संग्रहित कर प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। प्रयोगशाला में जांच परिणाम प्राप्त होने के उपरान्त जांच परिणाम के अनुसार विधिक कार्यवाही की जाती है। वित्तीय वर्ष, 2020-21 में 1,69,050 निरीक्षण व 19684 छापे डालकर 24277 नमूने संग्रहित किये गये तथा 29 करोड़ 14 लाख 10 हजार 03 सौ रुपये जुर्माना अधिरोपित किया गया। अर्थदण्ड जमा न करने वाले खाद्य कारोबारकर्ताओं के विरूद्ध 3497 वसूली आदेश जारी कर 3,48,18,550/- की वसूली की गई। इसके अतिरिक्त न्यायिक न्यायालयों द्वारा 21 मामलों में कारावास तथा 4,83,500/- जुर्माना अधिरोपित किया गया। 

अनुपयोगी खाद्य तेल से बायोडीजल उत्पादन करने को प्रोत्साहित करने के लिए मण्डल स्तर पर 06 कार्यशालाएं आयोजित की गई। विभाग द्वारा खाद्य कारोबार कर्ताओं को प्रेरित करते हुए 236 प्रतिष्ठानों द्वारा लगभग 1662 ली0 प्रतिदिन अनुपयोगी तेल बायोडीजल का उत्पादन करने वाली कम्पनियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी हितधारकों को टेबलेट उपलब्ध कराने की कार्यवाही प्रचलित है। एफएसएसएआई द्वारा 580 टेबलेट क्रय करने के लिए रुपये 116 लाख की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। 

खाद्य पदार्थों के फोर्टिफिकेशन के सम्बन्ध में बताया गया कि नमक, खाद्य तेल एवं वनस्पति, दूध, चावल तथा आटा में फोर्टिफिकेशन की कार्यवाही की जाती है। प्रदेश में 203 तेल उत्पादन इकाईयों में से 104 इकाईयों द्वारा 37357 मी. टन प्रति माह फोर्टिफाइड तेल का उत्पादन किया जा रहा है। दूध में 75 पैक्ड दूध उत्पादन इकाईयों में से 26 इकाईयों द्वारा लगभग 36389 मी.टन प्रतिमाह फोर्टिफाइड दूध का उत्पादन किया जाता है। 

प्रयोगशाला उच्चीकरण हेतु 1134 लाख रुपये स्वीकृत किये गये हैं, उपकरण क्रय किये जाने की प्रक्रिया प्रचलित है। माइक्रोबायोलाॅजी प्रयोशालाओं की स्थापना हेतु 100 लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। प्रदेश को 06 मोबाइल प्रयोगशाला फूड सेफ्टी आन व्हील्स उपलब्ध कराई गई है जोकि सभी जनपदों का भ्रमण करते हुए 12089 नमूनों की जांच की, 629 जागरूकता शिविर व 240 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये। इसके अतिरिक्त फाॅस्टेक योजना के अंतर्गत 197 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 8010 खाद्य कारोबार कर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है। जन जागरूकता कार्यक्रम के अन्तर्गत विभाग द्वारा 4936 कैम्प के माध्यम से 107828 खाद्य कारोबार कर्ताओं व 338 विद्यालयों के 26981 विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। हाइजीन रेटिंग योजना के अन्तर्गत नामित एजेन्सियों द्वारा 81 प्रतिष्ठानों की हाइजीन रेटिंग की जा चुकी है। 

बैठक में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण, वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे। 

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