उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा ‘रोड सेफ्टी ट्रैवलिंग वर्कशाप’ कार्यक्रम का समापन किया गया

लखनऊ (25 जुलाई, 2019)। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा लोक निर्माण विभाग के सभागार में 'रोड सेफ्टी ट्रैवलिंग वर्कशाप' कार्यक्रम का समापन किया गया। लोक निर्माण विभाग लखनऊ द्वारा सिविल इंजीनियरिंग विभाग, आई.आई.टी. (बी.एच.यू.) का ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग सेक्सन सात दिनों की ‘‘रोड सेफ्टी ट्रैवलिंग वर्कशाप’’ में आई.आई.टी. दिल्ली और आई.आई.टी. कानपुर के साथ यूपीपीडब्ल्यूडी इंजीनियरों के साथ आयोजित किया गया। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अभियन्ताओं एवं विशेषज्ञों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सड़कों के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य तेजी से होने के साथ जनता/यात्रियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सड़कों को निर्धारित मानक के अनुसार बनाया जाये तथा इसके साथ ही विशेषज्ञ स्पाॅट पर जाकर भौतिक रूप् से देखें तथा कमियों को दूर किया जाये। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उ.प्र. सड़क के निर्माण की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा यात्रा के जो भी सुझाव कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा दिया गया है, उसे प्रदेश की सड़कों में लागू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सभी लोग यहां से एक संकल्प लेकर जाये कि यात्रियों की सुरक्षा के सभी संभव उपाय किये जायें। सभी लोगों के प्रयास से ही यात्रियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सकेगी।प्रमुख अभियंता, विकास एवं विभागाध्यक्ष लो.नि.वि. लखनऊ वी.के. सिंह और आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञ प्रो. दिनेश मोहन, प्रो. गीतम तिवारी, प्रो. के.आर. राव, प्रो. गिरीश अग्रवाल और प्रो. के.एन. झा ने कार्याशाला में प्रतिभाग किया। यह कार्यशाला की एक अनूठी अवधारणा है, जिसमें क्षेत्र के इंजीनियरों के साथ एक विशेषज्ञ टीम दिल्ली से लखनऊ की यात्रा आगरा, कानपुर और वाराणसी की यात्रा होते हुए की है। यूपी के विभिन्न जिलों के इंजीनियर रास्ते में इस कार्यशाला में शामिल हुए और सड़क सुरक्षा सिद्धांतों और ऑडिट तकनीक के बारे में जानकारी प्राप्त की हर जगह पर छोटे व्याख्यान की व्यवस्था की गई और स्थल पर सड़क सुरक्षा ऑडिट प्रशिक्षण दिया गया इंजीनियरों ने विशेषज्ञों के साथ फील्ड ट्रेनिंग की एवं अपनी समस्याओं का निवारण किया। डाॅ. अंकित गुप्ता ने ‘‘फाॅरगिविंग रोड्स’’ के डिजाइन के पहलुओं पर जोर दिया है (ऐसी सड़कें जहां अगर ड्राइवर कुछ गलतियां करता है तो सड़क के डिजाइन द्वारा नुकसान को कम किया जा सके)। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दुर्घटनाओं और मृत्यु की संख्या को कम करने में सड़क इंजीनियरों की बड़ी भूमिका है। सुरक्षा प्रावधानों के लिए सड़क के डिजाइन की जाँच की जानी चाहिए। डाॅ. अभिषेक मुद्गल ने भारत और अमरीका में सड़क यातायात सुरक्षा के बीच तुलना का उल्लेख किया। प्रो. गीतम तिवारी ने विभिन्न भारतीय सड़क कांग्रेस कोड और सड़कों और सड़कों के किनारे सुविधाओं के सुरक्षित डिजाइन के लिए दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया। विशेषज्ञों ने सड़कों के निर्माण के दौरान सुरक्षा के बारे में भी जोर दिया। पैनल चर्चा पर एक सत्र आयोजित किया गया था, जिसमें विशेषज्ञों और फील्ड इंजीनियरों के बीच एक इंटरैक्टिव सत्र था, जिसमें सड़कों के सुरक्षित ज्यामितीय