UPCM ने बलरामपुर चिकित्सालय के 150वें स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित किया

लखनऊ (04 फरवरी, 2019)।
UPCM ने कहा कि चिकित्सीय सेवा का प्राण संवेदना है। रोग के उपचार में दवा के साथ-साथ रोगी के साथ चिकित्सक के व्यवहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। चिकित्सक का रोगी के साथ सहानुभूतिपूर्ण एवं संवेदनशील व्यवहार उसके शीघ्र उपचार में सहायक होता है। बीमार के साथ डाॅक्टर का व्यवहार जितना संवेदनशील रहेगा, ठीक हो जाने के उपरान्त उसे उतनी ही दुआ मिलेगी।
UPCM ने बलरामपुर चिकित्सालय के 150वें स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि बलरामपुर अस्पताल की स्थापना वर्ष 1869 में हुई थी। बलरामपुर के महाराजा भगवती प्रसाद सिंह ने इसका विस्तार कराया था। तीन चिकित्सकों से प्रारम्भ हुए बलरामपुर चिकित्सालय ने लम्बी यात्रा की है। यह चिकित्सालय प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं की रीढ़ माना जाता रहा है। वर्तमान में यहां अनेक चिकित्सकीय सुविधाएं एवं 94 चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ उपलब्ध हैं। यहां की ओ.पी.डी. में प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख मरीजों का इलाज होता है। इसमें से लगभग 10 लाख नये मरीज होते हैं।

UPCM ने कहा कि बलरामपुर अस्पताल की चिकित्सा के क्षेत्र में एक गौरवशाली परम्परा रही है। बिना किसी भेदभाव के इस परम्परा को आगे बढ़ा रहे चिकित्सकों और अन्य कार्मिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए UPCM ने कहा कि मानवता की सेवा से बड़ा कोई कार्य नहीं होता। उन्होंने कहा कि अतीत की परम्परा से गौरवान्वित होने के साथ ही वर्तमान की चुनौतियों को पहचानना भी आवश्यक है। इसके लिए संस्थान में उपलब्ध चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं और उनकी गुणवत्ता को बढ़ाया जाना भी आवश्यक है। इसके लिए आज यहां विभिन्न कार्याें का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया है।
UPCM ने कहा कि विगत लगभग 2 वर्षाें में प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अनेक कदम उठाये हैं। सत्ता में आने के पश्चात बहुत कम समय में वेंटिलेटर युक्त 150 लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस संचालित की गयी हैं। ‘108’ एम्बुलेंस सेवा को और प्रभावी बनाया गया है। संचारी रोग पखवाड़े के माध्यम से इंसेफ्लाइटिस सहित वेक्टरजनित रोगों को नियंत्रित किया गया है। मिशन इन्द्रधनुष के माध्यम से विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया है। जिला अस्पताल, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की सेवाओं को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। इन व्यवस्थाओं को संचालित करने के लिए संवेदनशील डाॅक्टर और स्टाफ चाहिए, जो पूरी सजगता और संवेदना के साथ कार्य कर सके।
समारोह को सम्बोधित करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि बलरामपुर अस्पताल समय के साथ सक्षम और प्रभावी होता गया है। विगत दो वर्षाें में इस चिकित्सालय में सकारात्मक बदलाव हुआ है। यहां पर डिजिटल एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउण्ड मशीन, डायलिसिस सेण्टर, आधुनिक डेण्टल केयर यूनिट, 24 घण्टे संचालित आधुनिक पैथोलाॅजी लैब स्थापित किये गये हैं। इस लैब में प्रतिमाह लगभग 9 लाख टेस्ट हो रहे हैं।

इस संस्थान में आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत मरीजों के इलाज का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अस्थि रोग से सम्बन्धित हिप रिप्लेसमेंट जैसी जटिल एवं महंगी सर्जरी भी आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क रूप से रोगियों को सुलभ करायी गयी है। प्रादेशिक चिकित्सा सेवाओं में इस तरह की जटिल अस्थि रोग सर्जरी की सुविधा सिर्फ इसी संस्थान में ही उपलब्ध है।
इससे पूर्व, UPCM ने बलरामपुर चिकित्सालय में स्थापित 16 स्लाइस सी0टी0 स्कैन मशीन, नवीन वृद्धजन वार्ड तथा नवनिर्मित आई.सी.यू. का लोकार्पण एवं नवीन एम.आर.आई. मशीन हेतु भवन का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने बलरामपुर चिकित्सालय के 150वें स्थापना दिवस पर प्रकाशित पत्रिका का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम के अन्त में, बलरामपुर चिकित्सालय के निदेशक डाॅ. राजीव लोचन ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रशान्त त्रिवेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं चिकित्सकगण उपस्थित रहे।








