UPCM ने गोरखपुर में 'समावर्तन संस्कार समारोह' का उद्घाटन किया
गोरखपुर (10 फरवरी, 2019)। UPCM ने जनपद गोरखपुर के महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय जंगल धूसड़ में आयोजित समावर्तन संस्कार समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने 4 पुस्तकों वार्षिक पत्रिका समावर्धन, लोक भाषा संवर्धन, नाथ पंथ का योगदान, आधुनिकता से उत्तर आधुनिकता और राणा कालीन नेपाल का इतिहास का विमोचन किया और विभिन्न प्रकल्पों जैसे सिलाई कढ़ाई, कंप्यूटर में निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र/पुरस्कार वितरित किए।
UPCM ने छात्र-छात्राओं को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में परिश्रम एवं पुरुषार्थ का कोई विकल्प नहीं होता है। महाविद्यालय से जो अच्छे गुण आपने सीखे हैं, उसे अंगीकृत करते हुए अपने जीवन को उन्नति की ओर आगे बढ़ायें। उन्होंने कहा कि सुख-दुःख, लाभ-हानि की चिंता किये बगैर जब व्यक्ति जीवन संघर्ष में आगे बढ़ता है तो उसे निश्चित रूप से सफलता मिलती है। जीवन में सरलता का रास्ता अपनाकर हासिल की जाने वाली सफलता लम्बी दूरी/समय तक काम नहीं दे पाती है, तात्कालिक सफलता का सुख तो मिलता है, लेकिन वह सुख यशस्वी नहीं बना पायेगा। हम सभी को जीवन में परिश्रम एवं पुरुषार्थ को समझना होगा।
UPCM ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने की नहीं, बल्कि सर्वांगीण विकास का माध्यम बने, इस दिशा में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद कार्य कर रही है। आजादी के बाद से 2017 तक अर्थात 70 वर्षों में पूर्वी उत्तर प्रदेश की अधिकांश आबादी में वोटिंग का अधिकार नहीं था और वे लोग खानाबदोश की ज़िन्दगी जी रहे थे। यहां के 54 वनटांगियां गांव हैं, जिन्हें कोई शासकीय लाभ नहीं मिल रहा था। उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु वनटांगिया गांव को राजस्व गांव का दर्जा भी प्रदेश सरकार द्वारा दिया गया है और उन्हें शासकीय सुविधा मिलनी प्रारम्भ हो गयी है। ग्रामीण स्वावलम्बन के लिए यह महाविद्यालय गांव एवं शहर का संगम स्थल है। यहां शिक्षा के साथ-साथ अन्य प्रशिक्षण एवं रचनात्मक गतिविधियों का केन्द्र स्थापित है।
UPCM ने कहा कि शिक्षा कर्तव्यों के साथ संवेदनाओं को जोड़ने की प्रेरणा देती है। मनुष्य में संवेदना का होना आवश्यक है अन्यथा वह पशु के समान होता है। डिग्री केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता से मजबूत होनी चाहिए।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का मूल आधार हमारी संस्कृति होनी चाहिए ताकि राष्ट्र मजबूती से बढ़े। हमें अपने संस्कारों को सर्वदा याद रखना तथा उनका अनुपालन करना चाहिए। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद इस दिशा में निरन्तर कार्य कर रहा है।वर्तमान में इस शिक्षण संस्थान की 42 शाखाएं हैं, जिसमें लगभग 25 हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षा में आमूल परिवर्तन लाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं प्रदेश सरकार विकास की ओर निरन्तर अग्रसर है। केन्द्र सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में 22 एम्स बनकर तैयार हैं और 13 एम्स, जिसमें गोरखपुर भी शामिल है, खुलने की कगार पर हैं। 13 नये मेडिकल काॅलेज भी दिये गये हैं। हम अपने संस्कारों को पहचानते हुए आगे बढ़ें ताकि देश मजबूत हो एवं शिक्षा की गुणवत्ता बढ़े।
विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व कुलपति एवं अध्यक्ष प्रबंध समिति प्रो. उदय प्रताप सिंह ने समावर्तन उपदेश एवं संकल्प दिलाया। प्राचार्य डाॅ. प्रदीप कुमार राव ने अतिथियों का स्वागत आभार एवं प्रस्ताविकी प्रस्तुत किया। संचालन सुबोध कुमार मिश्र द्वारा किया गया।
इस अवसर पर अभिभावक संघ अध्यक्ष विपिन कुमार यादव और पुरातन छात्र परिषद अध्यक्ष दीपेन्द्र प्रताप सिंह एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।