UPCM और राज्यपाल ने वाराणसी में ‘गीत रामायण’ को सम्बोधित किया

वाराणसी (10 जनवरी, 2019)।
UPCM NEWS, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने जनपद वाराणसी में आयोजित कविश्रेष्ठ स्व. ग.दी. माद्गुलकर एवं गायक स्वर्गीय सुधीर फड़के की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित ‘गीत रामायण’ मराठी के दो दिवसीय कार्यक्रम में लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने कविश्रेष्ठ स्व. ग.दी. माद्गुलकर को आधुनिक बाल्मीकि बताते हुए कहा कि यह संयोग है कि इस धरती पर रामायण की रचना की गई, उसी काशी में इन महान विभूतियों की जन्मशती मनाई जा रही है।
राज्यपाल ने कहा कि स्व. ग.दी. माद्गुलकर गीत रामायण को लिखते थे और गायक स्वर्गीय सुधीर फड़के इसको गाते रहे। उन्होंने महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान ज्यादातर समय महाराष्ट्र के नासिक में स्थित त्रयम्बकेश्वर में व्यतीत किया था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्थापना दिवस गत 68 वर्षों से नहीं मनाया जाता था, लेकिन उनकी प्रेरणा से 2018 में प्रदेश सरकार ने प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया। उन्होंने कहा कि आगामी 24 जनवरी को पुणे में उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।
UPCM ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की परम्परा भक्ति की भी है और शक्ति की भी। जब कभी भी देश संक्रमण काल से गुजरा है, तो महाराष्ट्र से इसे एक नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का नाम जिसने भी जिस रूप में भी जपा उसका उद्धार हो गया।

UPCM ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 68 वर्षों तक उत्तर प्रदेश की स्थापना दिवस नहीं मनाया गया था, किन्तु राज्यपाल जी की प्रेरणा से 2018 में उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस प्रदेश सरकार द्वारा मनाया गया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस की रचना काशी में हुई। तुलसीदास इसे संस्कृत में लिखना चाहते थे। लेकिन हनुमान जी की प्रेरणा से उन्होंने इसे लोक भाषा अवधी में लिखने का कार्य किया। श्रीराम की गाथा को देश-दुनिया में पहुंचाने का श्रेय महर्षि बाल्मीकि को जाता है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति सदाचार और नैतिक मूल्यों से बंधा रहे, तो अराजकता एवं अव्यवस्था पैदा हो ही नहीं सकती। ‘गीत रामायण’ ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। महर्षि वाल्मीकि ने वैदिक परम्परा को लौकिक रूप दिया। लोक भाषा का सशक्त माध्यम रामायण है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बदली हुई काशी का गुणगान करते हुए UPCM को इसके लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि वे गत 5 वर्षों बाद काशी आए हैं और बदली हुई काशी को देख कर अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों के अन्तराल पर काशी आने वाले यहां के विकास को देखकर विस्मित हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जैसे बहुत पहले लोग एक बार काशी आने की इच्छा जताते थे। वह दिन दूर नहीं जब लोग पुनः काशी आने की इच्छा जताएंगे। उन्होंने कहा कि ‘गीत रामायण’ ऐसी धरोहर है जिसमें रामायण की सारी रचना गीत के रूप में मिलती है। उन्होंने बताया कि 5 दशकों से ज्यादा समय से मराठी मन पर ‘गीत रामायण’ ने राज किया है।
प्रदेश के सूचना राज्य मंत्री डाॅ. नीलकंठ तिवारी ने वाराणसी में ‘गीत रामायण’ के आयोजन के लिए राज्यपाल , UPCM एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सांसद डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने भी सम्बोधित किया।
इससे पूर्व, राज्यपाल, UPCM, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और सूचना राज्यमंत्री ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर ‘गीत रामायण’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर UPCM ने श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भी निरीक्षण कर अधिकारियों को प्रस्तावित कार्यों को युद्धस्तर पर अभियान चलाकर पूरा कराए जाने के निर्देश दिए।








