UP_Dy_CM ने परिवहन विभाग द्वारा आयोजित उ.प्र. सड़क सुरक्षा कार्यशाला को संबोधित किया

उत्तर प्रदेश (18 दिसम्बर, 2018)।
UP_Dy_CM केशव प्रसाद मौर्य ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा कार्यशाला के प्रथम सत्र (रोड इंजीनियरिंग) को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि हम सभी संकल्प लें कि ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में पूरी पारदर्शिता हो, सभी वाहनों की ओवरलोडिंग पूर्णतः बन्द हो, बिना हेलमेट व सीटबेल्ट के कोई न चले और सभी सड़क सुरक्षा के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाएं, यातायात संकेतों, नियमों का पूर्णतः पालन करें, बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरुक करें, तो कैंसर की तरह फैल रही सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है।

परिवहन विभाग द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर UP_Dy_CM केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सड़क सुरक्षा पर प्रदेश स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में सर्वोच्च स्थान पाने वाले 10 बच्चों के घर तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़कें बनाई जाएंगी और इन सड़कों का उद्घाटन भी इन्हीं बच्चों से कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन सुरक्षित नहीं तो सब कुछ अधूरा है। सड़क दुघर्टना में मृत्यु पर पूरा परिवार तबाह हो जाता है। हमें भी सड़क सुरक्षा का संकल्प लेना चाहिए जैसे कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छ भारत एवं स्वस्थ भारत का संकल्प लिया और सभी ने उसे अपनाया। हम सभी आज संकल्प लें कि हमारा देश व प्रदेश सड़क दुघर्टना मुक्त बने। सड़क सुरक्षा में सभी लोगों की सहभागिता जरुरी है। यह कार्यशाला तभी सार्थक होगा जब प्रदेश में सड़क दुघर्टनाएं न हों। सड़क दुघर्टना बहुत बड़ी बीमारी है। चालक को जरुरी सुविधा, आराम, पूरी नींद और अच्छा भोजन मिले, तभी आपका परिवार सुरक्षित रहेगा।
कार्यशाला के प्रथम सत्र को सम्बोधित करते हुए परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि प्रदेश में चालक और लोगों की लापरवाही से सड़क दुघर्टनाएं बढ़ी हैं। सड़क दुर्घटना के लिए यातायात वाहनों और जनसंख्या में वृद्धि, सड़कों का अच्छी होना, वाहनों की तेज गति, सड़कों पर अतिक्रमण, यातायात नियमों का पालन न करना, चालकों की लापरवाही और उनकी अधूरी नींद, हमारा व्यवहार व प्रतिष्ठा तथा दूसरे से आगे निकलने की होड़ मुख्यतया जिम्मेदार है। वाहन मालिक को चालकों की चिन्ता करनी चाहिए। इसको रोकने के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग जरूरी है। अब तो सड़क सुरक्षा जागरूकता रैली को गांव-गांव, गली-गली तक पहुंचाना होगा। सभी लोग यातायात नियमों का पालन करें, सरकार सड़क सुरक्षा सुविधाओं को बढ़ा रही है।

