एसीएस, डीजीपी के सीडीआर के संरक्षण की जरुरत नहीं: कोर्ट

एमपीएमएलए/एडीजे-19 कोर्ट लखनऊ ने अमिताभ ठाकुर पर युवती आत्मदाह मामले में दायर मुकदमे में एसीएस होम, डीजीपी आदि के कॉल डिटेल रिकार्ड्स (सीडीआर) संरक्षित किये जाने के आदेश देने से इंकार कर दिया है.

अमिताभ ने कोर्ट को दिए प्रार्थनापत्र में कहा था कि थाना हजरतगंज में उनके खिलाफ दर्ज मुक़दमा पूरी तरह झूठा और फर्जी है, जिसके संबंध में उनके पास तमाम मौखिक एवं अभिलेखीय साक्ष्य हैं. साथ ही कई ऐसे साक्ष्य हैं जो मात्र पुलिस के पास हैं या पुलिस द्वारा ही प्राप्त किये जा सकते हैं, जिनमे तत्कालीन एसीएस होम, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर लखनऊ आदि के सीडीआर शामिल हैं.

उन्होंने कहा था कि सीडीआर मात्र एक साल तक संरक्षित होता है, अतः यदि इस अवधि में इन्हें सुरक्षित करने के आदेश नहीं दिए गए तो ये हमेशा के लिए नष्ट हो जायेंगे.

अभियोजन पक्ष ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अमिताभ का प्रार्थनापत्र बलहीन है और उन्होंने केवल मामले को लंबित रखने के लिए यह आवेदनपत्र दिया है.

एडीजे हरबंस नारायण ने अपने आदेश में कहा कि अमिताभ द्वारा बताये गए सीडीआर इस मामले के लिए जरुरी साक्ष्य नहीं हैं क्योंकि आत्मदाह मामला 16 अगस्त 2021 हो चुका था और इस केस में इस तारीख से पहले की घटनाएँ ही महत्वपूर्ण हैं, जबकि अमिताभ द्वारा बताये जा रहे सीडीआर इसके बाद की अवधि के हैं.

अतः उन्होंने अमिताभ के प्रार्थनापत्र को बलहीन बताते हुए उसे ख़ारिज कर दिया.

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