लखनऊ नगर निगम लेखा और उद्यान में तैनात कर्मचारियों के लिए ट्रांसफर पालिसी हुई ढक्कन, इंजीनियरों का हुआ फेरबदल

झिल्लूराम का तबादला, आलोक श्रीवास्तव की “पहुंच” बताई जा रही वजह

लखनऊ। नगर निगम लखनऊ के अभियंत्रण विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। आठ में से छह जोनल अभियंताओं के जोन बदल दिए गए हैं। इनमें वे दो जोनल अभियंता भी शामिल हैं, जिन पर पिछले महीने नगर निगम सदन में कार्य में लापरवाही के आरोप लगे थे और उन्हें हटाने की मांग उठी थी। नगर आयुक्त ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

🔹 नगर निगम अभियंत्रण विभाग के मुख्य बदलाव

जोन दो के जोनल अभियंता पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान को अभियंत्रण विभाग के कार्य से हटा दिया गया है। अब वे केवल पर्यावरण विभाग और विद्यालय शाखा का कार्य देखेंगे।

  • सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लखनऊ नगर निगम में मुख्यालय में लम्बे समय से तैनात भ्रष्ट कर्मचारियों को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है जिसके कारण मुख्यमंत्री के आदेश और शासन की ट्रांसफर पालिसी कूड़े के ढक्कन में पड़ी है. 

सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ नगर निगम मुख्यालय में लेखा विभाग में तैनात कर्मचारी किशन, दीपक, राम बाबू, विनोद, शना जैदी और अन्य के साथ साथ उद्यान में तैनात जाकिर अली अपने जुगाड़ और भ्रष्टाचार के दम पर लगभग 6 वर्षों में यही जमे हुए हैं.  अब सवाल है कि क्या मुख्यालय में लम्बे समय से तैनात इन भ्रष्ट कर्मचारियों पर शासन की ट्रांसफर पालिसी लागू नहीं होती है या फिर नगर आयुक्त और महपौर की इनपर विशेष कृपा दृष्टि बनी हुई है. 

सूत्रों के अनुसार, उनकी खास दिलचस्पी हमेशा पर्यावरण अभियंता के काम में ही रही है, और वहीं वे वर्षों से “हरी-भरी जिम्मेदारियों” के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। कद में छोटे जरूर हैं, पर नगर निगम के गलियारों में उनकी ऊंचाई “प्रभावशाली” मानी जाती है।

वहीं सहायक अभियंता झिल्लूराम को जोन छह से हटाकर जोन दो का जोनल अभियंता बनाया गया है।

⚙ आलोक श्रीवास्तव की पहुंच ने किया असर

नगर निगम के भीतर यह चर्चा जोरों पर है कि झिल्लूराम का तबादला जोन छह में तैनात सहायक अभियंता आलोक श्रीवास्तव की पहुंच की वजह से हुआ है। बताया जाता है कि दोनों के बीच काफी समय से तनातनी चल रही थी।
आलोक श्रीवास्तव नगर निगम में पिछले करीब 20 वर्षों से जमे हुए हैं और पूर्व नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन के करीबी माने जाते थे
सूत्रों के अनुसार मजबूत पकड़ के चलते झिल्लूराम को जोन छह से हटवा दिया गया।

🤔 हालांकि अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस जोन-2 में झिल्लूराम को भेजा गया है, वहां के सहायक अभियंता भी आलोक श्रीवास्तव ही हैं।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वहां भी इसी तरह की “अंदरूनी राजनीति” दोहराई जाएगी या माहौल बदल पाएगा।
इसी के साथ यह चर्चा भी गर्म है कि लंबे समय से जोन 6 में जमे आलोक श्रीवास्तव का तबादला आखिर क्यों नहीं किया गया?
❓ सवाल यह भी है कि कौन है वह ताकतवर हाथ जो आलोक श्रीवास्तव को लगातार बचाए हुए है?

📋 अन्य तबादले भी किए गए

नजमी मुजफ्फर, जोन 5 से जोन 3 में

अशोक यादव, जोन 7 से जोन 6 में

संजय कुमार पांडेय, जोन 3 से जोन 7 में

राजीव कुमार शर्मा, जिन्हें कुछ समय पहले विवाद के कारण जोन 5 से हटाया गया था, अब फिर से जोन 5 का जोनल अभियंता बनाया गया है। शर्मा अब तक जोन 4 में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत थे।

🧩 राजनीतिक समीकरणों में माहिर माने जाते हैं राजीव शर्मा

नगर निगम सूत्रों के अनुसार राजीव कुमार शर्मा की वापसी को कई लोग “राजनीतिक संतुलन का परिणाम” बता रहे हैं।
बताया जाता है कि शर्मा बरेली के महापौर के बेहद करीबी हैं और लखनऊ की महापौर का भी आशीर्वाद उन्हें प्राप्त है।
ऐसे में उनका दोबारा उसी जोन में लौटना न केवल अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर रहा है।

🏗 अतुल मिश्रा ने भी नहीं छोड़ा लखनऊ

नगर निगम के अधिशासी अभियंता अतुल मिश्रा का भी तबादला कुछ समय पहले अयोध्या नगर निगम में किया गया था, लेकिन सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपनी ऊंची पहुंच के चलते अब तक लखनऊ नहीं छोड़ा है।
लंबे समय से जोन 4 में कार्यरत अतुल मिश्रा के बारे में कहा जा रहा है कि वे सीएम ग्रिड की मलाई पूरी तरह खाने के बाद ही राजधानी छोड़ने का विचार कर रहे हैं।
🏢 नगर निगम के गलियारों में इस पर खूब चर्चाएं हो रही हैं।

⚠ जमे हुए जूनियर इंजीनियर अधिकारी नहीं हिल रहे

नगर निगम में कई ऐसे इंजीनियर भी हैं जिनका महीनों पहले तबादला हुआ, लेकिन वे अब तक नई तैनाती स्थल पर नहीं पहुंचे हैं।
इनमें शामिल हैं —

प्रतिमा यादव (जोन 1)

उमेश पाल (जोन 2)

नीतू वर्मा (जोन 3)

सनी विश्वकर्मा (जोन 4)

राजेंद्र कुमार (जोन 8) — जिनका चार महीने पहले ही ट्रांसफर हुआ था, लेकिन उन्होंने अब तक कार्यभार नहीं संभाला है।

📍 नगर निगम के भीतर इस फेरबदल को “अंदरूनी राजनीति, पहुंच और समीकरणों का नतीजा” माना जा रहा है।
अब देखना यह है कि यह बदलाव सफाई और अभियंत्रण व्यवस्था में सुधार लाता है या सिर्फ 🪑 “कुर्सियों का अदला-बदली खेल” बनकर रह जाएगा।

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