कार्यशाला में उपस्थित अपर मुख्य सचिव सूचना, सी.ई.ओ. यूपीडा अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान सड़क सुरक्षा उपायों, इसकी डिजाइन और इंजीयरिंग पर विशेष ध्यान दिया जाय और शुरूआत में ही सड़कों को चैड़ा करने के साथ-साथ अतिक्रमण मुक्त रखा जाय। प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग नितिन रमेश गोकर्ण ने कहा कि सड़कों का रोड सेफ्टी आडिट किया जा रहा है। ब्लैक स्पाट को खत्म किया जा रहा है, जहां आवश्यक है, सड़कों में अण्डरपास व ओवरब्रिज भी बनाये जा रहे हैं।
प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला ने कहा कि दुनिया में 150 वर्षों के दौरान विज्ञान एवं तकनीकी अविष्कार में प्रगति हुई है। सड़क सुरक्षा पर भी नई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। वाहनों की गति बहुत बढ़ गई है, जिससे दुर्घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसे रोकने के लिए सड़क सुरक्षा के घटक विभाग लोक निर्माण, नगर विकास, पुलिस, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सूचना विभाग को मिलकर कार्ययोजना बनाकर कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि हमारे देश में 23 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं, वहीं चीन में 30 करोड़ और अमेरिका में 26 करोड़ हैं, लेकिन विकसित देशों के सापेक्ष हमारे देश में सड़क सुरक्षा पर ज्यादा खर्च नहीं किया जाता।
सड़क सुरक्षा कार्यशाला के प्रथम सत्र रोड इंजीनियरिंग में के. रवीन्द्र, डॉ. आर. श्रीनिवास, एच.एम. नकवी ने भी अपना-अपना प्रजेन्टेशन दिया। उन्होंने कहा कि भारत में सड़क दुर्घटना में उत्तर प्रदेश की मृत्युदर सर्वाधिक है, इसके बाद तमिलनाडु, महाराष्ट्र व कर्नाटक आते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक इंजीनियरिंग में यू.के. ने रोड सेफ्टी आडिट को विकसित कर अपने यहां सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या में काफी कमी लाया है। 45 वर्ष के बाद चालक का नियमित चेक अप होना चाहिए। सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानको के सम्पूर्ण प्राविधान का पालन होना चाहिए।
कार्यशाला के चौथे सत्र (प्रवर्तन) को आबकारी एवं मद्य निषेध मंत्री जय प्रताप सिंह ने सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में नैतिक मदिरा पान को छूट दी गयी है। शराब पीकर लोग सड़कों पर न निकलें, घरों में ही रहें। शराब पीकर लोग रात में गाड़ी न चलायें। नवयुवक मदिरा पान न करें। बारहवीं तक के स्कूलों में जनजागरूकता के माध्यम से इसे रोका जा सकता है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि बच्चों में अच्छे संस्कार लाये जायं। कार्यशाला के इन्फोर्समेन्ट सत्र को प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह, सचिव गृह भगवान स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक यातायात दीपक रतन, राजस्थान की तान्या पचैरी, आसाम राज्य परिवहन के प्रबन्ध निदेशक आनन्द प्रकाश तिवारी ने भी सम्बोधित किया।
कार्यशाला के पांचवें सत्र वाहन सुरक्षा को परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह, प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला, परिवहन आयुक्त पी.गुरू प्रसाद, टाटा मोटर्स के जनरल मैनेजर शशि भूषण पाठक, इनटेल के प्रशंन्ना आर. बनवारा ने भी सम्बोधित किया।
UP_Dy_CM डॉ. दिनेश शर्मा ने भी इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में आयोजित सड़क सुरक्षा कार्यशाला के शिक्षा और जागरुकता कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना बच्चों एवं बड़ों सभी को अपने स्वभाव में लाना जरूरी है। सड़क सुरक्षा से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन हो इसके लिए मॉडर्न तकनीकी का सहयोग लिया जाना बहुत जरुरी है। शिक्षा, जागरुकता और सड़क सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन करना सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहयोगी होगा। सड़क सुरक्षा किसी एक के प्रयास से संभव नहीं है, इसके लिए सभी को आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाना जरूरी है। अध्यापकों, अभिभावकों, वाहन चालक, पुलिस प्रशासन एवं परिवहन विभाग का इसमें अहम दायित्व है। दुर्घटना बहुत ही दुखद होती है, इसको रोकने के लिए हर संभव इंतजाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृष्णा नगर लखनऊ में सड़क सुरक्षा के दृष्टि से लोगों को जागरुक करने के लिए एक ट्रैफिक पार्क का निर्माण करवाया गया, जहां पर बच्चों को भ्रमण कराकर यातायात के नियमों के प्रति जागरूक किया जा सकता है। नियमों का अनुपालन सभी को करना होगा। सड़क सुरक्षा पर नगर निगम, नगर विकास प्राधिकरण, ट्रैफिक पुलिस एवं परिवहन विभाग सभी एक साथ मिलकर एक समावेशीयोजना का निर्माण करें।
UP_Dy_CM डॉ. दिनेश शर्मा ने शर्मा ने इस अवसर पर ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस प्रदान करते समय परिवहन विभाग द्वारा लोगों को सड़क सुरक्षा के समस्त नियमों के बारे में जानकारी दिया जाना जरुरी है। नियमों का पालन सदैव करना चाहिए, ट्रैफिक नियमों का पालन स्वयं तथा दूसरों के जीवन लिए भी महत्वपूर्ण है। नियमों का कड़ाई से पालन हो, इसमें पुलिस प्रशासन तथा परिवहन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। शहर में पार्किंग स्थल ज्यादा से ज्यादा बनाए जाने पर बल दिया जाना होगा जिससे जाम की समस्या से निजात पायी जा सके। सड़क सुरक्षा के लिए एक सिस्टम विकसित करना होगा।
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने के फायदे एवं न पहनने के नुकसान के बारे में समझाया जाए और चार पहिया वाहन चालकों एवं बैठने वालों को सीट बेल्ट लगाने हेतु प्रेरित किया जाए। हेलमेट व सीट बेल्ट न लगाने वालों का चालान अवश्य किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों को चिन्हित कर सड़क सुधार किया जाए। प्रदेश के एक्सप्रेस-वे के निकट 3 किलोमीटर के अंदर के सरकारी अस्पताल को हम ट्रामा केयर के रूप में विकसित करेंगे। उन्होंने कहा कि मरीजों के हित में एम्बुलेंस सेवा और ट्रामा केयर को बढ़ाया जायेगा, प्रदेश में 712 एम्बुलेंस बढ़ाये जा रहे हैं। 150 एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस भी बढ़ायी जायेंगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार मरीजों के लिए सुविधाये बढ़ाकर उन्हें स्वस्थ रखने के प्रयास कर रही है।

सड़क सुरक्षा कार्यशाला में परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह, प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला, परिवहन आयुक्त पी.गुरू प्रसाद, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आलोक सिन्हा, टाटा मोटर्स के जनरल मैनेजर शशि भूषण पाठक, इनटेल के प्रशंन्ना आर. बनवारा आदि मौजूद रहे।






