नगर निगम के बाद #LDA का नम्बर, जमकर होगा भ्रष्टाचार, रोक सको तो रोक लो

मुख्यमंत्री के निर्देश एलडीए उपाध्यक्ष के आगे नतमस्तक
नगर निगम की जमीन पर बसी अनियोजित कालोनी में क्यों हो रहा अवैध निर्माण
सपनो का घर बना चर्चा का विषय
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार कागजों और आदेश देने के बाद बिल्कुल खत्म सा हो गया है। इसी कड़ी में अगर नगर लखनऊ में अवैध निर्माण की बात की जाए तो बिल्कुल शून्य मात्रा में अवैध निर्माण है ये बात केवल कागजों पर है। हकीकत में वही अवैध निर्माण का ध्वस्तीकरण होता हैं जिनपर लखनऊ विकास प्राधिकरण की महर हो।
यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने राजधानी में आयोजित हुए अर्बन कांक्लेव में सख्ती के साथ ये संदेश दिया था कि अगर आर्थिक तौर पर उत्तर प्रदेश को मजबूत करना है तो शहरों को सुव्यवस्थित ढंग से विकसित करना होगा और हर हाल में अनियोजित कालोनियों व अवैध निर्माणों को रोकना होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इन बातों का फर्क शायद कुछ अफसरानों पर नही पड़ता, जिसमें से एक है वर्तमान एलडीए उपाध्यक्ष। जिनके सपनो का महल बनने की चर्चा आजकल राजधानी में जोरो पर है।
सृजन विहार कालोनी जो #LDA के गोमती नगर स्थित दफ्तर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर है, सूत्रो की माने तो उसमे एलडीए उपाध्यक्ष इंद्रमणी त्रिपाठी का 7 हजार वर्ग फीट से भी ज्यादा बड़े भूखंड में अलीशान घर बन रहा है। ये कॉलोनी पूरी तरह से अवैध है इसका ले आउट भी लखनऊ विकास प्राधिकरण से पास नहीं है। जानकार ये भी बताते है कि ये कालोनी नगर निगम की जमीन पर बनी है। सवाल ये उठता है की जब एलडीए उपाध्यक्ष ही अनियोजित कालोनी में अपना घर बनवा रहे है तो शहर भर के अवैध निर्माण कैसे रुकेंगे?
राजधानी लखनऊ में लगातार अवैध निर्माण और अनियोजित कालोनियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है. लखनऊ विकास प्राधिकरण अवैध निर्माण और अनियोजित कॉलोनियों को बसने से नहीं रोक पा रहा है. जिसका कारण उच्च पदों पर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों का होना है। आखिर एलडीए कैसे अवैध निर्माणों और अनियोजित कालोनियों पर रोकथाम लगा पाएगा? जब एलडीए उपाध्यक्ष इंद्रमणि त्रिपाठी का घर खुद ही एक अनियोजित कॉलोनी सृजन विहार में बन रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के बाद जब मौके पर सृजन विहार कॉलोनी में जाकर देखा गया तो प्लाट नंबर 97 और 98 को मिलाकर करोड़ों की लागत से एक अलीशान का घर बन रहा है। आसपास के लोगों और गार्ड से जब इस बात की गई कि क्या यह घर एलडीए उपाध्यक्ष इंद्रमणि त्रिपाठी का है तो उन्होंने भी इस पर बात हामी भरी। अब सवाल यह उठता है कि अगर एलडीए के उपाध्यक्ष ही अनियोजित कालोनी में घर बनवा रहे है तो किस मुंह से प्राधिकरण शहर में हो रहे अवैध निर्माणों को रोकेगा?
क्या होगी जांच ?
जानकारों के मुताबिक सृजन विहार कॉलोनी नगर निगम की सरकारी जमीन पर बसी है और पूरी तरीके से अवैध है। इस कालोनी का ले आउट भी प्राधिकरण से नही स्वीकृत है। सृजन विहार कालोनी में प्लॉट की कीमत 12 से 15 हजार रुपए वर्ग फीट है उस हिसाब से जिस प्लॉट में एलडीए उपाध्यक्ष के घर बनने की चर्चा है उसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपए है। सृजन विहार कालोनी के एक तरफ अंबेडकर पार्क और दूसरी तरफ ये सहारा सिटी से सटी हुई है। अब सवाल ये उठता है की अगर इस कालोनी में कोई सरकारी अधिकारी 7 हजार वर्गफीट का प्लाट लेकर करोड़ों की लागत से घर बनवा रहा है तो आखिर उसके पास इतना अकूत पैसा आया कहा से। सूत्र बताते है की इंद्रमणि त्रिपाठी के इस शीशमहल को लखनऊ के जाने माने बिल्डर पांडे बंधु बनवा रहे है ।
आपको बता दें कि पहले भी लखनऊ नगर निगम में नगर आयुक्त के पद पर रहते हुुुए इंद्रमणि त्रिपाठी के ऊपर लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे जिसके बाद इन्हें नगर आयुक्त की कुर्सी से हटा दिया गया था। महापौर ने इनके खिलाफ शासन को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। जांच भी चल रही है लेकिन ठंडे बस्ते में और साहब फिर एक बार एलडीए उपाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठ गए। सरकार को इस मामले पर संज्ञान लेकर इस सपनो के महल की जांच करानी चाहिए कि ये महल आखिर किसका बन रहा है। ताकि सच्चाई सामने आ सके और भ्रष्टाचारियों में खौफ बरकरार रहे जिससे जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वाले भ्रष्टाचारियों पर लगाम लग सके।
कुछ महीने पहले अपर सचिव पर भ्रष्टाचार का आरोप पत्र वायरल हुआ था जिसकी जांच कहने मात्र चल रही है लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डालकर पैक कर दिया गया है। सचिव पवन गंगवार के PA का मामला तूल पकड़ने पर तुरन्त कार्यवाही कर दी गयी क्योंकि मामला निचले स्तर का था। अब सवाल है कि क्या यूपी के मुखिया इन भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ में कमान देंगे तो बंटाधार होना तय है।








