महर्षि वाल्मीकि नेे महाकाव्य रामायण की रचना कर लोगों को सत्य एवं कर्तव्यपरायणता पर चलने का मार्ग दिखाया : #CMYogi

लखनऊ (28 अक्टूबर, 2020)।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी 31 अक्टूबर, 2020 को महर्षि वाल्मीकि जयन्ती के आयोजन को भव्य तरीके से सम्पन्न कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आदि कवि महर्षि वाल्मीकि नेे महाकाव्य रामायण की रचना कर लोगों को सत्य एवं कर्तव्यपरायणता पर चलने का मार्ग दिखाया। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण सामाजिक मूल्यों, मानव मूल्यों एवं राष्ट्र मूल्यों की स्थापना का आदर्श है। उत्तर प्रदेश का यह सौभाग्य है कि भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या सहित रामायणकालीन अनेक स्थल राज्य में स्थित हैं। उन्होंने वाल्मीकि जयन्ती पर आयोजित किये जाने वाले समस्त कार्यक्रमों में कोविड-19 के प्रोटोकाॅल तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ण पालन कराने के निर्देश भी दिये हैं।

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इस सम्बन्ध में मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी द्वारा समस्त मण्डलायुक्त एवं समस्त जिलाधिकारियों (जनपद देवरिया, जौनपुर, उन्नाव, कानपुर नगर, अमरोहा, फिरोजाबाद, बुलन्दशहर को छोड़कर) को पत्र लिखकर आगामी 31 अक्टूबर, 2020 को महर्षि वाल्मीकि जयन्ती के आयोजन को भव्य तरीके से सम्पन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं।

पत्र में मुख्य सचिव ने उल्लिखित किया है कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा वर्णित स्थल, जिन्हें राम-जानकी मार्ग, राम वन-गमन मार्ग आदि के रूप में जाना जाता है, सम्पूर्ण भारत वर्ष में लगभग 280 स्थलों के रूप में आज भी विद्यमान है। उत्तर प्रदेश में राम-जानकी मार्ग तथा राम वन-गमन मार्ग के अन्तर्गत अनेक स्थल विद्यमान हैं, जहाँ भारतीय संस्कृति के मूल तत्व एवं मान्यताएं सुरक्षित हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख है कि इस वर्ष आगामी 31 अक्टूबर, 2020 को महर्षि वाल्मीकि की जयन्ती का पावन दिवस है, जिसे प्रदेश के समस्त जनपदों में भव्य रूप में मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। वाल्मीकि रामायण में निहित मानव मूल्यों, सामाजिक मूल्यों व राष्ट्र मूल्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार व जनमानस को इससे जोड़ने के लिए महर्षि वाल्मीकि से सम्बन्धित स्थलों/मंदिरों आदि पर दीप प्रज्ज्वलन/दीप दान के साथ-साथ अनवरत 06, 12 अथवा 24 घण्टे का वाल्मीकि रामायण का पाठ किए जाने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। श्रीराम व श्री हनुमान तथा रामायण से सम्बन्धित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों/मंदिरों का चयन करते हुए, वहां सुरुचिपूर्ण आयोजन के साथ रामायण पाठ/भजन आदि के कार्यक्रम कराए जाएंगे।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि इन कार्यक्रमों के आयोजन हेतु स्थानीय स्तर पर विभिन्न सांस्कृतिक दलों/कलाकारों का चयन संस्कृति विभाग एवं सूचना विभाग द्वारा किया जाए, जिसका समन्वय जिला प्रशासन द्वारा किया जाए। जनपद स्तर पर चयनित मंदिरों/स्थलों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के सम्बन्ध में जिलाधिकारी कार्यक्रम के आयोजन के अनुश्रवण के साथ-साथ कोविड-19 हेतु शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों व गाइडलाइन का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ण पालन करते हुए इस भव्य एवं दिव्य आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की व्यापक उचित भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। प्रिण्ट व इलेक्ट्राॅनिक मीडिया तथा सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करते हुए जनमानस को इससे जोड़ने की कार्यवाही की जाए।

पत्र में मुख्य सचिव ने यह भी उल्लिखित किया है कि प्रदेश स्तरीय इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने तथा सभी प्रकार के समन्वय के लिए संयुक्त निदेशक, संस्कृति निदेशालय, उ0प्र0 डाॅ0 योगेन्द्र प्रताप सिंह को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। जिलाधिकारी जनपद स्तरीय विभिन्न विभागों के समन्वय के माध्यम से इस कार्यक्रम को भव्यता के साथ सम्पन्न कराएं। इस आयोजन हेतु जिलाधिकारी अपने जनपद में एक नोडल अधिकारी नामित करें, जिनका नाम, मोबाइल नम्बर एवं ई-मेल आई0डी0 संस्कृति विभाग के नामित नोडल अधिकारी की ई-मेल आई0डी0 पर प्रेषित किया जाए। उन्होंने सम्पन्न कराये गये कार्यक्रमों के विवरण/फोटोग्राफ्स संस्कृति विभाग के नोडल अधिकारी की ई-मेल पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये हैं।

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