डिजाइन के दौरान क्षेत्र में प्रतिभागियों द्वारा समस्याओं के बारे में महत्वपूर्ण चर्चा की गई। सड़क डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया में सुधार के लिए विशेषज्ञों द्वारा कई मूल्यवान सुझाव दिए गए थे। पूरे आयोजन को प्रतिभागियों और विशेषज्ञों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। गीतम तिवारी ने उप मुख्यमंत्री एवं प्रमुख अभियन्ता एवं विभागाध्यक्ष को स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने दिनेश मोहन, रामाशंकर राव, कुमार नीरज झा, अंकित गुप्ता, अभिषेक अग्रवाल, योगेन्द्र सिंह, अजय कुमार, राज कुमार मौर्य, मृत्युंजय कुमार, दिनेश चन्द्र त्रिपाठी, सत्यजीत, आशुतोष कुमार, क्षक्ष्मन सिंह, विष्णु पाण्डेय, अजय सिंह और अंकित कुमार सिंह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
प्रमुख अभियंता, विकास एवं विभागाध्यक्ष लो.नि.वि. लखनऊ वी.के. सिंह और आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञ प्रो. दिनेश मोहन, प्रो. गीतम तिवारी, प्रो. के.आर. राव, प्रो. गिरीश अग्रवाल और प्रो. के.एन. झा ने कार्याशाला में प्रतिभाग किया। यह कार्यशाला की एक अनूठी अवधारणा है, जिसमें क्षेत्र के इंजीनियरों के साथ एक विशेषज्ञ टीम दिल्ली से लखनऊ की यात्रा आगरा, कानपुर और वाराणसी की यात्रा होते हुए की है। यूपी के विभिन्न जिलों के इंजीनियर रास्ते में इस कार्यशाला में शामिल हुए और सड़क सुरक्षा सिद्धांतों और ऑडिट तकनीक के बारे में जानकारी प्राप्त की हर जगह पर छोटे व्याख्यान की व्यवस्था की गई और स्थल पर सड़क सुरक्षा ऑडिट प्रशिक्षण दिया गया इंजीनियरों ने विशेषज्ञों के साथ फील्ड ट्रेनिंग की एवं अपनी समस्याओं का निवारण किया।
डाॅ. अंकित गुप्ता ने ‘‘फाॅरगिविंग रोड्स’’ के डिजाइन के पहलुओं पर जोर दिया है (ऐसी सड़कें जहां अगर ड्राइवर कुछ गलतियां करता है तो सड़क के डिजाइन द्वारा नुकसान को कम किया जा सके)। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दुर्घटनाओं और मृत्यु की संख्या को कम करने में सड़क इंजीनियरों की बड़ी भूमिका है। सुरक्षा प्रावधानों के लिए सड़क के डिजाइन की जाँच की जानी चाहिए। डाॅ. अभिषेक मुद्गल ने भारत और अमरीका में सड़क यातायात सुरक्षा के बीच तुलना का उल्लेख किया। प्रो. गीतम तिवारी ने विभिन्न भारतीय सड़क कांग्रेस कोड और सड़कों और सड़कों के किनारे सुविधाओं के सुरक्षित डिजाइन के लिए दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया। विशेषज्ञों ने सड़कों के निर्माण के दौरान सुरक्षा के बारे में भी जोर दिया। पैनल चर्चा पर एक सत्र आयोजित किया गया था, जिसमें विशेषज्ञों और फील्ड इंजीनियरों के बीच एक इंटरैक्टिव सत्र था, जिसमें सड़कों के सुरक्षित ज्यामितीय डिजाइन के दौरान क्षेत्र में प्रतिभागियों द्वारा समस्याओं के बारे में महत्वपूर्ण चर्चा की गई। सड़क डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया में सुधार के लिए विशेषज्ञों द्वारा कई मूल्यवान सुझाव दिए गए थे। पूरे आयोजन को प्रतिभागियों और विशेषज्ञों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
गीतम तिवारी ने उप मुख्यमंत्री एवं प्रमुख अभियन्ता एवं विभागाध्यक्ष को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने दिनेश मोहन, रामाशंकर राव, कुमार नीरज झा, अंकित गुप्ता, अभिषेक अग्रवाल, योगेन्द्र सिंह, अजय कुमार, राज कुमार मौर्य, मृत्युंजय कुमार, दिनेश चन्द्र त्रिपाठी, सत्यजीत, आशुतोष कुमार, क्षक्ष्मन सिंह, विष्णु पाण्डेय, अजय सिंह और अंकित कुमार सिंह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।








