भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी हो गई बहुमंजिला इमारत, मौजूदा अधिकारी काट रहे मलाई

रिपोर्ट : ऋषि कुमार शर्मा।
उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ चाहे कितना भी ईमानदारी का शँखनाथ फूंख लें। लेकिन उनके ही अधिकारी उनकी छवि धूमिल करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
राजधानी लखनऊ में लखनऊ विकास प्राधिकरण नाम का एक विभाग है जो लखनऊ में विकास कार्यों पर काम करता है। लेकिन वर्तमान समय में विकास की गंगा नवाबों के शहर लखनऊ में न बहकर अधिकारियों की जेब में गिर रही है। यह बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि विकास प्राधिकरण के अधिकारी जब कोई अवैध निर्माण होता है तब कार्यवाही नहीं करते हैं क्योंकि उसके बदले में उनको मोटी रकम मिल जाती है। कार्यवाही केवल तब होती है जब कोई नया अभियन्ता या जोनल अधिकारी आता है। आपको बता दें नया अधिकारी भी भ्रष्टाचार की गंगा में नहाने को आतुर रहता है क्योंकि पूर्व के अधिकारी गंगा सफाई के नाम पर अपने हाथ साफ कर गए थे।
आपको जानकर हैरानी होगी कि एलडीए प्रवर्तन जोन 3 के पारा थाने के पीछे बन रही बहुमंजिला इमारत की नींव केवल भ्रष्टाचार की दम पर टिकी हुई है। पूर्व में तैनात अवर अभियंता और जोनल अधिकारी ने केवल मानचित्र स्वीकृत की जानकारी दी थी। लेकिन खबर प्रकाशित होने के बाद लखनऊ मंडलायुक्त के यहां जांच में एक उच्च अधिकारी ने जांच में इस बहुमंजिला इमारत पर वाद दर्ज किया। मामला यहीं नही खत्म हुआ पिक्चर अभी बाकी है।
अब आपको बताते चले कि बीते एक महीने पहले एलडीए में एक बाढ़ आई, जिसमें कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को उच्च अधिकारियों ने प्रवर्तन से अभियंत्रण में बहा दिया। लेकिन जोनल अधिकारी मजबूत होने के कारण केवल इधर से उधर हुए। उसी बाढ़ में एक पूर्व के अवर अभियन्ता और जोनल अधिकारी ने भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी हो रही इमारत के मानचित्र स्वीकृत होने के प्रमाण दिए। लेकिन विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था। हुआ ऐसा कि हाल ही में विभाग के एक अधिकारी ने स्वीकृत मानचित्र संख्या को जांच में अस्वीकृत की मोहर लगा दी। जिसके बाद साफ हो गया कि नीचे से लेकर ऊपर तक बैठे अफसर केवल बहती गंगा में हाथ धोना चाहते हैं और कार्यवाही वहीं होती है जहां उनके हाथ खाली होते हैं।
प्रवर्तन जोन 3 में पारा थाने के पीछे बनकर खड़ी बहुमंजिला इमारत पर कब कार्यवाही होगी? यह राम भरोसे है क्योंकि जिसपर लखनऊ विकास प्राधिकरण का हाथ होगा उसका विकास कौन भला रोक सकता है।
अपनी ईमानदार छवि के लिए पहचानें जाने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी इस बहुमंजिला निर्माण पर क्या कार्यवाही करते हैं यह आने वाला समय बताएगा? या फिर बाकी अधिकारियों की तरह अपनी ईमानदारी का ढिंढोरा फुस्स करवायेगे।
क्या कहते है जोनल अधिकारी
एलडीए प्रवर्तन जोन-3 के जोनल अधिकारी राजीव कुमार से इस निर्माण के सम्बन्ध में जानकारी पर उन्होंने बताया कि सम्बंधित निर्माण का 7 मंजिला मानचित्र स्वीकृत है। जबकि जांच में कुछ अधिकारी मानचित्र स्वीकृत की बात कागज पर देते हैं और कुछ अधिकारी अस्वीकृत की। अब देखना होगा कि जोनल अधिकारी सच बोल रहे हैं या जांच में लगी कागजी रिपोर्ट गलत है। आखिर खेल किसका है ये तो उच्च स्तरीय जांच से साफ हो पायेगा?








